एएनएम की नौकरी के लिए तुरंत करें आवेदन

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ अखिलेश यादव सरकार शीघ्र ही मरीजों और संस्थागत प्रसव में सहयोग देने वाली दस हजार आशा बहुओं व सात हजार पुरुष एएनएम की भर्ती करेगी। यह भर्ती 5 हजार महिला एएनएम की भर्ती के अलावा होगी। पांच हजार महिला एएनएम की भर्ती की प्रक्रिया बुधवार से शुरू हो गयी है।यह जानकारी बुधवार को प्रदेश के परिवार कल्याण, मातृ एवं शिशु कल्याण मंत्री रविदास मेहरोत्रा ने यहां एक प्रेस कान्फ्रेंस दी।




मेहरोत्रा ने बताया कि प्रदेश में सात हजार हेल्थ वर्कर और 10 हजार आशा बहुओं के पद रिक्त हैं। इन पदों के रिक्त होने के कारण स्वास्य सेवाओं पर बुरा असर पड़ रहा है। शीघ्र इन पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। उन्होंने बताया कि इसके पहले राज्य सरकार ने 5 हजार एएनएम के पदों पर भर्ती का निर्देश दिया था जिसकी प्रक्रिया शुरू हो गयी है। श्री मेहरोत्रा ने बताया कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में महिला एवं बाल चिकित्सालयों में 10 हजार से अधिक बेडों के अस्पताल व वार्ड बनकर तैयार हैं। उनमें बेड, उपकरण, संसाधन आदि के न होने के कारण उनका लोकार्पण नहीं हो पा रहा था जबकि अस्पतालों में मरीज भरे पड़े हैं। ऐसे में सरकार ने तय किया है कि प्रदेश में बनकर तैयार अस्पतालों के वाडरे के सभी 10 हजार बेडों का शीघ्र ही लोकार्पण किया जायेगा।इसी तरह प्रदेश के सभी जनपदों में सिक न्यूबार्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) न होने के कारण अनेक नवजात शिशुओं की मृत्यु हो रही है।




प्रदेश सरकार ने आदेश दिया था कि प्रदेश के 76 अस्पतालों में एसएनसीयू की स्थापना की जाए। अभी तक सिर्फ 22 अस्पतालों में एसएनसीयू की स्थापना की गयी है। इस मद में 6.50 करोड़ रुपये जारी होने के बाद भी वर्ष भर में मात्र 36 लाख खर्च हुए हैं। बाकी पैसा क्यों नहीं खर्च हुआ इसकी जांच के आदेश दिये गये हैं। इसके लिए निदेशक मिशन प्रशासन की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित कर दी गयी है। इसमें विशेष सचिव परिवार कल्याण एवं निदेशक प्रशासन सदस्य होंगे। यह जांच कमेटी 10 दिन में अपनी रिपोर्ट देगी, इसके बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।इसी तरह लखनऊ के ठाकुरगंज स्थित सामुदायिक स्वास्य केंद्र पर बीते 21 माह में एक भी प्रसव न होने के मामले को सरकार ने गंभीरता से लिया है। यह स्थिति तब है, जब अस्पताल में 100 बेड उपलब्ध होने के साथ ही डाक्टर, फार्मासिस्ट, नर्से, जांच सुविधाएं व पर्याप्त दवाएं हैं।

मेहरोत्रा ने बताया कि निरीक्षण में जब यह बात उनके संज्ञान में आयी कि 100 बेड के इस अस्पताल में 80 बेड के कमरे बंद हैं और उनमें कबाड़ भरा है। अन्य कमरों में मात्र 20 बेड का संचालन होता है। इस पर अस्पताल के सभी सीएमएस से लेकर वार्ड ब्वाय तक का वेतन रोक दिया गया है। अस्पताल में प्रसव कार्य शुरू होने के बाद ही अस्पताल के अधिकारी व कर्मचारी वेतन आहरित किया कर सकेंगे। लखनऊ के ही सामुदायिक स्वास्य केंद्र नवल किशोर रोड हजरतगंज के 30 बेड के अस्पताल में मात्र 20 संचालित हो रहे हैं। 10 बेड के कक्ष में कबाड़ भरा पड़ा है। इनको तत्काल खाली कराकर तत्काल 10 बेड और संचालित करने का निर्देश दिया गया है। ऐसे ही सामुदायिक स्वास्य केंद्र इन्दिरानगर में भी 30 बेड के अस्पताल में भी मात्र 20 बेड संचालित हो रहे हैं, अन्य कमरों में कबाड़ भरा पड़ा है। इसे शीघ्र खाली कराकर चालू कराने का निर्देश दिया गया है।

Loading...