राजभवन से आजम खां को झटका, नगर निकाय से जुड़ा अध्यादेश राष्ट्रपति को भेजा

​लखनऊ। यूपी सरकार के नगर विकास मंत्री मो0 आजम खां द्वारा नगरीय स्वायत्ता शासन कानून में संशोधन के लिए 2016 में लाए गए अध्यादेश को राज्यपाल राम नाईक ने राष्ट्रपति को भेज दिया है। इस अध्यादेश में नगर निगमों के मेयरों और नगर पालिका अध्यक्षों से उनके अधीन आने वाले स्थानीय निकाय के अधिकारियों व कर्मचारियों की नियुक्ति और स्थानांतरण का अधिकार छीनकर राज्य सरकार को दिया जाना है।




राजभवन ने राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी को भेजे गए अध्यादेश के साथ भेजे अपने मत में स्पष्ट किया है कि यूपी सरकार का यह अध्यादेश लोकतांत्रिक मूल्य का हनन करता है। देश की संसद ने 1992 में एक संशोधन कर निकाय स्तर पर कार्य करने वाली संस्थाओं को स्वायत्तशासी संस्थाओं के रूप में मान्यता प्रदान की थी। इस संशोधन के आधार पर नगर निगमों और नगर पालिकाओं को मिले संवैधानिक अधिकारों के तहत मेयरों और नगर पालिका अध्यक्षों को अपने कर्मचारियों और अधिकारियों की नियुक्ती और स्थानांतरण का अधिकार प्राप्त है। जिसे यूपी सरकार का नगरीय स्वायत्ता शासन कानून में संशोधन अध्यादेश 2016 छीनने वाला प्रतीत हो रहा है।




उन्होंने उत्तर प्रदेश के नगर निगम अधिनियम 1954 और नगर पालिका अधिनियम—1916 का हवाला देते हुए कहा है कि इस कानून के तहत यूपी के स्थानीय निकाय की सरकारों को अधिकार है कि वे विभिन्न श्रेणियों के अधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्ति और स्थानांतरण करेंगी।




यूपी सरकार ने साल 2015 में यूपी के नगर निगम अधिनियम और नगर पालिका अधिनियम में संशोधन वाले दो अध्यादेश विधान सभा के दोनों सदनों में पास किए थे। जिन्हें कानून का रूप देने के लिए राज्यपाल राम नाईक के पास भेजा गया था। इस अध्यादेश के मुताबिक मेयरों और नगर पालिका अध्यक्षों पर भ्रष्टाचार और कुप्रशासन की शिकायत मिलने के बाद उनके वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार राज्य सरकार के प्रशासनिक अधिकारियों को दिए जा सकेंगे। इसके अलावा इस संशोधन में यह भी प्रवधान किया गया है कि स्थानीय निकाय के कर्मचारियों का स्थानांतरण किसी दूसरे ​नगर निगम या नगर पालिका में किया जा सकेगा। इस अध्यादेश पर राज्यपाल ने अपनी आपत्ति दर्ज करवाते हुए राष्ट्रपति के संज्ञान में लाते हुए विमर्श के लिए भेजा था।