अरुण जेटली ने उड़ाया राहुल गांधी का मजाक

नई दिल्ली। केन्द्र की सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने मंलगवार को अपने संसदीय दल की बैठक बुलाई। इस बैठक में केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने नोटबंदी के पक्ष में सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि विपक्षी के नेता इस फैसले को लेकर बेमतलब का विरोध कर रहे हैं। आने वाले समय में इस फैसले से गरीबों और गांवों को बड़ा फायदा मिलेगा।




उन्होंने नोटबंदी के खिलाफ मोर्चाबंदी करने मे सबसे आगे खड़े नजर आ रहे कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के बयानों पर चुटकी लेते हुए कहा कि एक ओर वह कहते हैं कि प्रधानमंत्री ने इस फैसले को पांच लोगों के बीच कर लिया। दूसरी ओर वह यह भी कहते हैं कि बीजेपी ने अपने लोगों का कालाधन सफेद करने के बाद यह फैसला लिया। इन दोनों बातों में से एक ही सही हो सकती है।

अरुण जेटली ने राहुल गांधी के बयान को दोहराते हुए कहा कि वह नोटबंदी का विरोध करते हुए कहते हैं कि प्रधानमंत्री ने 4—5 लोगों के बीच बिना किसी प्लानिंग के यह फैसला लिया है। वित्तमंत्री तक को इस बात की जानकारी नहीं होने दी। अपने इसी बयान के बाद राहुल गांधी केन्द्र सरकार पर आरोप लगाते हैं कि इस बात की जानकारी बीजेपी के लोगों को थी उन्होंने अपना सारा कालाधन बदल लिया। शायद राहुल गांधी नहीं जानते कि वित्तमंत्री भी बीजेपी से ही आते हैं और बाकी सब केन्द्रीय मंत्री भी बीजेपी के हैं। अगर मंत्रियों को उनके फैसले की जानकारी नहीं थी तो फिर राहुल गांधी के हिसाब से बीजेपी के वे लोग कौन से हैं जिन्हें प्रधानमंत्री ने यह जानकारी दी थी।




राहुल गांधी द्वारा केन्द्र सरकार पर नोटबंदी के फैसले से जमा होने वाली रकम को देश के बड़े कारोबारियों को लोन में दिए जाने के आरोप पर जवाब देते हुए जेटली ने कहा कि उनकी सरकार में किसी ऐसे कारोबारी को लोन नहीं दिया गया जिसके पुराने खाते एनपीए हों। एनपीए होने वाले ज्यादातर लोन कांग्रेस की नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के दिए हैं। जो लोग लोन चुकाए बिना भाग गए हैं, उनसे बसूली के लिए सरकार पूरा प्रयास कर रही है। जो रकम नोटबंदी से जमा होगी उससे आम लोगों और जरूरतमंदों रोजगार के लिए सस्ते दरों पर लोन दिया जाएगा। चूंकि यह रकम आसानी से मिल रही है बैंकों के पास अधिक मात्रा में पूंजी होगी इसलिए ब्याज की दरें भी कम होंगी।

इस बीच संसदीय दल की बैठक के दौरान अरुण जेटली ने कहा कि नोटबंदी को 13 दिन बीत चुके हैं। सरकार ने अब तक की प्रक्रिया पर पूरी तरह नजर रखी है। शहरों में हालात बेहतर हुए हैं लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में उतना ध्यान नहीं दिया जा सका। आने वाले 15 दिनों में केवल ग्रामीण क्षेत्रों की समस्या का हल निकाला जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों के लिए वित्त मंत्रालय ने कुछ नए नियम बनाए हैं। जिनकी घोषणा मंगलवार की शाम तक कर दी जाएगी।




आंकड़े पेश करते हुए अरूण जेटली ने कहा कि लाखों लाख नए नोट प्रिंट हो चुके हैं और अभी भी हो रहे हैं। जिन्हें देश में करीब 1लाख 25 हजार बैंक, करीब 1लाख 55 हजार डाकघर और 2 लाख से अधिक एटीएम केन्द्र तक जाना हैं। इन सभी जगहों तक करेंसी पहुंचाने के लिए निजी सिक्योरिटी एजेंसीज अनुबंधित की गईं हैं उनके भी हजारों सेंटर हैं। करीब छह लाख काउंटर्स हैं जिन से होकर नई करेंसी जनता तक पहुंचती है।

इन सभी तक करेंसी पहुंचने में समय लगता है। वर्तमान समय ऐसा है जब 86 प्रतिशत करेंसी अवैध घोषित हो चुकी है। ऐसे माहौल में नई करेंसी को प्रिंटिंग प्रेस से जनता तक पहुंचाना एक कठिन काम था। नए नोट का आकार छोटा होने की वजह से एटीएम मशीनों में बदलाव करने पड़ रहे हैं। एक मशीन में बदलाव करने के लिए औसतन 4 घंटे का समय लगता है। जिसे पूरी क्षमता के साथ अंजाम दिया जा रहा है।




केन्द्र सरकार को इस बात का पूरा अहसास है कि लोगों को उसके फैसले से परेशानी हो रही है। यह एक कठिन समय है। बैंकिग पर लागू की गई सीमाओं से लोगों की सारी जरूरतें पूरी नहीं हो पा रहीं हैं। ऐसा इसलिए करना पड़ा ताकि कम से कम करेंसी में ज्यादा से ज्यादा हाथों तक रोजमर्रा की जरूरतों के लिए नगदी पहुंचाई जा सके। जब करेंसी का प्रसार समान रूप से हो जाएगा तो ये सीमाएं हटा ली जाएंगी। सारी बैंकिग अपने पुराने ढर्रे पर लौट आएगी।

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