आपातकाल के दौरान खत्म की गई अग्रिम जमानत की व्यवस्था, यूपी में फिर से लागू राष्ट्रपति ने दी बिल को मंजूरी

agrim jamant
आपातकाल के दौरान खत्म की गई अग्रिम जमानत की व्यवस्था यूपी में फिर से लागू राष्ट्रपति ने दी बिल को मंजूरी

लखनऊ। यूपी में गैर जमानतीय अपराध के मुकदमे में गिरफ्तारी पर अग्रिम जमानत मिल सकेगी। सीआरपीसी की धारा 438 में संशोधन विधेयक को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मंजूरी दे दी है। यह विधेयक विधानमंडल के ​दोनों सदनों से पास कराकर राज्यपाल के माध्यम से राष्ट्रपति को भेजा गया था। प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार ने बताया कि एक जून को राष्ट्रपति ने इस संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी।

Anticipatory Bail System Reinstated In Uttar Pradesh :

6 जून से यह कानून यूपी में लागू हो गया है। 1976 में आपातकाल के दौरान प्रदेश में अग्रिम जमानत की व्यवस्था खत्म कर दी गई थी। बाद में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को छोड़कर अन्य राज्यों में अग्रिम जमानत की व्यवस्था बहाल कर दी गई थी। हालांकि यूपी में इस व्यवस्था को लागू करने की मांग लम्बे समय से हो रही थी, जिसे ध्यान में रखते हुए सरकार ने प्रमुख सचिव गृह की अध्यक्षता में समिति का गठन किया।

समिति की रिपोर्ट में की गई सिफारिश के आधार पर दंड प्रक्रिया संहिता संशोधन विधेयक—2018 विधानमंडल में पारित कराकर राष्ट्रपति के पास भेजा गया था, जिसे राष्ट्रपति ने मंजूरी दे दी है। संशोधन अधिनियम छह जून, 2019 से लागू हो गया है। वहीं अब अग्रिम जमानत की सुनवाई के दौरान अभियुक्त के उपस्थित रहना जरूरी नहीं होगा। संबंधित मुकदमे में पूछताछ के लिए जब बुलाया जाएगा तब पुलिस अधिकारी या विवेचक के समक्ष उपस्थित होना पड़ेगा। इसके अलावा मामले से जुड़े गवाहों व अन्य व्यक्तियों को न धमका सकेंगे और न ही किसी तरह का आश्वासन देंगे।

एससीएसटी एक्ट में नहीं मिलेगी अग्रिम जमानत
अग्रिम जमानत की व्यवस्था एससीएसटी एक्ट समेत अन्य गंभीर अपराध के मामलों में लागू नहीं होगी। आतंकी गतिविधियों से जुड़े मामलों (अनलाफुल एक्टिविटी एक्ट 1967), आफिशियल एक्ट, नारकोटिक्स एक्ट, गैंगस्टर एक्ट व मौत की सजा से जुड़े मुकदमों में अग्रिम जमानत नहीं मिल सकेगी।

लखनऊ। यूपी में गैर जमानतीय अपराध के मुकदमे में गिरफ्तारी पर अग्रिम जमानत मिल सकेगी। सीआरपीसी की धारा 438 में संशोधन विधेयक को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मंजूरी दे दी है। यह विधेयक विधानमंडल के ​दोनों सदनों से पास कराकर राज्यपाल के माध्यम से राष्ट्रपति को भेजा गया था। प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार ने बताया कि एक जून को राष्ट्रपति ने इस संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी। 6 जून से यह कानून यूपी में लागू हो गया है। 1976 में आपातकाल के दौरान प्रदेश में अग्रिम जमानत की व्यवस्था खत्म कर दी गई थी। बाद में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को छोड़कर अन्य राज्यों में अग्रिम जमानत की व्यवस्था बहाल कर दी गई थी। हालांकि यूपी में इस व्यवस्था को लागू करने की मांग लम्बे समय से हो रही थी, जिसे ध्यान में रखते हुए सरकार ने प्रमुख सचिव गृह की अध्यक्षता में समिति का गठन किया। समिति की रिपोर्ट में की गई सिफारिश के आधार पर दंड प्रक्रिया संहिता संशोधन विधेयक—2018 विधानमंडल में पारित कराकर राष्ट्रपति के पास भेजा गया था, जिसे राष्ट्रपति ने मंजूरी दे दी है। संशोधन अधिनियम छह जून, 2019 से लागू हो गया है। वहीं अब अग्रिम जमानत की सुनवाई के दौरान अभियुक्त के उपस्थित रहना जरूरी नहीं होगा। संबंधित मुकदमे में पूछताछ के लिए जब बुलाया जाएगा तब पुलिस अधिकारी या विवेचक के समक्ष उपस्थित होना पड़ेगा। इसके अलावा मामले से जुड़े गवाहों व अन्य व्यक्तियों को न धमका सकेंगे और न ही किसी तरह का आश्वासन देंगे। एससीएसटी एक्ट में नहीं मिलेगी अग्रिम जमानत अग्रिम जमानत की व्यवस्था एससीएसटी एक्ट समेत अन्य गंभीर अपराध के मामलों में लागू नहीं होगी। आतंकी गतिविधियों से जुड़े मामलों (अनलाफुल एक्टिविटी एक्ट 1967), आफिशियल एक्ट, नारकोटिक्स एक्ट, गैंगस्टर एक्ट व मौत की सजा से जुड़े मुकदमों में अग्रिम जमानत नहीं मिल सकेगी।