एनआरएचएम घोटाले के आरोपी अन्टू मिश्रा ने 13.5 करोड़ में खरीदी जमानत

Antu Mishra Deposited 13 5 Crore In Supreme Court To Get Bail

लखनऊ। आजकल एक कहावत प्र​चलित है कि पैसे से सब कुछ खरीदा सकता है। ऐसा ही देखने को मिल रहा है एनआरएचएम घोटाले के आरोपी और यूपी के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री अनंत कुमार मिश्रा उर्फ अन्टू मिश्रा के मामले में। इस घोटाले की जांच कर रही सीबीआई द्वारा आरोपी बनाए गए अन्टू मिश्रा पर अपने मां—बाप से मिलकर घोटाले से कमाए गए 27 करोड़ के काले धन को सफेद बनाने का आरोप लगाया है। जब परिवार की तीनों सदस्यों पर सीबीआई ने गिरफ्तारी की कार्रवाई करने का फैसला किया तो सभी भूमिगत हो गए। सीबीआई ने जब तीनों के नाम गैरजमानती वारंट जारी किया तो परिवार ने सर्वोच्च न्यायालय की शरण में जाकर राहत खरीद ली जिसकी कीमत थी घोटाले से जमा की गई रकम की आधी धनराशि, यानी 13.5 करोड़ रूपए। जिसे अन्टू मिश्रा ने बड़ी आसानी से गुरूवार को अदालत में जमा करवा दिया। आपको जानकार हैरानी होगी कि इतनी बड़ी रकम को जमा करवाना किसी भी आम आदमी के लिए एक बेहद कठिन काम है, लेकिन अंटू मिश्रा ने एक ही बैंक से दो ड्राफ्ट बनवाकर पूरी रकम अदालत में जमा करवा दी।




अब सवाल उठता है कि आखिर ये कैसा कानून है जो भ्रष्टाचारी को सहूलियत देने के लिए उसे 50 प्रतिशत डिकाउंट का आॅफर दे देता है। कहीं न कहीं अदालत के इस तरह के फैसले अंटू मिश्रा जैसे भ्रष्टाचारियों के हाथ मजबूत करने वाली नजीर बनते नजर आ रहे हैं। यह जगविदित है कि यूपी में 2007 से 2012 तक रही मायावती सरकार के दौरान स्वास्थ्य मंत्री रहे अंटू मिश्रा 5600 करोड़ के एनआरएचएम घोटाले में अहम भूमिका रखते हैं। अंटू मिश्रा के इशारे पर ही कई फर्जी कंपनियों को दवा व अन्य मेडिकल प्रोडक्ट्स की सप्लाई के ठेके मिले थे। जहां कंपनियों को परेशानी आई वहां सीएमओ का तबादला कर दिया गया। यही ठेके उस दौर में अंटू मिश्रा की कमाई का अहम जरिया हुआ करते थे। ऐसी कई कंपनियों के मालिकों को सीबीआई हिरासत में लेकर पूछताछ कर चुकी है। तमाम पुख्ता सुबूतों के आधार पर ही सीबीआई ने अंटू मिश्रा पर हाथ डाला था। जिसकेे बाद सामने आया कि अंटू मिश्रा ने अपने मां—बाप के नाम पर कंपनियां बनाकर 27 करोड़ की काली कमाई को सफेद किया था।




सीबीआई ने आगे कार्रवाई करते हुए जब अंटू मिश्रा और उनके मां—बाप को हिरासत में लेने का प्रयास किया तो वे भूमिगत हो गए। जिसके बाद सीबीआई की विशेष अदालत ने तीनों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया। लेकिन अंत में जो हुआ वो आज सुर्खियों में हैं। अंटू मिश्रा ने सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर 13.5 करोड़ रूपए के दो ड्राफ्ट बनवाकर अदालत में जमा करवा दिए हैं। जिसके आधार पर अदालत ने तीनों आरोपियों की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। बताया जा रहा है कि मिश्रा को मिली यह राहत अंतरिम हैं। अगर अदालत को लगता है कि अंटू मिश्रा और उनके परिवार की जमानत से आगे की जांच में वाधा आती है तो अदालत उनकी जमानत पर पूनरविचार कर सकती है।




इस पूरे घटना क्रम में एक बात स्पष्ट है कि भ्रष्टाचारियों की सुनवाई अदालतों में भी हो रही है। ये हंगामा केवल आम आदमी के बीच ही है कि भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों के खिलाफ अदालत सख्त है। हमारा उद्देश्य अदालत के फैसले पर उंगली उठाना बिलकुल नहीं है, लेकिन हम इतना जरूर कहना चाहते हैं कि जिस अंटू मिश्रा ने 27 करोड़ को सफेद किया है उसके पास और कितना कालाधन है और कहां है, और उसे कैसे पकड़ा जा सकता है इस बात का ध्यान भी अदालत को रखना चाहिए। अगर अंटू मिश्रा जैसे शातिर भ्रष्टाचारी ऐसे ही आजाद बने रहे तो सैकड़ों करोड़ का कालेधन तक सीबीआई कैसे पहुंच पाएगी?

लखनऊ। आजकल एक कहावत प्र​चलित है कि पैसे से सब कुछ खरीदा सकता है। ऐसा ही देखने को मिल रहा है एनआरएचएम घोटाले के आरोपी और यूपी के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री अनंत कुमार मिश्रा उर्फ अन्टू मिश्रा के मामले में। इस घोटाले की जांच कर रही सीबीआई द्वारा आरोपी बनाए गए अन्टू मिश्रा पर अपने मां—बाप से मिलकर घोटाले से कमाए गए 27 करोड़ के काले धन को सफेद बनाने का आरोप लगाया है। जब परिवार की तीनों सदस्यों पर…