पूर्व विधायक आरपी जायसवाल समेत दो बडे़ दवा कारोबारियों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी, अंटू मिश्रा की नहीं हो सकी पेशी

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की पूर्व बसपा सरकार में बहुचर्चित एनआरएचएम घोटाले में फंसे उत्तर प्रदेश के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री अनंत कुमार मिश्रा उर्फ अंटू मिश्रा बुधवार को गाजियाबाद सीबीआई विशेष कोर्ट पहुंचे। अंटू की जमानत अर्जी चूंकि सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, ऐसे में गाजियाबाद सीबीआई कोर्ट में उनकी पेशी नहीं हो सकी। उधर कोर्ट में पेश न होने पर देवरिया के पूर्व विधायक आरपी जायसवाल समेत दो बडे़ दवा कारोबारियों के खिलाफ विशेष न्यायाधीश पवन कुमार तिवारी ने गैर जमानती वारंट जारी कर दिए हैं। अगली सुनवाई के लिए कोर्ट ने 21 दिसंबर की तारीख नियत की है।




पूर्व स्वास्थ्य मंत्री अनंत कुमार उर्फ अंटू मिश्रा के खिलाफ सीबीआई कोर्ट में अब तक दो चार्जशीट पेश कर चुकी है। एक चार्जशीट में अंटू के साथ ही उनके माता-पिता विमला मिश्रा और दिनेशचंद्र मिश्रा को और दूसरी चार्जशीट में अंटू के साथ पूर्व कैबिनेट मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा, पूर्व विधायक आरपी जायसवाल, दवा कारोबारी रईस आलम सिद्दीकी व महेंद्र पांडेय का नाम है। गिरफ्तारी से बचने के लिए अंटू मिश्रा ने सुप्रीम कोर्ट की शरण ली थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई कोर्ट में 13.5 करोड़ रुपये जमा कराने का आदेश देते हुए सुनवाई 11 नवंबर तक टाल दी थी।

इसके चलते 3 नवंबर को ही अंटू मिश्रा ने गाजियाबाद सीबीआई कोर्ट में 13.5 करोड़ बैंक ड्राफ्ट के माध्यम से जमा करा दिए थे। उधर 11 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने जमानत अर्जी पर सुनवाई के लिए 17 नवंबर की तारीख नियत कर रखी है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने अंटू की गिरफ्तारी पर 18 नवंबर तक स्टे लगा रखा है। इसी मामले में आरोपी रहे पूर्व कैबिनेट मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा के अधिवक्ता ने कोर्ट में पेश होकर भरोसा दिलाया कि वह अगली तारीख पर अपने मुवक्किल को पेश कर देंगे। जबकि पूर्व विधायक आरपी जायसवाल और दवा कारोबारी रईस आलम सिद्दीकी व महेंद्र पांडेय के कोर्ट में पेश न होने पर विशेष न्यायाधीश ने तीनों के गैर जमानती वारंट जारी कर दिए।




गौर हो कि इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अनंत कुमार मिश्रा उर्फ अंटू व उनके माता- पिता विमला मिश्र व दिनेश चंद्र मिश्र को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अंतरिम राहत देने से इंकार कर दिया है। सतीश चंद्र मिश्र ने शिव कुमार केस का हवाला देते हुए कहा कि क्षेत्राधिकार पर आपत्ति अर्जी निर्णीत किए बगैर कोर्ट याची के उत्पीड़न की कार्यवाही नहीं कर सकता। यह भी कहा कि अनंत मिश्र एनआरएचएम विभाग के मंत्री नहीं थे और सीबीआई ने उन्हें फंसाया है।

जहां तक माता- पिता का प्रश्न है, उन पर घोटाले का आरोप नहीं है। आपराधिक उत्प्रेरण का आरोप लगाया गया है। कहा गया है कि छह सीएमओ से 22 करोड़ लेकर माता- पिता की कंपनी में लगाया जबकि वह कंपनी 50 लाख की भी नहीं है। सीबीआई ने बिना पर्याप्त सबूत के पूरे परिवार को फंसाया है। सीबीआई द्वारा एकत्र साक्ष्यों से इनके विरुद्ध कोई आरोप नहीं बनता। कोर्ट ने इन्हें सीबीआई कोर्ट में हाजिर होकर पक्ष रखने को कहा है।

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