Apara Ekadashi 2019: अपरा एकादशी पर इस विधि से करें भगवान विष्णु की पूजा

Apara Ekadashi 2019: अपरा एकादशी पर इस विधि से करें भगवान विष्णु की पूजा
Apara Ekadashi 2019: अपरा एकादशी पर इस विधि से करें भगवान विष्णु की पूजा

लखनऊ। ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को अपरा एकादशी कहा जाता हैं। इस बार अपरा एकादशी आज यानि 30 मई 2018 को पड़ रही है। इस दिन व्रत रहकर भगवान विष्णु की विशेष पूजा की जाती है। इस दिन अगर सच्चे मन से व्रत रख कर विधि-विधान के साथ पूजा की तो इसका पुण्य कई हजार गुना बढ जाता है। बता दें कि अपरा एकादशी को अचला एकादशी या फिर भद्रकाली एकादशी के नाम से भी जाना जाता हैं। जाने इस दिन से जुड़ी खास बातें…

Apara Ekadashi 2019 Puja Vidhi :

अपरा एकादशी व्रत एवं पूजन विधि—

  • इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करके व्रत का संकल्प लेना चाहिए।
  • इसके बाद भगवान विष्णु की धूप, दीप, फल, फूल, तिल आदि चढ़ा कर पूजा करें।
  • पूरे दिन निर्जल उपवास करें। अगर ना हो पाए तो 1 समय पानी और 1 फल खा सकते हैं।
  • पारण के दिन भगवान की दुबारा पूजा, कथा और पाठ करें।
  • कथा समाप्तन करने के बाद प्रसाद बाटें तथा ब्राह्मण को भोजन खिला कर दक्षिणा देकर भेजना चाहिये।
  • बाद में आप व्रत खोल कर भोजन कर सकते हैं।

अपरा एकादशी के दिन ‘ओम नमो नारायण’ मंत्र का जाप करें। साथ ही अपने मन को शांत करने के लिये प्रभु का नाम दोहराएं।

अपरा एकादशी व्रत कथा

मान्यता है कि प्राचीन काल में महीध्वज नामक एक राजा था। उसका छोटा भाई वज्रध्वज बड़ा क्रूर तथा अन्यायी था। जो अपने बड़े भाई से नफरत करता था। एक दिन उसने रात में अपने बड़े भाई की हत्या करके उसके शरीर को एक पीपल के नीचे गाड़ दिया। इस अकाल मृत्यु से राजा प्रेतात्मा बन कर उसी पपील पर बस गया और अनेक उत्पात करने लगा। एक दिन धौम्य नामक ॠषि उधर से गुजरे।

उन्होंने प्रेत को महसूस कर लिया और अपने तपोबल से उसके अतीत को जान लिया। ॠषि ने उस प्रेत को पेड़ से उतारा और उसकी प्रेत योनि से मुक्ति दिलाने के लिये खुद ही अपरा एकादशी का व्रत किया। इसका जो पुण्य मिला उन्होंने उस प्रेत को अर्पित कर दिया। इस कारण से राजा की प्रेत योनि से मुक्ति हो गई और वह दिव्य देह धारण कर स्वर्ग में चला गया।

लखनऊ। ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को अपरा एकादशी कहा जाता हैं। इस बार अपरा एकादशी आज यानि 30 मई 2018 को पड़ रही है। इस दिन व्रत रहकर भगवान विष्णु की विशेष पूजा की जाती है। इस दिन अगर सच्चे मन से व्रत रख कर विधि-विधान के साथ पूजा की तो इसका पुण्य कई हजार गुना बढ जाता है। बता दें कि अपरा एकादशी को अचला एकादशी या फिर भद्रकाली एकादशी के नाम से भी जाना जाता हैं। जाने इस दिन से जुड़ी खास बातें... अपरा एकादशी व्रत एवं पूजन विधि---
  • इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करके व्रत का संकल्प लेना चाहिए।
  • इसके बाद भगवान विष्णु की धूप, दीप, फल, फूल, तिल आदि चढ़ा कर पूजा करें।
  • पूरे दिन निर्जल उपवास करें। अगर ना हो पाए तो 1 समय पानी और 1 फल खा सकते हैं।
  • पारण के दिन भगवान की दुबारा पूजा, कथा और पाठ करें।
  • कथा समाप्तन करने के बाद प्रसाद बाटें तथा ब्राह्मण को भोजन खिला कर दक्षिणा देकर भेजना चाहिये।
  • बाद में आप व्रत खोल कर भोजन कर सकते हैं।
अपरा एकादशी के दिन 'ओम नमो नारायण' मंत्र का जाप करें। साथ ही अपने मन को शांत करने के लिये प्रभु का नाम दोहराएं। अपरा एकादशी व्रत कथा मान्यता है कि प्राचीन काल में महीध्वज नामक एक राजा था। उसका छोटा भाई वज्रध्वज बड़ा क्रूर तथा अन्यायी था। जो अपने बड़े भाई से नफरत करता था। एक दिन उसने रात में अपने बड़े भाई की हत्या करके उसके शरीर को एक पीपल के नीचे गाड़ दिया। इस अकाल मृत्यु से राजा प्रेतात्मा बन कर उसी पपील पर बस गया और अनेक उत्पात करने लगा। एक दिन धौम्य नामक ॠषि उधर से गुजरे। उन्होंने प्रेत को महसूस कर लिया और अपने तपोबल से उसके अतीत को जान लिया। ॠषि ने उस प्रेत को पेड़ से उतारा और उसकी प्रेत योनि से मुक्ति दिलाने के लिये खुद ही अपरा एकादशी का व्रत किया। इसका जो पुण्य मिला उन्होंने उस प्रेत को अर्पित कर दिया। इस कारण से राजा की प्रेत योनि से मुक्ति हो गई और वह दिव्य देह धारण कर स्वर्ग में चला गया।