जजों की नियुक्ति को लेकर केंद्र को फटकार, क्या कोर्ट में ताला लगाकर लोगों को न्याय देना बंद कर दें?

नई दिल्ली। जजों की नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार के बीच चला आ रहा टकराव खुलकर सामने आ गया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार समूची न्याय व्यवस्था को ठप नहीं कर सकती। जजों की कमी से अदालतों पर ताले लगाने की नौबत आ गई है। चीफ जस्टिस तीरथ सिंह ठाकुर, जस्टिस धनंजय चन्द्रचूड़ और एल नागेश्वर राव की बेंच ने खचाखच भरी अदालत में अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी से तल्ख लहजे में कहा कि आप संस्थान के काम को पूरी तरह ठप नहीं कर सकते। अगर आपको किसी नाम से समस्या है तो कृपया इसे वापस भेजें और हमसे पुनर्विचार करने को कहें।हाई कोटरे में न्यायाधीशों की नियुक्ति में विलंब पर बेंच ने कर्नाटक हाई कोर्ट का उदाहरण दिया जहां न्यायाधीशों के अभाव में एक पूरे फ्लोर पर ताला लगा दिया गया है। बेंच ने कहा कि आप अब अदालत कक्षों को भी बंद कर सकते हैं और न्याय को भी बंद कर सकते हैं। अदालत ने शुरुआत में पीएमओ और विधि एवं न्याय मंत्रालय के सचिवों को फाइल के साथ तलब करने की बात कही।



अदालत उस समय नाराज हो गई जब रोहतगी ने शुरुआत में ही मेमोरेंडम आफ प्रोसीजर (एमओपी) को अंतिम रूप नहीं दिए जाने का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इसकी वजह से नियुक्ति प्रक्रि या में बाधा आ रही है और शीर्ष अदालत के हालिया फैसले के मद्देनजर यह जरूरी है। शीर्ष अदालत ने एनजेएसी अधिनियम को निरस्त कर दिया था। अदालत ने कहा कि विधि मंत्रालय ने सहमति जताई थी कि एमओपी को अंतिम रूप नहीं दिया जाना नियुक्तियों को रोकने का आधार नहीं हो सकता और इसे पुराने एमओपी के आधार पर किया जा सकता है।बेंच ने कहा कि कोई गतिरोध नहीं होना चाहिए। आपने एमओपी को अंतिम रूप दिए बगैर न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए फाइलें आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई है। एमओपी को अंतिम रूप देने का न्यायपालिका में नियुक्ति प्रक्रि या के साथ कोई लेना देना नहीं है। आपने कहा था कि पुराने एमओपी के अनुसार नियुक्ति की जा सकती है।अदालत ने कहा कि कॉलेजियम ने जिन 77 नामों की सिफारिश की है, उसमें से अब तक 18 नामों को मंजूरी दी गई है। कुछ भी नहीं हो रहा है। नौ महीनों से कॉलेजियम ने जो आपको नाम दिए हैं, वो आपके पास पड़े हुए हैं। आप नामों को दबाकर बैठे हुए हैं। आप किस बात की प्रतीक्षा कर रहे हैं। व्यवस्था में कुछ बदलाव की।




व्यवस्था में कुछ क्रांति की।अदालत ने कहा कि केंद्र नियुक्तियों को नहीं रोक सकता है। कार्यपालिका की निष्क्रि यता संस्था को नष्ट कर रही है। बेंच ने इलाहाबाद हाई कोर्ट का उल्लेख किया और कहा कि कॉलेजियम ने न्यायाधीश के तौर पर नियुक्ति के लिए 18 नामों की सिफारिश की थी और सरकार ने आठ को चुना और अब सिर्फ दो को नियुक्त करना चाहती है। बेंच ने कहा कि आप देखें, हमने इस साल चार फरवरी को ही फाइलों को हरी झंडी दे दी थी। हमें बताएं कि क्या प्रगति हुई है। वह विधि मंत्रालय और पीएमओ के सचिवों को अपने समक्ष उपस्थित होने को कह सकती है।सीजेआई ने सुनवाई के दौरान कहा कि आप उन्हें बुलाएं, मैं उन्हें सुनना चाहता हूं। अटॉर्नी जनरल ने कहा कि एनजेएसी फैसले में कहा गया था कि नया एमओपी होना चाहिए और फैसले का उल्लेख करने का प्रयास किया। रोहतगी ने कहा कि अगर सबकुछ एमओपी के बिना ही किया जा सकता है, तो आपको एमओपी की जरूरत ही क्यों है। अदालत ने कहा कि किसने कहा कि अभी कोई एमओपी नहीं है।




नियुक्तियां फिलहाल पुरानी व्यवस्था के अनुसार की जा रही हैं। लगता है हमारा सहिष्णु रवैया काम नहीं कर रहा है। अगर आप इस तरह चलेंगे तो हम फिर से पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ का गठन करेंगे और कहेंगे कि सरकार को नए एमओपी को तैयार किए जाने तक न्यायिक नियुक्तियों में अड़ंगा डालने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। हम आपके साथ टकराव नहीं करना चाहते हैं। लेकिन अगर इस तरह चलता रहा तो हम पांच न्यायाधीशों की पीठ का गठन करेंगे और कहेंगे कि आप नियुक्तियों में अड़ंगा डाल रहे हैं।

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