यूपी जल निगम भर्ती फर्जीवाडे में बड़ा खुलासा, Aptech ने स्वीकार किया गलत थे कई प्रश्न

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पूर्व सीएम अखिलेश यादव के कार्यकाल के दौरान यूपी जल निगम में हुई 1300 भर्तियों में सामने आई अनियमितताओं को देखते हुए वर्तमान एमडी वाईके जैन ने एसआईटी जांच की सिफारिश कर दी है। इस बीच पर्दाफाश के सूत्रों से जानकारी मिली है कि जल निगम द्वारा फरवरी 2017 में भर्ती किए गए 975 इंजीनियरों और 325 लिपिकों की भर्ती के लिए अॅानलाइन टेस्ट करवाने वाली आईटी कंपनी अपटेक लिमिटेड (Aptech Limited) ने अपनी गलती स्वीकार की है। इन भर्तियों में फर्जीवाड़े के आरोप लगने के बाद करवाई गई विभागीय जांच में अपटेक लिमिटेड ने अपना पक्ष रखते हुए बताया था कि एक प्रश्नपत्र में पूछे गए 80 प्रश्नों में से 29 ऐसे थे जिनके सभी उत्तर विकल्प गलत थे। अपटेक द्वारा विभागीय जांच टीम के सामने उजागर किए गए तथ्यों के आधार पर इस भर्ती को विभागीय जांच में संदिग्ध करार दिया गया।

अपटेक कंपनी के कुबूलनामे को आधार माने तो जल निगम में हुई सभी 1300 भर्तियों में जमकर मनमानी और भ्रष्टाचार हुआ है। भर्ती पर लगे फर्जीवाड़े के आरोप आधारहीन और खोखले नहीं हैं। जल निगम में भर्तियों के लिए जो भी फर्जीवाडा हुआ उसमें तत्कालीन नगर विकास मंत्री और निगम के चेयरमैन मो0 आजम खां और नगर विकास विभाग के सचिव और सर्वेसर्वा रहे रिटायर्ड आईएएस एसपी सिंह की भूमिका पूरी तरह से संदिग्ध नजर आ रही है। जानकारों की माने तो मो0 आजम खां के मंत्री रहते जल निगम के किसी भी अधिकारी या इं​जीनियर की हैसियत नहीं थी कि वह उनकी मर्जी के बिना कोई फैसला ले सके। इस आधार पर यह कहना गलत नहीं होगा कि इस फर्जीवाड़े में उनकी भूमिका संदेह के दायरे में हैं।

क्या है अपटेक का खुलासा —

जल निगम द्वारा 2017 में की गई अलग—अलग भर्तियों की पूरी प्रक्रिया ही सवालों के घेरे में घिरी नजर आ रही थी। सूबे की सत्ता में परिवर्तन के बाद यूपी जल निगम के एमडी बने वाईके जैन ने कुर्सी संभालते ही इस मामले की विभागीय जांच की जिम्मेदारी मुख्य अभियंता अनूप सक्सेना और राजीव निगम को सौंपी थी।

इन दोनों अधिकारियों ने जब अपटेक आईटी कंपनी से इस विषय में पूछताछ की, तो कंपनी द्वारा बताया गया कि उसके द्वारा परीक्षा में शामिल हुए अभ्यार्थियों को जो प्रश्न पत्र दिए गए उनमें कई प्रश्न गलत थे। जिनमें से एक प्रश्नपत्र में पूछे गए 80 प्रश्नों में से 29 ऐसे थे जिनके उत्तर विकल्प रूप में दिए गए चार विकल्पों में था ही नहीं। सीधे शब्दों में कहा जाए तो 80 में से 29 सवाल गलत थे।

परिणामों की घोषणा और नियुक्तिपत्र जारी होने की तिथि ने बढ़ाया संदेह—

सूत्रों की माने तो यूपी जल निगम की ओर से भर्ती के नतीजों के साथ आॅनलाइन टेस्ट की उत्तर पुस्तिकाओं को आॅनलाइन सार्वजनिक नहीं किया गया। इसके अलावा भर्ती की पूरी प्रक्रिया जिस तेजी के साथ करवाई गई वह भी अपने आप में सवालिया निशान खड़े करती है। परिणामों के बाद नए कर्मचारियों को नियुक्तिपत्र और तैनाती देने की तिथि और उत्तर प्रदेश में आर्दश आचार संहिता लागू होने की तिथि का एक होना भी जिम्मेदार लोगों की नियत पर सवाल खड़े करता नजर आ रहा है।

रिश्तेदारों और कीमत चुकाने वाले अभ्यार्थियों को मिली नौकरी—

सूत्रों की माने तो फरवरी 2017 की भर्ती में सफल होकर जल निगम में नौकरी पाने वाले तमाम इंजीनियर और लिपिक तत्कालीन सत्तारुढ़ दल के नेताओं के रिश्तेदार और नौकरी के बदले लाखों की कीमत चुकाने वाले लोग हैं। जिन्हें योग्यता नहीं बल्कि जल निगम पर उस दौर में हावी रहे भ्रष्टाचार के बल पर नौकरी मिली, जबकि योग्य अभ्यार्थियों को असफल करार दे दिया गया।

जिन उम्मीदवारों का चयन किया जाना था उनकी फाइनल लिस्ट तत्कालीन मंत्री मो0 आजम खां और उनके विश्वासपात्र रहे एसपी सिंह समेंत उन गिने चुने लोगों की सिफारिश पर तैयार की गई जिनके माध्यम से पैसों का लेन हुआ था।