Aptech Limited को जरिया बनाकर जल निगम में अंजाम दिया गया भर्ती घोटाला

Aptech Limited को जरिया बनाकर जल निगम में अंजाम दिया गया भर्ती घोटाला

लखनऊ। यूपी जल निगम भर्ती घोटाला इन दिनों सुर्खियों में है। हाल ही में जल निगम ने भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी सामने आने का हवाला देकर 2017 में नौकरी पाने वाले 120 सहायक अभियंताओं को बर्खास्त किया है। इस भर्ती घोटाले की जांच कर रहे अधिकारियों की रिपोर्ट में कई लूप होल नजर आते हैं क्योंकि यह रिपोर्ट भर्ती के लिए आॅनलाइन टेस्ट करवाने वाली कंपनी अपटेक लिमिटेड (Aptech Limited) और जल निगम के अधिकारियों के बीच की सांठगांठ को पूरी तरह से नजरंदाज करती नजर आ रही है।

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक यूपी जल निगम ने आॅनलाइन टेस्ट करवाने के लिए अपटेक कंपनी के चुनाव का आधार कमीशन था, जिसे एडवांस में लिया गया। भर्ती प्रक्रिया पूरी होने तक यूपी के विधानसभा चुनाव करीब आ गए थे और किसी भी समय आचार संहिता लागू हो सकती थी। अपटेक कंपनी को परीक्षा में हुई हर बारीक गड़बड़ी की जानकारी थी और उसे मालूम था कि परीक्षा विवादों में आएगी और उसका पेमेंट फंस जाएगा। जिसके लिए वह एडवांस में कमीशन भी दे चुकी थी।

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पेमेंट निकालने के लिए अपटेक ने दिखाई होशियारी —

अपटेक कंपनी ने अपना पेमेंट निकालने के लिए इस भर्ती के फाइनल रिजल्ट को रोक दिया। दूसरी तरफ जल निगम था जिसे आचार सहिंता लागू होती दिख रही थी। आचार संहिता लागू से पहले भर्ती पूरी करने के लिए यूपी जल निगम ने 2 जनवरी 2017 को अपटेक कंपनी का भुगतान किया। अपटेक कंपनी ने भी 2 जनवरी की रात ही करीब 2ण्30 बजे फाइनल परिणाम घोषित कर दिया। यानी 3 जनवरी को रिजल्ट देखा गया।

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जल निगम ने फाइनल रिजल्ट आने के बाद 48 घंटे के भीतर यानी 4 जनवरी को सभी चयनित उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र जारी कर दिए। इसके अगले दिन 5 जनवरी को यूपी में चुनाव आचार ​सहिंता लागू होने की घोषणा कर दी गई थी।

अपटेक को रिजल्ट के साथ मार्कशीट भी करनी थी जारी —

अपटेक कंपनी और जल निगम के बीच आॅनलाइन टेस्ट को लेकर हुए करार के मुताबिक अपटेक को रिजल्ट के साथ मार्कशीट भी आॅनलाइन जारी करनी थी। लेकिन कंपनी ने ऐसा नहीं किया और जल निगम के अधिकारियों ने भी अपटेक की इस गलती पर ध्यान नहीं दिया। जो अपटेक की गलती से ज्यादा जल निगम के अधिकारियों की सलाह पर ​की गई गलती कही जानी चाहिए।

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इंटरव्यू में हुआ बड़ा खेल —

यूपी जल निगम की 2016—17 की भर्ती प्रक्रिया हर स्तर पर संदिग्ध नजर आती है। इस भर्ती को जल निगम के तत्कालीन चेयरमैन मो0 आजम खां और जल निगम के तत्कालीन एमडी पीके आसुदानी ने किस तरह प्रभावित किया यह इस भर्ती का इंटरव्यू बोर्ड बता सकता है। इंटरव्यू बोर्ड के सदस्य रहे अधिकारियों को विशेष अभ्यार्थियों को अधिक अंक देने के निर्देश दिए गए थे।

सभी 1300 लोग होंगे बर्खास्त —

सीएम योगी आदित्यनाथ की सरकार ने भले ही यूपी जल निगम ने 4 जनवरी 2017 को बतौर सहायक अभियंता नियुक्ति पाने वाले 120 लोगों को जांच के आधार पर बर्खास्त कर दिया हो, लेकिन इन इंजीनियरों के साथ भर्ती हुए शेष 1180 जेई और क्लर्कों की बर्खास्तगी भी तय मानी जा रही है।

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योगी सरकार में भी आजम खां के करीबियों को बचाने की कोशिश जारी—

उत्तर प्रदेश में भले ही सरकार बदल गई है। यूपी का नगर विकास विभाग सुरेश खन्ना जैसे वरिष्ठ नेता के हाथ में है, लेकिन उनके अधिकार क्षेत्र में आने वाले यूपी जल निगम में पूर्व मंत्री और निगम के चेयरमैन मो0 आजम खां के इशारे पर घोटाले करने वालों पर कोई आंच आती नहीं दिख रही।

जल निगम भर्ती घोटाले की जांच में भ्रष्टाचार सामने आने के बाद विभाग ने भले ही नव नियुक्त कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया हो लेकिन किसी दोषी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की कोई जानकारी सामने नहीं आई। आखिर ऐसा क्या है कि विभाग में दोषियों को न सिर्फ बचाया जा रहा है, बल्कि बड़ी और अहम जिम्मेदारियां भी दी जा रहीं हैं।

विभाग के लोगों का कहना है मंत्री जी इतने वरिष्ठ हैं कि वह निगम की बैठकों में सो जाते हैं। आधी कार्रवाई में वह सोते रहते हैं, बाकी कार्रवाई में वह औपचारिक रूप से मौजूद रहकर इधर उधर के सवाल उठाकर अपनी उपस्थिति का अहसास करवाते रहते हैं।

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