सहारनपुर जेल होगी खाली, रोहिल राजवंश के ऐतिहासिक किले को कब्जे में लेगा पुरातत्व विभाग

Saharanpur Jail
सहारनपुर जेल होगी खाली, रोहिल राजवंश के ऐतिहासिक किले को कब्जे में लेगा पुरातत्व विभाग

Archaeological Department Noticed Uttar Pradesh Jail Department To Vacant Saharanpur District Jail

सहारनपुर। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले की जेल को पुरातत्व विभाग (Archaeological Survey of India) ने खाली करने का नोटिस भेजा है। यह जेल पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित किए गए रोहिल राजवंश के किले में बनी है। जिसे 1868 में जेल में तब्दील कर दिया गया था। 1920 में यह किला पुरातत्व विभाग ने संरक्षित किया था, लेकिन अब एकाएक विभाग को इस किले की याद आई है।

पुरातत्व विभाग के नोटिस ने यूपी सरकार के जेल विभाग में हडकंप मचा दिया है। इस समय जेल के भीतर करीब 1690 बंदी मौजूद हैं जिन्हें स्थानान्तरित करना चुनौती से कम नजर नहीं आ रहा है। जानकारों की माने तो उत्तर प्रदेश की जेलों में क्षमता से चार से छह गुना अधिक है, ऐसे में सहारनपुर जेल के कैदी कहां भेजे जाएंगे यह एक समस्या बन गया है।

सहारनपुर जेल प्रशासन की माने तो सहारनपुर जिला जेल की वर्तमान क्षमता 530 बंदियों की है। जिसके लिए नौ बैरक हैं, जिनमें 1690 बंदी कैद हैं। पुरातत्व विभाग ने सीनियर जेल सुपरीटेंडेंट को नोटिस भेजकर जेल कैंपस को पुरातात्विक धरोहर बताते हुए इसे जल्द से जल्द खाली करने का निर्देश दिया था। उन्होंने शासन को पत्र भेजकर जिला जेल को दूसरी जगह बनवाकर इसे नये भवन में शिफ्ट करने की इजाजत मांगी है। आईजी जेल पीके मिश्र ने बताया कि पुरातत्व विभाग के नोटिस के बारे में शासन को जानकारी दे दी गई है। आदेश मिलने पर नई जेल बनाने की कवायद शुरू हो सकेगी।

सहारनपुर ​जेल का इतिहास —

आज सहारनपुर जिला जेल के रूप में पहचान रखने वाली इमारत का इतिहास सैकड़ों साल पुराना है। यह इमारत करीब 200 साल पहले रोहिल राजवंश का किला हुआ करती थी। सन् 1868 में ब्रिटिश हुकूमत ने इस महल को रातों रात जेल बना दिया था। उस समय इस जेल की क्षमता 232 कैदियों की थी। वर्ष 1920 में भारतीय पुरातत्व विभाग ने इस जेल को संरक्षित स्मारक घोषित तो कर दिया, लेकिन इसकी सुध लेने का वक्त विभाग को नहीं मिला। इस दौरान देश के आजाद होने के बाद इस जेल को सरकारें अपनी जरूरत के हिसाब से विकसित करतीं रहीं।

बताया जाता है कि इस जेल को लेकर पुरातत्व विभाग पहली बार वर्ष 2014 में सक्रिय हुआ। जेल के गेट पर अब भी एक बोर्ड भी लगाया गया है जिस पर इस जेल को रोहिल्ला राजवंश का पुराना किला बताया गया है। जिसके बाद से पुरातत्व विभाग ने जेल में कोई नया निर्माण करने पर रोक लगा दी थी। जेल के कुछ हिस्सों में खनन को अंजाम दिया गया जिसमें पुरातत्व विभाग को महत्वपूर्ण साक्ष्य बरामद हुए जिनके आधार पर पुरातत्व विभाग ने कार्रवाई करते हुए जेल प्रशासन को नोटिस भेजा है।

रोहिल राजवंश का इतिहास —

रोहिल राजवंश का वर्णन इतिहास में रुहेल, रुहिल्ला और रोहिल्ला जैसे नामों से पहचाना जाता है। रोहिल राजवंश के लोग मूलरूप से राजपूत लड़ाके थे, जिन्हें रोहिल की उपाधि सम्मान के रूप में मिली थी। इनके राज्य को रुहेलखंड कहा जाता है। इस राजवंश का जिक्र महाभारत काल में भी मिलता है, जिसकी राजधानी बरेली हुआ करती थी। इस राजवंश के कई राजा हुए जिन्होंने रामपुर और सहारनपुर जैसी रियासतों को बसाया था। सहारनपुर का नाम रोहिल्ला राजवंश के गोत्र सहारन के नाम पर रखा गया था। रुहेलखंड एक समय में भारत के बड़े और समृद्ध राज्यों में गिना जाता था, जिसकी सीमा हरियाणा से लेकर बुंदेलखंड तक गंगा और यमुना के दुआब के रूप में हजारों किलोमीटर में फैली थी। मुगलकालीन इतिहास में भी रोहिल राजाओं से मुगलों के युद्ध का इतिहास मौजूद है।

वर्तमान में भी बरेली को रुहेलखंड के रूप में पहचाना जाता है। बरेली विश्वविद्यालय का नाम भी रुहेलखंड विश्वविद्यालय है।

सहारनपुर। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले की जेल को पुरातत्व विभाग (Archaeological Survey of India) ने खाली करने का नोटिस भेजा है। यह जेल पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित किए गए रोहिल राजवंश के किले में बनी है। जिसे 1868 में जेल में तब्दील कर दिया गया था। 1920 में यह किला पुरातत्व विभाग ने संरक्षित किया था, लेकिन अब एकाएक विभाग को इस किले की याद आई है। पुरातत्व विभाग के नोटिस ने यूपी सरकार के जेल विभाग में हडकंप…