क्या आप जानते हैं अपने बच्चे के मन की बात

दुनिया तेजी से बदल रही है। जिसका सबसे बड़ा बोझ पड़ रहा है हमारी नई पीढ़ी पर यानी बच्चों पर। शायद ही कोई पैरेंट ऐसे होंगे जो न चाहते हो कि उनका बच्चा ​सबसे आगे हो। लेकिन अपने बच्चे को आगे निकालने की होड़ में पैरेंट्स उनकी खुशी और रुचि दोनों को अनदेखा कर देते हैं। इस दौर में बच्चों के पास सीखने और करने के लिए बहुत कुछ है लेकिन वे क्या सीखना और करना चाहते हैं शायद इस बात को समझने वाले पैरेंट्स की बहुत कमी है। ज्यादातर पैरेंट्स बच्चों के सुरक्षित भविष्य की गारंटी के रूप में अपनी सोच उन पर लाद देते हैं। वे यह भी नहीं जानते कि जिसके अंदर इंजीनियर है वे उसे डाक्टर बनाने का सपना देख रहे हैं। इसका बच्चों पर प्रतिकूल असर पड़ता है। ऐसे बच्चे अपनी रुचि के खिलाफ चल तो देते हैं लेकिन मंजिल वैसी नहीं होती जैसी होनी चाहिए थी।

इसी विषय पर शोध किया है पिनवी नामक संस्था ने। इस संस्था ने पैरेंट्स पर किए सर्वेक्षण में यह जानने की कोशिश की कि वे अपने बच्चों की रुचि और खुशी के बारे में कितना जानते हैं। नतीजे में आए आंकड़े बेहद चौकाने वाले निकले। 54 प्रतिशत पैरेंट्स अपने बच्चे की रुचि के बारे में थोड़ी बहुत जानकारी रखते थे, जबकि 20 प्रतिशत को यह नहीं मालूम था कि उनके बच्चे को क्या करना अच्छा लगता है या क्या करने से उसे खुशी मिलती है। वहीं 26 प्रतिशत माता पिता दावा करते हैं की उनको अपनी संतान के विषय में पूरी जानकारी है।

इस सर्वेक्षण दूसरी सबसे अहम बात यह सामने आई कि जो पैरेंट्स अपने बच्चों की रुचि के बारे में जानते भी है उनमें से अधिकांश अपने बच्चों पर पढ़ाई पर ध्यान देने का ही दबाव बनाते हैं।

पिनवी की संस्थापक व सीईओ रचना खन्ना कहतीं हैं कि,’बड़े अफसोस की बात है की आज के समय में भी ऐसे पैरेंट्स हैं जो अपने बच्चों को सिर्फ पढ़ाई की ओर ढकेलने में जुटे हैं। बच्चे के सम्पूर्ण विकास के लिए ज़रूरी है कि बच्चा वही करे जिससे उसको खुशी मिले। बच्चे की रुचि के हिसाब से ही उसके टैलेंट को निखारना चाहिए ताकि वह आगे चलकर अपने मनपसंद काम को पेशे को चुन सके। इससे उसे संतुष्टी मिलने के साथ सफलता मिलने की संभावना कई गुना बढ़ जाएगी। पैरेंट्स को चाहिए कि वे अपने बच्चों की भावनाओं को समझें नकि उन पर अपनी सोच थोपें।’