नेत्र सर्जन की लापरवाही से चली गई मरीज की आँख की रोशनी

लखनऊ: सरकारी अस्पतालों में इलाज और डॉक्टरों की लापरवाही किसी से छिपी नहीं हैं। बलरामपुर अस्पताल के नेत्र रोग विभाग के सर्जन की लापरवाही से एक मरीज की आंख की रोशनी चली गई। अंधता का शिकार हुए मरीज ने डॉक्टर की लिखित शिकायत की है।




मॉडल हाउस निवासी गिरीश चंद्र गुप्ता (52) को धुंधला दिखाई दे रहा था। अगस्त में उन्होंने बलरामपुर अस्पताल के नेत्र रोग विभाग में कक्ष संख्या-121 में दिखाया था। जहां दोनों आंखों में मोतियाबिंद की पुष्टि हुई। डॉ. महेंद्र प्रताप ने 18 अगस्त को ऑपरेशन किया। बाई आंख के हुए ऑपरेशन में डॉक्टर ने अगले दिन पट्टी खोलने को कहा। मगर 19 अगस्त को पट्टी खोलने पर गिरीश की आंखों में सूजन व लालिमा छा गई। डॉक्टर ने कुछ दवा देकर गिरीश को घर भेज दिया।

गिरीश के मुताबिक कई दिनों तक घर पर दवा खाई। मगर राहत नहीं मिली। ऐसे में फिर डॉक्टर को ओपीडी में दिखाया। जांच में आंख में लेंस नहीं होने की पुष्टि की गई। डॉक्टर यह मानने को तैयार नहीं हुए। लिहाजा पांच अक्टूबर को फिर जांच हुई। फिर आंख में लेंस न होने की पुष्टि की गई।

गिरीश का आरोप है कि डॉक्टर जल्द सूजन ठीक होने पर रोशनी वापस आने का हवाला देकर बरगलाते रहे। ऐसे में वह समयगत अन्य वैकल्पिक उपचार पर भी विचार नहीं कर सका। लिहाजा ऑपरेटेड आंख से दिखना बिल्कुल बंद हो गया। गिरीश ने मामले की शिकायत मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री, मुख्य चिकित्सा अधिकारी व अस्पताल के निदेशक से की है। गिरीश के मुताबिक सोमवार को बयान के लिए अधिकारियों ने बुलाया था, मगर बाहर बैठा दिया बात तक नहीं की।




रुपये लेने के आरोप झूठे हैं। मरीज के आंख के पर्दे में खराबी थी। मैं तो ऑपरेशन के लिए तैयार ही नहीं था। मरीज ने काफी सोर्स लगवाया था, मैंने ऑपरेशन कर दिया। मैंने फिर चेकअप के लिए बुलाया मगर वह आया ही नहीं।