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सेना प्रमुख बिपिन रावत बोले, FATF की चेतावनी के बाद दबाव में आतंक पर नकेल कसेगा पाक

By बलराम सिंह 
Updated Date

Army Chief Bipin Rawat Said Pakistan Will Tighten On Terror Under Pressure After Fatf Warning

नई दिल्ली। थल सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने शनिवार को कहा कि वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (एफएटीएफ) की कड़ी चेतावनी के बाद पाकिस्तान पर दबाव और बढ़ेगा। इसके बाद वह आतंकवादी गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए मजबूर होगा।

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बता दें कि एफएटीएफ ने शुक्रवार (18 अक्टूबर) को पाकिस्तान को फरवरी 2020 तक अपनी ‘ग्रे सूची’ में बरकरार रखा है। इसके साथ एफएटीएफ ने सख्त लहजे में कहा कि फरवरी तक आतंक के खिलाफ पर्याप्त कदम न उठाने पर पाकिस्तान को कड़े प्रतिबंधों का सामना करना पड़ेगा। धन शोधन और आतंकवाद को धन मुहैया कराए जाने के खिलाफ पर्याप्त कार्रवाई करने में नाकाम रहने पर पाक के खिलाफ यह कदम उठाया गया।

वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (एफएटीएफ) की पेरिस में पांच दिवसीय पूर्ण बैठक संपन्न होने के बाद यह फैसला लिया गया। इसमें इस बात का जिक्र किया गया कि पाकिस्तान को लश्कर ए तैयबा और जैश ए मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों पर नकेल कसने के लिये दी गई 27 सूत्रीय कार्ययोजना में सिर्फ पांच पर ही काम करने में सक्षम रहा। उल्लेखनीय है भारत में सिलसिलेवार हमलों के लिये ये दोनों आतंकी संगठन जिम्मेदार रहे हैं।

15 महीने की समय सीमा समाप्त होने के बावजूद पाकिस्तान ने 27 सूत्री कार्य योजना पर खराब प्रदर्शन किया। अधिकारियों ने कहा कि पाकिस्तान को उसकी ‘ग्रे सूची’ में कायम रखते हुए एफएटीएफ ने धन शोधन और आतंकवाद को मुहैया कराये जा रहे धन को रोकने में नाकाम रहने को लेकर इस्लामाबाद को कार्रवाई की चेतावनी दी। एफएटीएफ पाकिस्तान की स्थिति के बारे में अगले साल फरवरी में अंतिम फैसला लेगा।

एफएटीएफ ने पाकिस्तान पर अपना फैसला सार्वजनिक करते हुए वैश्विक वित्तीय संस्थानों को नोटिस दिया है कि वे फरवरी 2020 में किसी आकस्मिक स्थिति के लिये खुद को तैयार रखें। उल्लेखनीय है कि यदि पाकिस्तान को ‘ग्रे सूची’ में कायम रखा जाता है या ‘डार्क ग्रे’ सूची में डाला जाता है, तो उसकी वित्तीय हालत कहीं अधिक जर्जर हो जाएगी। ऐसी स्थिति में इस देश को अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ), विश्व बैंक और यूरोपीय संघ से वित्तीय मदद मिलनी बहुत मुश्किल हो जाएगी।

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1989 में हुआ था एफएटीएफ का गठन

एफएटीएफ एक अंतर-सरकारी संस्था है। धन शोधन, आतंकवाद को धन मुहैया कराये जाने और अन्य संबद्ध खतरों का मुकाबला करने के लिये 1989 में इसकी स्थापना की गई थी। पेरिस के इस निगरानी संगठन ने पिछले साल जून में पाक को ग्रे सूची में रखा था और उसे एक कार्य योजना सौंपते हुए उसे अक्टूबर 2019 तक पूरा करने, या ईरान और उत्तर कोरिया के साथ ‘काली सूची में डाले जाने के जोखिम का सामना करने को कहा गया था।

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