72वां सेना दिवस: सीडीएस बिपिन रावत ने ली परेड की सलामी, पीएम बोले-हमें आप पर गर्व

army day
सेना दिवस: सीडीएस बिपिन रावत के साथ युद्ध स्मारक पहुंचे तीनों सेना प्रमुख, शहीदों को दी श्रद्धांजलि

नई दिल्ली। नई दिल्ली। भारत आज 72वां सेना दिवस मना रहा है। इस मौके पर सीडीएस बिपिन रावत के साथ तीनों सेना के प्रमुख राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पहुंचकर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान वहां पर कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। वहीं, 72वें सेना दिवस के मौके पर दिल्ली में भव्य परेड का आयोजन किया गया है। इसकी सलामी पहली बार चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत ने लिया है।

Army Day Cds Bipin Rawat Along With Three Army Chiefs Reached The War Memorial Paid Tribute To The Martyrs :

इस अवसर पर शौर्य और बहादुरी का प्रदर्शन करने वाले जवानों को मेडल से नवाजा गया। थलसेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने परेड का निरीक्षण भी किया। सेना दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि, भारत की सेना मां भारती की आन-बान और शान है।

सेना दिवस के अवसर पर मैं देश के सभी सैनिकों के अदम्य साहस, शौर्य और पराक्रम को सलाम करता हूं। बता दें कि, वर्ष 1949 में आज के दिन ही भारत के अंतिम ब्रिटिश कमांडर इन चीफ जनरल फ्रांसिस बुचर के स्थान पर तत्कालीन लेफ्टिनेंट जनरल के एम करियप्पा भारतीय सेना के कमांडर इन चीफ बने थे।

करियप्पा बाद में फील्ड मार्शल भी बने। केएम करियप्पा पहले ऐसे अधिकारी थे, जिन्हें 28 अप्रैल 1986 को ​फील्ड मार्शल की उपाधि दी गयी थी। 1947 के दौरान इन्होंने भारत-पाक युद्ध में भारतीय सेना का नेतृत्व किया था। दूसरे विश्व युद्ध में बर्मा में जापानियों को शिकस्त देने के लिए उन्हें ऑर्डर ऑफ द ब्रिटिश एंपायर का प्रतिष्ठित तमगा दिया गया था।

करिअप्पा साल 1953 में रिटायर हुए थे और 1993 में 94 साल की आयु में उनका निधन हुआ था। गौरतलब है कि भारतीय सेना का गठन 1776 में ईस्ट इंडिया कंपनी ने कोलकाता में किया गया था। भारतीय थल सेना की शुरुआत ईस्ट इंडिया कंपनी की सैन्य टुकड़ी के रुप में हुई थी। बाद में यह ब्रिटिश भारतीय सेना बनी और फिर भारतीय थल सेना के नाम दिया गया।

नई दिल्ली। नई दिल्ली। भारत आज 72वां सेना दिवस मना रहा है। इस मौके पर सीडीएस बिपिन रावत के साथ तीनों सेना के प्रमुख राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पहुंचकर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान वहां पर कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। वहीं, 72वें सेना दिवस के मौके पर दिल्ली में भव्य परेड का आयोजन किया गया है। इसकी सलामी पहली बार चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत ने लिया है। इस अवसर पर शौर्य और बहादुरी का प्रदर्शन करने वाले जवानों को मेडल से नवाजा गया। थलसेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने परेड का निरीक्षण भी किया। सेना दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि, भारत की सेना मां भारती की आन-बान और शान है। सेना दिवस के अवसर पर मैं देश के सभी सैनिकों के अदम्य साहस, शौर्य और पराक्रम को सलाम करता हूं। बता दें कि, वर्ष 1949 में आज के दिन ही भारत के अंतिम ब्रिटिश कमांडर इन चीफ जनरल फ्रांसिस बुचर के स्थान पर तत्कालीन लेफ्टिनेंट जनरल के एम करियप्पा भारतीय सेना के कमांडर इन चीफ बने थे। करियप्पा बाद में फील्ड मार्शल भी बने। केएम करियप्पा पहले ऐसे अधिकारी थे, जिन्हें 28 अप्रैल 1986 को ​फील्ड मार्शल की उपाधि दी गयी थी। 1947 के दौरान इन्होंने भारत-पाक युद्ध में भारतीय सेना का नेतृत्व किया था। दूसरे विश्व युद्ध में बर्मा में जापानियों को शिकस्त देने के लिए उन्हें ऑर्डर ऑफ द ब्रिटिश एंपायर का प्रतिष्ठित तमगा दिया गया था। करिअप्पा साल 1953 में रिटायर हुए थे और 1993 में 94 साल की आयु में उनका निधन हुआ था। गौरतलब है कि भारतीय सेना का गठन 1776 में ईस्ट इंडिया कंपनी ने कोलकाता में किया गया था। भारतीय थल सेना की शुरुआत ईस्ट इंडिया कंपनी की सैन्य टुकड़ी के रुप में हुई थी। बाद में यह ब्रिटिश भारतीय सेना बनी और फिर भारतीय थल सेना के नाम दिया गया।