गैंगरेप के आरोपी सपा विधायक के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी

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गैंगरेप के आरोपी सपा विधायक के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी

बिजनौर। सुप्रीम कोर्ट द्वारा दागी विधायकों व सांसदों की संलिप्तता वाले मामलों को शीघ्र निपटारे को लेकर केंद्र सरकार को फटकार लगाने के बाद हाइकोर्ट की विशेष अदालत ने दलित महिला से दुष्कर्म के मुख्य आरोपी समाजवादी पार्टी के पूर्व मंत्री व नागीना से मौजूदा विधायक मनोज पारस के स्टे को खारिज करते हुए आरोपी मनोज पारस के खिलाफ गैर जमानती व फरारी वारंट जारी किए है। कोर्ट की इस कार्रवाई से सपा विधायक मनोज पारस की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। फिलहाल इस खबर से एक बार फिर सियासी गलियारों में हड़कंप मच गया है।

Arrest Of Spa Mla Paras Nath :

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के बाद 20 सितम्बर 2018 को इलाहाबाद हाइकोर्ट के न्यायमूर्ति सौमित्रा दयाल सिंह ने कोर्ट में लंबित पड़े दलित महिला के गैंगरेप के मामले विनोद कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य व 4 अन्य धारा 482 सीआरपीसी के मुकदमें को निपटाते हुए स्टे खारिज कर दिया।

जिसके बाद मंगलवार को फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट के जज पवन कुमार तिवारी ने इस बहुचर्चित गैंगरेप मामले में जनपद बिजनौर के नगीना से सपा विधायक मनोज पारस के गैर जमानती व फरारी वारंट जारी करते हुए पुलिस को मनोज परास सहित सभी आरोपियों को 14 मार्च 2019 तक गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश करने के आदेश किए है। कोर्ट की इस कार्रवाई से जहां दलित महिला को अब इंसाफ की आस जगी है वहीं मामले में फरारी वारंट जारी होने की भनक लगते ही विधायक मनोज पारस शहर छोड़कर फरार होने की फिराक में लग गया है।

बताते चले कि 8 दिसम्बर 2006 में नगीना से सपा विधायक मनोज पारस ने अपने गांव बिंजहेड़ी की ही दलित महिला को राशन की दुकान का कोटा दिलाने के बहाने अपने तीन अन्य साथी जयपाल, अस्सु व कुंवर सैनी के साथ मिलकर महिला के साथ गैंगरेप किया था। विधायक के रसूख के चलते नगीना पुलिस ने यह बहुचर्चित गैंगरेप का मुकदमा नहीं लिखा था।

पीड़िता की गुहार के बाद कोर्ट के आदेश पर नगीना पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया था। मामला मीडिया की सुर्खियां बनने के बाद 2014 में विधायक मनोज पारस को मंत्री पद से भी हाथ धोना पड़ा था। गैंगरेप के इस बहुचर्चित मामले में गैर जमानती व फरारी वारंट जारी किए जाने से लोकसभा चुनाव में अपनी पत्नी नीलम पारस को टिकट दिलाकर जताने का ख्वाब देख रहे विधायक मनोज पारस की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। फिलहाल इस खबर से एक बार फिर सियासी गलियारों में हड़कंप मच गया है।

शहजाद अंसारी की रिपोर्ट

बिजनौर। सुप्रीम कोर्ट द्वारा दागी विधायकों व सांसदों की संलिप्तता वाले मामलों को शीघ्र निपटारे को लेकर केंद्र सरकार को फटकार लगाने के बाद हाइकोर्ट की विशेष अदालत ने दलित महिला से दुष्कर्म के मुख्य आरोपी समाजवादी पार्टी के पूर्व मंत्री व नागीना से मौजूदा विधायक मनोज पारस के स्टे को खारिज करते हुए आरोपी मनोज पारस के खिलाफ गैर जमानती व फरारी वारंट जारी किए है। कोर्ट की इस कार्रवाई से सपा विधायक मनोज पारस की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। फिलहाल इस खबर से एक बार फिर सियासी गलियारों में हड़कंप मच गया है। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के बाद 20 सितम्बर 2018 को इलाहाबाद हाइकोर्ट के न्यायमूर्ति सौमित्रा दयाल सिंह ने कोर्ट में लंबित पड़े दलित महिला के गैंगरेप के मामले विनोद कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य व 4 अन्य धारा 482 सीआरपीसी के मुकदमें को निपटाते हुए स्टे खारिज कर दिया। जिसके बाद मंगलवार को फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट के जज पवन कुमार तिवारी ने इस बहुचर्चित गैंगरेप मामले में जनपद बिजनौर के नगीना से सपा विधायक मनोज पारस के गैर जमानती व फरारी वारंट जारी करते हुए पुलिस को मनोज परास सहित सभी आरोपियों को 14 मार्च 2019 तक गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश करने के आदेश किए है। कोर्ट की इस कार्रवाई से जहां दलित महिला को अब इंसाफ की आस जगी है वहीं मामले में फरारी वारंट जारी होने की भनक लगते ही विधायक मनोज पारस शहर छोड़कर फरार होने की फिराक में लग गया है। बताते चले कि 8 दिसम्बर 2006 में नगीना से सपा विधायक मनोज पारस ने अपने गांव बिंजहेड़ी की ही दलित महिला को राशन की दुकान का कोटा दिलाने के बहाने अपने तीन अन्य साथी जयपाल, अस्सु व कुंवर सैनी के साथ मिलकर महिला के साथ गैंगरेप किया था। विधायक के रसूख के चलते नगीना पुलिस ने यह बहुचर्चित गैंगरेप का मुकदमा नहीं लिखा था। पीड़िता की गुहार के बाद कोर्ट के आदेश पर नगीना पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया था। मामला मीडिया की सुर्खियां बनने के बाद 2014 में विधायक मनोज पारस को मंत्री पद से भी हाथ धोना पड़ा था। गैंगरेप के इस बहुचर्चित मामले में गैर जमानती व फरारी वारंट जारी किए जाने से लोकसभा चुनाव में अपनी पत्नी नीलम पारस को टिकट दिलाकर जताने का ख्वाब देख रहे विधायक मनोज पारस की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। फिलहाल इस खबर से एक बार फिर सियासी गलियारों में हड़कंप मच गया है। शहजाद अंसारी की रिपोर्ट