अनुच्छेद 370 : 25 विदेशी राजनयिकों का दल घाटी पहुंचा, जमीनी हालात का लेंगे जायजा

25 foreign diplomats
अनुच्छेद 370 : 25 विदेशी राजनयिकों का दल घाटी पहुंचा, जमीनी हालात का लेंगे जायजा

नई दिल्ली। जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने और राज्य को दो केन्द्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने के बाद विदेशी राजनयिकों का एक और प्रतिनिधिमंडल जमीनी हालात का जायजा लेने बुधवार को श्रीनगर पहुंचा। इस दल में विभिन्न देशों के 25 राजनयिक शामिल हैं। यह दल बुधवार सुबह 11 बजे श्रीनगर पहुंचा। यहां से दल में शामिल सदस्य बारामुला जाएंगे। वहां से लौटकर यह दल श्रीनगर में सिविल सोसाइटी, कारोबारियों समेत विभिन्न प्रतिनिधिमंडलों से मुलाकात करके पांच अगस्त के बाद की स्थिति की जानकारी करेगा।

Article 370 A Team Of 25 Foreign Diplomats Reached The Valley Will Take Stock Of The Ground Situation :

दल में यूरोपीय यूनियन और खाड़ी देशों के राजनयिक शामिल हैं। बता दें कि भारत में अमेरिका के राजदूत कीनेथ आई जस्टर समेत 15 राजनयिकों के एक दल ने 9-10 जनवरी को जम्मू व श्रीनगर का दो दिवसीय दौरा किया था। इससे पहले दिसंबर में यूरोपीय यूनियन के सांसदों ने भी घाटी का दौरा कर यहां के हालात जाने थे।

गृह राज्यमंत्री जी किशन रेड्डी ने मंगलवार को सदन को बताया कि किसी भी भारतीय नागरिक के जम्मू-कश्मीर जाने पर किसी भी तरह का प्रतिबंध नहीं है। उनसे सवाल पूछा गया था कि सरकार भारतीय प्रतिनिधियों को जम्मू-कश्मीर जाने की मंजूरी कब देगी। इसके जवाब में रेड्डी ने बताया कि ऐसी कोई रोक ही नहीं है। इसी क्रम में उन्होंने बताया कि 15 देशों के प्रमुखों ने 9 से 10 जनवरी के बीच जम्मू-कश्मीर की यात्रा की थी। इन देशों में अर्जेंटीना, बांग्लादेश, फिजी, गुयाना, मालदीव, मोरक्को, नाइजर, नाइजीरिया, नॉर्वे, फिलीपींस, पेरू, दक्षिण कोरिया, टोगो, अमेरिका और वियतनाम शामिल हैं।

एक अन्य सवाल के जवाब में गृह राज्यमंत्री ने लोकसभा में बताया देश में खास तौर पर जम्मू-कश्मीर में किसी प्रकार के डिरेडिकलाइजेशन शिविर के अस्तित्व की सूचना नहीं है। उल्लेखनीय है कि इससे पहले कश्मीर में डिरेडिकलाइजेशन सेंटर के विचार का जम्मू-कश्मीर के पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह ने स्वागत किया था। सिंह ने यह बयान चीफ ऑफ डिफेंस स्टॉफ जनरल बिपिन रावत के सुझाव पर दिया था। सिंह ने कहा था कि जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के कारगर मुकाबला करने के लिए विशेषज्ञों और सिविल सोसाइटी के सदस्यों को हाथ मिलाने की जरूरत है।
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नई दिल्ली। जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने और राज्य को दो केन्द्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने के बाद विदेशी राजनयिकों का एक और प्रतिनिधिमंडल जमीनी हालात का जायजा लेने बुधवार को श्रीनगर पहुंचा। इस दल में विभिन्न देशों के 25 राजनयिक शामिल हैं। यह दल बुधवार सुबह 11 बजे श्रीनगर पहुंचा। यहां से दल में शामिल सदस्य बारामुला जाएंगे। वहां से लौटकर यह दल श्रीनगर में सिविल सोसाइटी, कारोबारियों समेत विभिन्न प्रतिनिधिमंडलों से मुलाकात करके पांच अगस्त के बाद की स्थिति की जानकारी करेगा। दल में यूरोपीय यूनियन और खाड़ी देशों के राजनयिक शामिल हैं। बता दें कि भारत में अमेरिका के राजदूत कीनेथ आई जस्टर समेत 15 राजनयिकों के एक दल ने 9-10 जनवरी को जम्मू व श्रीनगर का दो दिवसीय दौरा किया था। इससे पहले दिसंबर में यूरोपीय यूनियन के सांसदों ने भी घाटी का दौरा कर यहां के हालात जाने थे। गृह राज्यमंत्री जी किशन रेड्डी ने मंगलवार को सदन को बताया कि किसी भी भारतीय नागरिक के जम्मू-कश्मीर जाने पर किसी भी तरह का प्रतिबंध नहीं है। उनसे सवाल पूछा गया था कि सरकार भारतीय प्रतिनिधियों को जम्मू-कश्मीर जाने की मंजूरी कब देगी। इसके जवाब में रेड्डी ने बताया कि ऐसी कोई रोक ही नहीं है। इसी क्रम में उन्होंने बताया कि 15 देशों के प्रमुखों ने 9 से 10 जनवरी के बीच जम्मू-कश्मीर की यात्रा की थी। इन देशों में अर्जेंटीना, बांग्लादेश, फिजी, गुयाना, मालदीव, मोरक्को, नाइजर, नाइजीरिया, नॉर्वे, फिलीपींस, पेरू, दक्षिण कोरिया, टोगो, अमेरिका और वियतनाम शामिल हैं। एक अन्य सवाल के जवाब में गृह राज्यमंत्री ने लोकसभा में बताया देश में खास तौर पर जम्मू-कश्मीर में किसी प्रकार के डिरेडिकलाइजेशन शिविर के अस्तित्व की सूचना नहीं है। उल्लेखनीय है कि इससे पहले कश्मीर में डिरेडिकलाइजेशन सेंटर के विचार का जम्मू-कश्मीर के पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह ने स्वागत किया था। सिंह ने यह बयान चीफ ऑफ डिफेंस स्टॉफ जनरल बिपिन रावत के सुझाव पर दिया था। सिंह ने कहा था कि जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के कारगर मुकाबला करने के लिए विशेषज्ञों और सिविल सोसाइटी के सदस्यों को हाथ मिलाने की जरूरत है। विज्ञापन