जम्मू-कश्मीर से अलग होकर लद्दाख बना केंद्र शासित प्रदेश, जानें यहां की खूबियां

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जम्मू-कश्मीर से अलग होकर लद्दाख बना केंद्र शासित प्रदेश, जानें यहां की खूबियां

नई दिल्ली। केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए जम्मू-कश्मीर से राज्य का दर्जा छीनकर उसे केन्द्र शासित प्रदेश बना दिया है। राष्ट्रपति के आदेश पर यह अनुच्छेद 370 को जम्मू-कश्मीर से हटा दिया गया है। इसी के साथ जम्मू और कश्मीर राज्य को दो हिस्सों में बांट दिया गया है। बता दें कि लद्दाख के लोग पिछले 70 साल से केंद्र शासित प्रदेश के दर्जे की मांग करता रहा है।

Article 370 Revoked History Of Ladakh :

ऐसा है लद्दाख

लद्दाख बेहद खूबसूरत है और हर साल देशभर से हजारों लोग यहां पहुंचते हैं। इसे ठंडा मरूस्थल भी कहते हैं। खासतौर पर मोटरसाइकिलों पर सवार युवा यहां के स्पेशल टूर बनाते हैं। यह उत्तर में कराकोरम पर्वत और दक्षिण में हिमालय पर्वत के बीच स्थित है। लद्दाख के उत्तर में पड़ोसी देश चीन और पूर्व में चीन के कब्जे वाले तिब्बत की सीमाएं मिलती हैं। यह सीमावर्ती इलाका है और इस दृष्टि से इसका सामरिक महत्व भी खास है। लद्दाख समुद्र तल से 9842 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। लद्दाख की राजधानी और प्रमुख शहर लेह है। लेह के उत्तर में कराकोरम दर्रा है।

कारगिल में मुस्लिम और लेह में बौद्ध बहुसंख्यक

साल 2011 की जनगणना के अनुसार लद्दाख की कुल जनसंख्या 2 लाख 74 हजार 289 है। यहां की जनसंख्या मुख्य रूप से लेह और कारगिल जिलों के बीच विभाजित है। 2011 की जनगणना के अनुसार कारगिल की कुल जनसंख्या 1 लाख 40 हजार 802 थी, जबकि लेह जिले में 1 लाख 33 हजार 487 लोग रह रहे थे। कारगिल जिले में 76.87 फीसद आबादी मुस्लिमों की थी, इनमें भी शिया समुदाय के लोग ज्यादा हैं। लेह की बात करें तो यहां के 66.40 फीसद लोग बौद्ध धर्म को मानने वाले हैं।

सिंधु नदी है लद्दाख की जीवन रेखा

यहां कई स्थानों पर सदियों पुराने शिलालेख मिले हैं, जिनसे पता चलता है कि लद्दाख नव-पाषाणकाल में स्थापित हुआ था। सिंधु नदीं यहां की जीवन रेखा है और यहां के ऐतिहासिक और वर्तमान ज्यादातर शहर भले वह लेह हो या शे, बासगो, तिंगमोसगंग सभी सिंधु नदी के किनारे बसे हैं। साल 1947 में देश के आजाद होने के साथ ही पाकिस्तान के कश्मीर पर हमला कर दिया था, पाकिस्तान ने यहां के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया था, जिसके बाद सिंधु का मात्र यही हिस्सा लद्दाख से बहता है। वैसे हिंदू धर्म में एक पूजनीय नदी है, जो केवल लद्दाख में बहती है।

नई दिल्ली। केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए जम्मू-कश्मीर से राज्य का दर्जा छीनकर उसे केन्द्र शासित प्रदेश बना दिया है। राष्ट्रपति के आदेश पर यह अनुच्छेद 370 को जम्मू-कश्मीर से हटा दिया गया है। इसी के साथ जम्मू और कश्मीर राज्य को दो हिस्सों में बांट दिया गया है। बता दें कि लद्दाख के लोग पिछले 70 साल से केंद्र शासित प्रदेश के दर्जे की मांग करता रहा है। ऐसा है लद्दाख लद्दाख बेहद खूबसूरत है और हर साल देशभर से हजारों लोग यहां पहुंचते हैं। इसे ठंडा मरूस्थल भी कहते हैं। खासतौर पर मोटरसाइकिलों पर सवार युवा यहां के स्पेशल टूर बनाते हैं। यह उत्तर में कराकोरम पर्वत और दक्षिण में हिमालय पर्वत के बीच स्थित है। लद्दाख के उत्तर में पड़ोसी देश चीन और पूर्व में चीन के कब्जे वाले तिब्बत की सीमाएं मिलती हैं। यह सीमावर्ती इलाका है और इस दृष्टि से इसका सामरिक महत्व भी खास है। लद्दाख समुद्र तल से 9842 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। लद्दाख की राजधानी और प्रमुख शहर लेह है। लेह के उत्तर में कराकोरम दर्रा है। कारगिल में मुस्लिम और लेह में बौद्ध बहुसंख्यक साल 2011 की जनगणना के अनुसार लद्दाख की कुल जनसंख्या 2 लाख 74 हजार 289 है। यहां की जनसंख्या मुख्य रूप से लेह और कारगिल जिलों के बीच विभाजित है। 2011 की जनगणना के अनुसार कारगिल की कुल जनसंख्या 1 लाख 40 हजार 802 थी, जबकि लेह जिले में 1 लाख 33 हजार 487 लोग रह रहे थे। कारगिल जिले में 76.87 फीसद आबादी मुस्लिमों की थी, इनमें भी शिया समुदाय के लोग ज्यादा हैं। लेह की बात करें तो यहां के 66.40 फीसद लोग बौद्ध धर्म को मानने वाले हैं। सिंधु नदी है लद्दाख की जीवन रेखा यहां कई स्थानों पर सदियों पुराने शिलालेख मिले हैं, जिनसे पता चलता है कि लद्दाख नव-पाषाणकाल में स्थापित हुआ था। सिंधु नदीं यहां की जीवन रेखा है और यहां के ऐतिहासिक और वर्तमान ज्यादातर शहर भले वह लेह हो या शे, बासगो, तिंगमोसगंग सभी सिंधु नदी के किनारे बसे हैं। साल 1947 में देश के आजाद होने के साथ ही पाकिस्तान के कश्मीर पर हमला कर दिया था, पाकिस्तान ने यहां के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया था, जिसके बाद सिंधु का मात्र यही हिस्सा लद्दाख से बहता है। वैसे हिंदू धर्म में एक पूजनीय नदी है, जो केवल लद्दाख में बहती है।