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पिछली सरकारों में बोलती थी अरुण मिश्रा की तूती, अफसरों की मिलीभगत से खड़ा किया था भ्रष्टाचार का साम्राज्य

Arun Mishra Had Created An Empire Of Corruption With The Connivance Of Political And Bureaucracy Used To Speak In The Previous Governments

By शिव मौर्या 
Updated Date

कानपुर। भ्रष्टाचार के आरोपों में गिरफ्तार औद्योगिक​ विकास प्राधिकरण (यूीपीसीडा) के मुख्य अभियंता अ​रुण मिश्रा की पिछली सरकारों में तूती बोलती थी। अरुण मिश्रा की शासन में बैठे बड़े अफसरों से लेकर नेताओं तक पहुंच थी, जिसके कारण कोई भी आवाज नहीं उठा पाता था। सूत्रों की माने तो अरुण के भ्रष्टाचार के साम्राज्य को बचाने के लिए कई बड़े अफसर से लेकर नेताओं तक ने भी पैरवी की।

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1986 में नौकरी शुरू करने वाले अरुण को प्राधिकरण का सुपर एमडी कहा जाता है। कई प्रबंध निदेशकों तक वह अपनी नियुक्ति की सूचनाएं भेजता था। बतौर अस्थायी सहायक अभियंता अरुण मिश्रा को 1989-90 में पहली बार निलंबित किया गया था। 1998 में वह अधिशासी अभियंता और 2003 में वह मुख्य अभियंता बना। वहीं, 2007 अरुण के लिए तब लकी साबित हुआ, जब मुंबई वाले नेताजी से नजदीकियों तत्कालीन यूपीएसआईडीसी में असीमित अधिकार मिल गए थे।

65 बैंक खातों को एसआईटी ने किया था सीज
बता दें कि, अरुण मिश्रा भ्रष्टाचार के जरिए अकूत संपत्ति का मालिक बन गया है। इसी वर्ष एसआईटी ने जांच में गड़बड़ियां पाए जाने के बाद कानपुर में उसके 65 बैंक खाते को सीज किए थे। 2011 में सीबीआई ने उसके 100 बैंक खातों का पता लगाया था। 2011 में सीबीआई ने उसे जेल भेजा, लेकिन 6 महीने में ही जमानत पर बाहर आता गया।

गिरफ्तार होते ही पैरोकारों बचाने में जुट जाते थे
अरुण मिश्रा की सियासी और अफसरशाही के बीच कितनी पैठ है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई बार गिरफ्तार होने के बाद वो छूट गया। इतना ही नहीं आरोप लगने के बाद भी उसे विभाग में लगातार प्रमोशन मिलता रहा। नौकरशाही के बीच उसकी पकड़ का ही नतीजा रहा कि अरबों के घोटाले का आरोप लगने के बाद भी वो अपने रसूख के दम पर विभाग में वापसी करता रहा। यूपीसीडा में अरुण मिश्रा की इतनी धाक थी कि एमडी कोई भी आए, सिक्का अरुण का ही चलता था।

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अरुण मिश्रा की इस बार हुई गिरफ्तारी में जल्दी न छूटे और उसे सजा मिले। इसके लिए शासन स्तर पर भी तैयारी शुरू हो गई है। सूत्रों के मुताबिक शासन और यूपीसीडा से अरुण मिश्रा के कारनामों का काला चिट्ठा निकला जा रहा है।

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फर्जी मार्कशीट का भी आरोप
अरुण मिश्रा की हाईस्कूल की मार्कशीट भी फर्जी बताई गयी थी। 2012—13 में पता चला था कि 11 सितंबर को कॉरपोरेशन के सीनियर मैनेजर (हाउसिंग) ने एमडी को एफिडेविट देकर आरोप लगाया था कि अरुण की हाईस्कूल की मार्कशीट फर्जी है।

 

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