आसाराम ने अपनी दुर्गति के लिए मीडिया ट्रायल को ठहराया जिम्मेदार, उम्रकैद के खिलाफ की अपील

जयपुर। नाबालिग से आश्रम में दुराचार के मामले में उम्रकैद की सजा पाने के बाद आशाराम ने अपनी दुर्गति का जिम्मेदार मीडिया ट्रायल को ठहराया है। फिलहाल सोमवार को आशाराम ने उनकी उम्रकैद की सजा के खिलाफ राजस्थान हाईकोर्ट की स्पेशल बेंच में अपील दायर की है। जिसमें उन्होने आशाराम की उम्रकैद की सजा को खारिज करने की मांग की है।

Asaram Files Appeal Against Life Time Punishment In Rape Case :

आसाराम के वकील निशांत बोरा ने बताया कि उन्होने उस फैसले को चैलेंज किया है, जिसमें आशाराम को मौत तक जेल में रहने की सजा सुनाई गई थी। बता दें कि पाक्सो एक्ट की स्पेशल कोर्ट ने 25 अप्रैल को आसाराम को मौत तक उम्रकैद की सजा सुनाई है। आसाराम पर आरोप था कि उन्होने वर्ष 2013 में जोधपुर के पास मनई गांव में स्थित आश्रम में नाबालिग से बलात्कार जैसे घिनौनी हरकत की थी। कोर्ट ने सुनावाई के दौरान आशाराम का साथ देने वाले दो और लोगों को भी 20-20 साल की जेल और एक-एक लाख रूपये का जुर्माना लगाया था।

आशाराम के वकील की तरफ से दायर इस मामले में कहा गया कि कोर्ट ने सुनवाई के दौरान तमाम पहलुओं को नजरअंदाज किया है और सच्चाई जाने आशाराम को उम्रकैद की सजा सुना दी। वकील ने कहा कि कोर्ट ने मीडिया की तरफ से चलाए गए ट्रायल के आधार पर मामले की सुनवाई की है।

जयपुर। नाबालिग से आश्रम में दुराचार के मामले में उम्रकैद की सजा पाने के बाद आशाराम ने अपनी दुर्गति का जिम्मेदार मीडिया ट्रायल को ठहराया है। फिलहाल सोमवार को आशाराम ने उनकी उम्रकैद की सजा के खिलाफ राजस्थान हाईकोर्ट की स्पेशल बेंच में अपील दायर की है। जिसमें उन्होने आशाराम की उम्रकैद की सजा को खारिज करने की मांग की है। आसाराम के वकील निशांत बोरा ने बताया कि उन्होने उस फैसले को चैलेंज किया है, जिसमें आशाराम को मौत तक जेल में रहने की सजा सुनाई गई थी। बता दें कि पाक्सो एक्ट की स्पेशल कोर्ट ने 25 अप्रैल को आसाराम को मौत तक उम्रकैद की सजा सुनाई है। आसाराम पर आरोप था कि उन्होने वर्ष 2013 में जोधपुर के पास मनई गांव में स्थित आश्रम में नाबालिग से बलात्कार जैसे घिनौनी हरकत की थी। कोर्ट ने सुनावाई के दौरान आशाराम का साथ देने वाले दो और लोगों को भी 20-20 साल की जेल और एक-एक लाख रूपये का जुर्माना लगाया था। आशाराम के वकील की तरफ से दायर इस मामले में कहा गया कि कोर्ट ने सुनवाई के दौरान तमाम पहलुओं को नजरअंदाज किया है और सच्चाई जाने आशाराम को उम्रकैद की सजा सुना दी। वकील ने कहा कि कोर्ट ने मीडिया की तरफ से चलाए गए ट्रायल के आधार पर मामले की सुनवाई की है।