अशोक गहलोत के मंत्री ने कहा- इतिहास से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं

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जयपुर: राजस्थान बोर्ड ऑफ सीनयर सेकेंडरी एजुकेशन की तरफ से लाई गई किताब में हल्दीघाटी लड़ाई को लेकर दो अलग-अलग बातें हैं। एक में यह कहा गया है कि हल्दीघाटी की लड़ाई बेनतीजा रहा जबकि एक अन्य में कहा गया है कि महाराणा प्रताप ये लड़ाई हार गए थे। किताब में प्रकाशित इन तथ्यों में महाराणा प्रताप के बारे में गलत जानकारी और तथ्यों के तोड़ मरोड़ कर पेश किए जाने को लेकर लेकर बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही पार्टियों के राजपूत समुदाय और नेताओं के गुस्से से भड़का दिया है। 10वीं की सामाजिक विज्ञान की किताब- ‘राजस्थान के इतिहास और संस्कृति’ में हल्दीघाटी की लड़ाई के बारे में बताया गया है कि ये लड़ाई राणा प्रताप हार गए थे।

Ashok Gehlots Minister Said Do Not Tolerate Tampering With History :

किताब के पहले अध्याय का शीर्षक है- ‘हिस्ट्री ऑफ राजस्थान: इस युद्ध का परिणाम नहीं निकल सका’। इसमें कहा गया है कि अकबर मेवार को किसी भी कीमत पर अपने नियंत्रण में लेना चाहता था और उसने महाराणा प्रताप से समझौता करने की भी कोशिशें की। लेकिन, महाराणा प्रताप ने इस समझौते को ठुकरा कर मुगलों के खिलाफ लड़ाई लड़ी। इस अध्याय में बताया गया कि कैसे लड़ाई का नाम हल्दीघाटी पड़ा क्योंकि कई नव विवाहिताओं ने इस युद्ध में लड़ाई लड़कर अपनी कुर्बानी दी।

राजस्थान बोर्ड की इस किताब पर बीजेपी सांसद और जयपुर राजघराने की पूर्व वंशज दिया कुमारी ने कहा, “कांग्रेस सरकार के इतिहासकारों ने महाराणा उदय सिंह, महाराणा प्रताप सिंह और हल्दीघाटी का अपमान किया है… इतिहास के साथ छेड़छाड़ सिर्फ कांग्रेस शासन में हुआ है।”

बीजेपी सांसद दीयाकुमारी ने कहा कांग्रेस सरकार के इतिहासकारों ने महाराणा उदय सिंह और महाराणा प्रताप का अपमान किया है। दीयाकुमारी ने महाराणा उदय सिंह जैसे आदर्श पुरुष के व्यक्तित्व से छेड़छाड़ का आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार अपने ही देश के महापुरुषों की छवि धूमिल करने पर आमादा है। इतिहास से छेड़छाड़ करने का कृत्य सिर्फ कांग्रेस शासन में ही होता है. ऐसा करके सरकार युवा पीढ़ी को क्या संदेश देना चाहती हैं।

उन्होंने कहा कि मेवाड़ के महाराणा उदय सिंह को राजस्थान बोर्ड की किताबों में बनवीर का हत्यारा कहकर संबोधित करना अनुचित ह। कांग्रेस को न तो प्रदेश के गौरव की चिंता है और न ही लोगों के भावनाओं की।

दरअसल, राजस्थान शिक्षा बोर्ड की दसवीं की पुस्तक में फेरबदल करते हुए लिखा गया है कि हल्दीघाटी युद्ध में नवविवाहित हल्दी लगी महिलाओं ने पुरुष वेश धारण कर युद्ध लड़ा था। इस पर सांसद दीयाकुमारी ने कहा कि यह ना केवल गलत है बल्कि उन महान योद्धाओं का सार्वजनिक अपमान है. जिन्होंने मातृभूमि की आन,बान और शान के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी।

अशोक गहलोत सरकार में राजपूत मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने ट्विटर पर महाराणा प्रताब के बारे में गलत तथ्यों का विरोध किया है। उन्होंने एक के बाद एक कई ट्वीट में लिखा- इतिहास के साथ कोई भी छेड़छाड़ को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हमारे हीरो का इतिहास हमारे लिए महत्वपूर्ण है और इसकी रक्षा करना हमारा कर्तव्य है।

10वीं की किताब पर सवाल उठने के बाद राजस्थान शिक्षा बोर्ड ने जांच के आदेश दिए हैं। साथ ही ई-बुक को हटाने की बात भी कही है। एक तरफ से जहां किताब राणा प्रताप की बहादुरी की तारीफ की है तो वहीं आरबीएसई को सोशल साइंस की 10वीं किताब में उन्हें असंयम और नियंत्रण न रखने वाला बताया है। खास बात ये है कि सिर्फ ऑनलाइन टेक्स्ट बुक में ये बातें कही गई है जबकि इसके प्रिंट एडिशन में ऐसा नहीं कहा गया है। आरबीएसई की वेबसाइट से ई-बुक को हटा लिया गया है।

जयपुर: राजस्थान बोर्ड ऑफ सीनयर सेकेंडरी एजुकेशन की तरफ से लाई गई किताब में हल्दीघाटी लड़ाई को लेकर दो अलग-अलग बातें हैं। एक में यह कहा गया है कि हल्दीघाटी की लड़ाई बेनतीजा रहा जबकि एक अन्य में कहा गया है कि महाराणा प्रताप ये लड़ाई हार गए थे। किताब में प्रकाशित इन तथ्यों में महाराणा प्रताप के बारे में गलत जानकारी और तथ्यों के तोड़ मरोड़ कर पेश किए जाने को लेकर लेकर बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही पार्टियों के राजपूत समुदाय और नेताओं के गुस्से से भड़का दिया है। 10वीं की सामाजिक विज्ञान की किताब- ‘राजस्थान के इतिहास और संस्कृति’ में हल्दीघाटी की लड़ाई के बारे में बताया गया है कि ये लड़ाई राणा प्रताप हार गए थे। किताब के पहले अध्याय का शीर्षक है- 'हिस्ट्री ऑफ राजस्थान: इस युद्ध का परिणाम नहीं निकल सका'। इसमें कहा गया है कि अकबर मेवार को किसी भी कीमत पर अपने नियंत्रण में लेना चाहता था और उसने महाराणा प्रताप से समझौता करने की भी कोशिशें की। लेकिन, महाराणा प्रताप ने इस समझौते को ठुकरा कर मुगलों के खिलाफ लड़ाई लड़ी। इस अध्याय में बताया गया कि कैसे लड़ाई का नाम हल्दीघाटी पड़ा क्योंकि कई नव विवाहिताओं ने इस युद्ध में लड़ाई लड़कर अपनी कुर्बानी दी। राजस्थान बोर्ड की इस किताब पर बीजेपी सांसद और जयपुर राजघराने की पूर्व वंशज दिया कुमारी ने कहा, "कांग्रेस सरकार के इतिहासकारों ने महाराणा उदय सिंह, महाराणा प्रताप सिंह और हल्दीघाटी का अपमान किया है... इतिहास के साथ छेड़छाड़ सिर्फ कांग्रेस शासन में हुआ है।" बीजेपी सांसद दीयाकुमारी ने कहा कांग्रेस सरकार के इतिहासकारों ने महाराणा उदय सिंह और महाराणा प्रताप का अपमान किया है। दीयाकुमारी ने महाराणा उदय सिंह जैसे आदर्श पुरुष के व्यक्तित्व से छेड़छाड़ का आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार अपने ही देश के महापुरुषों की छवि धूमिल करने पर आमादा है। इतिहास से छेड़छाड़ करने का कृत्य सिर्फ कांग्रेस शासन में ही होता है. ऐसा करके सरकार युवा पीढ़ी को क्या संदेश देना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि मेवाड़ के महाराणा उदय सिंह को राजस्थान बोर्ड की किताबों में बनवीर का हत्यारा कहकर संबोधित करना अनुचित ह। कांग्रेस को न तो प्रदेश के गौरव की चिंता है और न ही लोगों के भावनाओं की। दरअसल, राजस्थान शिक्षा बोर्ड की दसवीं की पुस्तक में फेरबदल करते हुए लिखा गया है कि हल्दीघाटी युद्ध में नवविवाहित हल्दी लगी महिलाओं ने पुरुष वेश धारण कर युद्ध लड़ा था। इस पर सांसद दीयाकुमारी ने कहा कि यह ना केवल गलत है बल्कि उन महान योद्धाओं का सार्वजनिक अपमान है. जिन्होंने मातृभूमि की आन,बान और शान के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी। अशोक गहलोत सरकार में राजपूत मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने ट्विटर पर महाराणा प्रताब के बारे में गलत तथ्यों का विरोध किया है। उन्होंने एक के बाद एक कई ट्वीट में लिखा- इतिहास के साथ कोई भी छेड़छाड़ को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हमारे हीरो का इतिहास हमारे लिए महत्वपूर्ण है और इसकी रक्षा करना हमारा कर्तव्य है। 10वीं की किताब पर सवाल उठने के बाद राजस्थान शिक्षा बोर्ड ने जांच के आदेश दिए हैं। साथ ही ई-बुक को हटाने की बात भी कही है। एक तरफ से जहां किताब राणा प्रताप की बहादुरी की तारीफ की है तो वहीं आरबीएसई को सोशल साइंस की 10वीं किताब में उन्हें असंयम और नियंत्रण न रखने वाला बताया है। खास बात ये है कि सिर्फ ऑनलाइन टेक्स्ट बुक में ये बातें कही गई है जबकि इसके प्रिंट एडिशन में ऐसा नहीं कहा गया है। आरबीएसई की वेबसाइट से ई-बुक को हटा लिया गया है।