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अश्विन मास प्रदोष व्रत 2021: अक्टूबर माह के अंतिम प्रदोष व्रत में करें शिव की पूजा, सुख-समृद्धि व निरोगी काया की होती हैप्राप्ति

प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है। इस दिन भगवान शिव की विशेष् पूजा-अर्चना की जाती है।भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए प्रदोष व्रत उत्तम उपाय है।

By अनूप कुमार 
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अश्विन मास प्रदोष व्रत2021: प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है। इस दिन भगवान शिव की विशेष् पूजा-अर्चना की जाती है।भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए प्रदोष व्रत उत्तम उपाय है। हिंदू पंचाग के अनुसार हर माह की शुक्ल और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। इस बार अश्विन मास की शुक्ल पक्ष के 17 अक्टूबर को प्रदोष व्रत रखा जाएगा। रविवार के दिन प्रदोष व्रत होने के कारण इसे रवि प्रदोष व्रत कहा जाएगा।

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अश्विन मास शुक्ल पक्ष त्रयोदशी तिथि आरंभ- 17 अक्टूबर 2021 दिन रविवार को शाम 05 बजकर 39 मिनट से

अश्विन मास शुक्ल पक्ष त्रयोदशी तिथि समाप्त- 18 अक्टूबर 2021 दिन सोमवार शाम 06 बजकर 07 मिनट पर

पूजन का समय- शाम 05 बजकर 49 मिनट से रात 08 बजकर 20 मिनट तक

रवि प्रदोष का संबंध सीधा सूर्य से होता है। अत: चंद्रमा के साथ सूर्य भी आपके जीवन में सक्रिय रहता है। इससे चंद्र और सूर्य अच्‍छा फल देने लगते हैं। रवि प्रदोष के दिन नियम पूर्वक व्रत रखने से जीवन में सुख, शांति और लंबी आयु प्राप्त होती है। सूर्य ग्रहों का राजा है। रवि प्रदोष रखने से सूर्य संबंधी सभी परेशानियां दूर हो जाती है। यह प्रदोष सूर्य से संबंधित होने के कारण नाम, यश और सम्मान भी दिलाता है। अगर आपकी कुंडली में अपयश के योग हो तो यह प्रदोष करें।

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