महाभारत कालीन ‘लाक्षागृह’ की जल्द शुरू होगी खुदाई, यहां मिले हैं ऐतिहासिक साक्ष्य

नई दिल्ली। महाभारत कालीन ‘लाक्षागृह’ की खुदाई की अनुमति भारतीय पुरातत्व विभाग(एएसआई) ने दे दी है। लाक्षागृह के ऐतिहासिक साक्ष्‍य उत्तर प्रदेश के बागपत के बरनावा क्षेत्र में मिले हैं। इस जगह की खुदाई के लिये कई वर्षों से पुरातत्‍वविद और स्‍थानीय इतिहासकार मांग कर रहे थे। एएसआई के अधिकारियों के मुताबिक दिसंबर के पहले सप्‍ताह में स्‍थल की खुदाई का काम शुरू होगा। खुदाई का काम करीब 3 महीनों तक चलेगा।

महाभारत में ‘लाक्षागृह’ की महत्‍वपूर्ण भूमिका मानी जाती है। कौरवों ने लाख से इसको बनवाया था और इसमें पांडवों को जिंदा जलाने की साजिश रची गई थी, लेकिन सुरंग के माध्‍यम से पांडवों ने निकलकर अपनी जान बचाई थी। बरनावा क्षेत्र का पुराना नाम वर्णाव्रत बताया जाता है। यह भी कहा जाता है कि ये उन पांच गावों में शुमार था, जिनको पांडवों ने कौरवों से मांगा था।

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बरनावा गांव में महाभारतकाल का लाक्षागृह टीला है। यहीं पर एक सुरंग भी है। यहां की सुरंग हिंडनी नदी के किनारे पर खुलती है। टीले के पिलर तो कुछ असामाजिक तत्वों ने तोड़ दिए और उसे वे मजार बताते थे। यहीं पर पांडव किला भी है जिसमें अनेक प्राचीन मूर्तियां देखी जा सकती हैं।

गांव के दक्षिण में लगभग 100 फुट ऊंचा और 30 एकड़ भूमि पर फैला हुआ यह टीला लाक्षागृह का अवशेष है। बताया जाता है कि इस टीले के नीचे 2 सुरंगें स्थित हैं। वर्तमान में टीले के पास की भूमि पर एक गौशाला, श्रीगांधीधाम समिति, वैदिक अनुसंधान समिति तथा महानंद संस्कृत विद्यालय स्थापित हैं।

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