स्विस बैंक नहीं ये एशियाई देश हैं कालेधन का नया ठिकाना

नई दिल्ली। कालेधन (Black Money) को वापस लाने के लिए प्रयासरत भारत सरकार को अब तक ऐसी कोई सफलता नहीं मिल सकी है जिसके दम पर कहा जा सके कि सरकार की कोशिशें सफल हुई हैं। दुनिया के लिए टैक्स हैवन के रूप में पहचान रखने वाले स्विटजरलैंड की जिन बैंकों से भारतीय खाताधारकों की जानकारी लेने के लिए भारत सरकार सालों तक हाथ पांव मारती रही वहां से अब तक मिली जानकारी के मुताबिक वे खाते नाम मात्र के लिए चलाए जा रहे हैं। उन खातों से रकम ट्रांसफर हो चुकी है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक बैंक आॅफ इंटरनेशनल सैटलमेंट (बीआईएस) का दावा है कि भारत से विदेश जाने वाले धन का बड़ा हिस्सा एशिया के टैक्स हैवन्स में ट्रांसफर हुआ है। बीआईएस के दावे के मुताबिक 2007 से 2015 तक के आंकड़ों से सामने आया है कि भारत से विदेश में होने वाले ट्रांजिक्शन्स में करीब 90 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है।

{ यह भी पढ़ें:- रोहिंग्या शणार्थी नहीं अवैध प्रवासी: राजनाथ सिंह }

बीआइएस की ओर से कहा गया है कि भारत कालेधन को पकड़ना चाहता है तो उसे ​यूरोपियन टैक्स हैवन्स से ज्यादा एशिया के ऐसे देशों पर दबाव बनाना चाहिए जहां पिछले 10 सालों में तेजी से कालाधन पहुंचा है।

बीआईएस के दावे के मुताबिक वर्ष 2015 में भारत से विदेश में जमा होने वाले धन में से 53 फीसदी हिस्सा सिंगापुर, मलेशिया, हॉग कॉग और मकाऊ जैसे एशियन टैक्स हैवन्स में जमा हुआ है, जबकि स्विस बैंकों में पहुंचने वाली रकम कुल रकम की 31 फीसदी थी। जिसकी बड़ी बजह स्विस बैंकों में बढ़ती पारदर्शिता के चलते कालाधन रखने वालों के लिए अब यह देश एक नजरिए से सु​रक्षित नहीं रहा है। भारत के साथ भी स्विस सरकार ने खातों की जानकारी साझा करने संबन्धित ट्रनिटी होने और वैश्विक दबाव के चलते ऐसी परिस्थितियां बनीं हैं ​कि खाता धारकों ने एशिया को रुख कर लिया।

{ यह भी पढ़ें:- रोहिंग्या मुसलमानों पर बोली मायावती- इंसानियत के नाते सख्त रुख ना अपनाये सरकार }

बीआईएस की ओर से भारत सरकार को सलाह दी गई है कि कालाधन रखने वालों पर सिकंजा कसने के लिए सरकार को एशियन टैक्स हैवन्स पर दबाव बनाना पड़ेगा। केवल स्विस बैंकों से मिलने वाली जानकारी के आधार पर सरकार अपने उस अनुमानित आंकड़ों तक नहीं पहुंच पाएगी, जिसकी चर्चा समय समय पर होती रही है।