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विधानसभा चुनाव: नतीजों में दिखी मराठों और जाटों की हनक

By बलराम सिंह 
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नई दिल्ली। महाराष्ट्र और हरियाणा के विधानसभा चुनाव के नतीजे आ गए हैं। राजनैतिक दल अब अपने हिसाब से परिणाम के निहितार्थ निकाल रहे हैं। राजनीतिक विष्लेशकों का कहना है कि चुनाव में दोनों राज्यों के सामाजिक तानेबाने का अहम योगदान रहा है। दोनों राज्यों में मराठा और जाट समुदाय ने नतीजों को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है। इसी वजह से महाराष्ट्र में एनसीपी और हरियाणा में कांग्रेस व जेजेपी का प्रदर्शन बेहतर हुआ है।

महाराष्ट्र में लंबे समय से सत्ता की चाभी मराठा समुदाय के पास रही है। हालांकि बीते पांच साल में भाजपा व शिवसेना के शासन में गैर मराठा समुदाय सत्ता पर हावी रहा है। ऐेसे में राज्य सरकार को मराठा आरक्षण आंदोलन का सामना भी करना पड़ा था। दबाव में आरक्षण का फैसला कर सरकार ने इस समुदाय को साधने की कोशिश की, लेकिन कहीं न कहीं भाजपा से उनकी दूरी बढ़ती गई। उधर एनसीपी नेता शरद पवार सबसे बड़े मराठा नेता माने जाते हैं, ऐसे में यह समुदाय उनके और करीब आ गया।

वहीं दूसरी तरफ हरियाणा में जाट आरक्षण आंदोलन के समय से सरकार को जाटों की नाराजगी झेलनी पड़ रही थी। कांग्रेस ने चुनावों के ठीक पहले पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुडा को आगे करके जाट दांव खेला। चौधरी देवीलाल की विरासत को लेकर दुष्यंत चौटाला नई पार्टी के साथ चुनाव मैदान में उतरे थे। ऐसे में जाट समुदाय का समर्थन इन दोनों पार्टियों को मिला और बीजेपी जाटलैण्ड की 32 सीटों महज 8 पर सिमट गई।

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