फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने नागरिकता संशोधन कानून पर रोक लगाने से किया इनकार

CAA
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने नागरिकता संशोधन कानून पर रोक लगाने से किया इनकार

नई दिल्ली। नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में 140 से ज्यादा याचिकाएं दाखिल की गयी थी। बुधवार को इन सभी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सु्प्रीम कोर्ट ने फिलहाल CAA पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। इस तरह से नागरिकता संशोधन एक्ट पर केंद्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने इसकी प्रक्रिया पर तुरंत रोक लगाने से मना कर दिया है और जवाब देने के लिए केन्द्र को चार हफ्ते का वक्त दे दिया है। अगली सुनवाई में इस मसले को संविधान पीठ को देने का फैसला भी किया जा सकता है।

At Present The Supreme Court Refused To Ban The Citizenship Amendment Act :

बुधवार को नागरिकता संशोधन कानून से जुड़े सुप्रीम कोर्ट में 140 से ज्यादा दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाने से इनकार करते हुए कहा कि सिर्फ पांच जजों की संविधान पीठ ही अंतरिम राहत दे सकती है। कोर्ट ने केंद्र सरकार को नई याचिकाओं पर जवाब दाखिल करने के लिए चार हफ्ते दिये हैं। असम और त्रिपुरा के मामलों को सुप्रीम कोर्ट ने अलग किया।

सुप्रीम कोर्ट में 144 याचिकाओं को लेकर CJI एसए बोबडे, जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस एस अब्दुल नज़ीर की बेंच ने सुनवाई की। कपिल सिब्बल ने कहा, पहले ये तय हो कि इसे संविधान पीठ भेजा जाना है या नहीं। वहीं मनु सिंघवी ने कहा, नागरिकता देने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। यूपी में 30 हजार लोग चुने गए हैं। इस पर कपिल सिब्बल बोले, इसी मुद्दे पर जल्द फरवरी में कोई तारीख सुनवाई के लिए तय हो।

इसके बाद CJI ने कहा, फिलहाल हम सरकार को प्रोविजनल नागरिकता देने के लिए कह सकते हैं, हम एकपक्षीय तौर पर रोक नहीं लगा सकते। इस पर याचिकाकर्ता ने कहा, बंगाल और असम विशिष्ट राज्य हैं। असम में बांग्लादेशियों का मुद्दा है। इनमें आधे बांग्लादेश से आने वाले हिंदु हैं और आधे मुस्लिम। असम में 40 लाख बांग्लादेशी हैं। इस कानून के तहत आधे ही लोगों को नागरिकता मिलेगी। इसलिए सरकार को फिलहाल कदम उठाने से रोका जाना चाहिए।

इस पर CJI ने कहा, ये अहम है कि क्या हमें 99 फीसदी याचिकाकर्ताओं को सुनना चाहिए और इसके बाद आदेश जारी करना चाहिए. अगर केंद्र व कुछ की बात सुनकर हम आदेश जारी करते हैं तो बाकी याचिकाकर्ता कहेंगे कि हमारी बात नहीं सुनी गई। हालांकि मनु सिंघवी और कपिल सिब्बल ने कहा दो महीने के लिए प्रक्रिया को पोस्टपोन कर दिया जाए। लेकिन इसका अटार्नी जनरल ने विरोध किया और कहा ये स्टे होगा।

इस पर CJI ने कहा, ये केस संविधान पीठ को जा सकता है। हम रोक के मुद्दे पर बाद में सुनवाई करेंगे। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने असम से संबंधित याचिकाओं पर जवाब देने के लिए दो हफ्ते का वक्त दिया। मनु सिंघवी जो प्रक्रिया 70 सालों में नहीं हुई तो क्या उसे मार्च तक टाला नहीं जा सकता। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा, असम और त्रिपुरा के केस अलग हैं। याचिकाकर्ता इनकी एक लिस्ट दें।

नई दिल्ली। नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में 140 से ज्यादा याचिकाएं दाखिल की गयी थी। बुधवार को इन सभी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सु्प्रीम कोर्ट ने फिलहाल CAA पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। इस तरह से नागरिकता संशोधन एक्ट पर केंद्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने इसकी प्रक्रिया पर तुरंत रोक लगाने से मना कर दिया है और जवाब देने के लिए केन्द्र को चार हफ्ते का वक्त दे दिया है। अगली सुनवाई में इस मसले को संविधान पीठ को देने का फैसला भी किया जा सकता है। बुधवार को नागरिकता संशोधन कानून से जुड़े सुप्रीम कोर्ट में 140 से ज्यादा दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाने से इनकार करते हुए कहा कि सिर्फ पांच जजों की संविधान पीठ ही अंतरिम राहत दे सकती है। कोर्ट ने केंद्र सरकार को नई याचिकाओं पर जवाब दाखिल करने के लिए चार हफ्ते दिये हैं। असम और त्रिपुरा के मामलों को सुप्रीम कोर्ट ने अलग किया। सुप्रीम कोर्ट में 144 याचिकाओं को लेकर CJI एसए बोबडे, जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस एस अब्दुल नज़ीर की बेंच ने सुनवाई की। कपिल सिब्बल ने कहा, पहले ये तय हो कि इसे संविधान पीठ भेजा जाना है या नहीं। वहीं मनु सिंघवी ने कहा, नागरिकता देने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। यूपी में 30 हजार लोग चुने गए हैं। इस पर कपिल सिब्बल बोले, इसी मुद्दे पर जल्द फरवरी में कोई तारीख सुनवाई के लिए तय हो। इसके बाद CJI ने कहा, फिलहाल हम सरकार को प्रोविजनल नागरिकता देने के लिए कह सकते हैं, हम एकपक्षीय तौर पर रोक नहीं लगा सकते। इस पर याचिकाकर्ता ने कहा, बंगाल और असम विशिष्ट राज्य हैं। असम में बांग्लादेशियों का मुद्दा है। इनमें आधे बांग्लादेश से आने वाले हिंदु हैं और आधे मुस्लिम। असम में 40 लाख बांग्लादेशी हैं। इस कानून के तहत आधे ही लोगों को नागरिकता मिलेगी। इसलिए सरकार को फिलहाल कदम उठाने से रोका जाना चाहिए। इस पर CJI ने कहा, ये अहम है कि क्या हमें 99 फीसदी याचिकाकर्ताओं को सुनना चाहिए और इसके बाद आदेश जारी करना चाहिए. अगर केंद्र व कुछ की बात सुनकर हम आदेश जारी करते हैं तो बाकी याचिकाकर्ता कहेंगे कि हमारी बात नहीं सुनी गई। हालांकि मनु सिंघवी और कपिल सिब्बल ने कहा दो महीने के लिए प्रक्रिया को पोस्टपोन कर दिया जाए। लेकिन इसका अटार्नी जनरल ने विरोध किया और कहा ये स्टे होगा। इस पर CJI ने कहा, ये केस संविधान पीठ को जा सकता है। हम रोक के मुद्दे पर बाद में सुनवाई करेंगे। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने असम से संबंधित याचिकाओं पर जवाब देने के लिए दो हफ्ते का वक्त दिया। मनु सिंघवी जो प्रक्रिया 70 सालों में नहीं हुई तो क्या उसे मार्च तक टाला नहीं जा सकता। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा, असम और त्रिपुरा के केस अलग हैं। याचिकाकर्ता इनकी एक लिस्ट दें।