‘अटल’ इरादे के कारण भारत बना था न्यूक्लियर पावर

'अटल' इरादे के कारण भारत बना था न्यूक्लियर पावर
'अटल' इरादे के कारण भारत बना था न्यूक्लियर पावर

नई दिल्ली। अटल बिहारी वाजपेयी देश के कुछ उन चुनिंदा प्रधानमंत्री में से एक हैं, जो अपने साहसिक फैसलों के लिए जाने जाते हैं। 11 मई 1998 का दिन भारत के इतिहास के पन्नों का एक ऐसा दिन है जिसने भारत को एक नई जीत दिलाई थी लेकिन इस जीत और पहल का सारा श्रेय अटल बिहारी वाजपेयी को ही जाता है। दरअसल, 11 मई 1998 को राजस्थान के पोखरण में तीन बमों का सफल परीक्षण किया गया था और इसके साथ ही भारत न्यूक्लियर स्टेट बन गया। यह देश के लिए गर्व का पल था। हालांकि, भारत को परमाणु राष्ट्र बनाना आसान नहीं था।

Atal Bihari Vajpayee Made It Possilbe To Make India A Nuclear Country After Pokhran Nuclear Test :

11 मई 1998 को राजस्थान के पोखरण में तीन बमों के सफल परीक्षण के साथ भारत न्यूक्लियर स्टेट बन गया। ये देश के लिए गर्व का पल था। ऐसे में अगर पूछा जाए कि भारत को परमाणु राष्ट्र बनाने वाला प्रधानमंत्री कौन? जवाब मिलेगा अटल बिहारी वाजपेयी। हालांकि 19 मार्च 1998 को दूसरी बार प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठने के लिए अटल को कई क्षेत्रीय पार्टियों से समझौते करने पड़े थे। इसलिए भारत को परमाणु राष्ट्र बनाना इतना आसान नहीं था।

अमेरिकी सेटेलाइट को ऐसे दिया गया चकमा

वाजपेयी सरकार को इस बात का अंदाजा था कि अमेरिका को इस परमाणु परीक्षण की जरा सी भी भनक लग गई तो विश्‍व के सर्वाधकि शक्तिशाली देश से कई तरह के दबाव भारत पर आ जाएंगे। अमेरिका को भनक न लगने पाए इसके लिए परीण से जुड़े इंजिनियर्स को भी सेना की वर्दी में वहां भेजा गया था। ताकि लगे सेना की सामान्‍य कार्रवाई चल रही है। यहां तक कि इस मिशन से जुड़े वैज्ञानिकों को भी सीधे पोखरण नहीं भेजा गया। पहले वह देश के अन्‍य शहरों में गए और फिर पोखरण पहुंचे। ताकि अमेरिका के जासूसी सेटेलाइट को इस बात का पता न लग सके।

भारतीय सेना की 58वीं इंजिनियर रेजिमेंट को सौंपा गया ये जिम्‍मा

भारतीय सेना की 58वीं इंजिनियर रेजिमेंट को यह महत्‍वपूर्ण जिम्‍मेदारी सौंपी गई। यह रेजिमेंट 1995 से ही इस मिशन में जुटी थी कि कैसे अमेरिकी सेटेलाइट को चकमा दिया जा सके।

बिल क्लिंटन को लिखा पत्र

परीक्षण के तुरंत बाद वाजपेयी ने अमेरिका के तत्‍कालीन राष्‍ट्रपति बिल क्लिंटन को पत्र लिखकर भारत के परमाणु परीक्षण और उसकी अनिवार्यता के बारे में अवगत कराया।

नई दिल्ली। अटल बिहारी वाजपेयी देश के कुछ उन चुनिंदा प्रधानमंत्री में से एक हैं, जो अपने साहसिक फैसलों के लिए जाने जाते हैं। 11 मई 1998 का दिन भारत के इतिहास के पन्नों का एक ऐसा दिन है जिसने भारत को एक नई जीत दिलाई थी लेकिन इस जीत और पहल का सारा श्रेय अटल बिहारी वाजपेयी को ही जाता है। दरअसल, 11 मई 1998 को राजस्थान के पोखरण में तीन बमों का सफल परीक्षण किया गया था और इसके साथ ही भारत न्यूक्लियर स्टेट बन गया। यह देश के लिए गर्व का पल था। हालांकि, भारत को परमाणु राष्ट्र बनाना आसान नहीं था। 11 मई 1998 को राजस्थान के पोखरण में तीन बमों के सफल परीक्षण के साथ भारत न्यूक्लियर स्टेट बन गया। ये देश के लिए गर्व का पल था। ऐसे में अगर पूछा जाए कि भारत को परमाणु राष्ट्र बनाने वाला प्रधानमंत्री कौन? जवाब मिलेगा अटल बिहारी वाजपेयी। हालांकि 19 मार्च 1998 को दूसरी बार प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठने के लिए अटल को कई क्षेत्रीय पार्टियों से समझौते करने पड़े थे। इसलिए भारत को परमाणु राष्ट्र बनाना इतना आसान नहीं था।

अमेरिकी सेटेलाइट को ऐसे दिया गया चकमा

वाजपेयी सरकार को इस बात का अंदाजा था कि अमेरिका को इस परमाणु परीक्षण की जरा सी भी भनक लग गई तो विश्‍व के सर्वाधकि शक्तिशाली देश से कई तरह के दबाव भारत पर आ जाएंगे। अमेरिका को भनक न लगने पाए इसके लिए परीण से जुड़े इंजिनियर्स को भी सेना की वर्दी में वहां भेजा गया था। ताकि लगे सेना की सामान्‍य कार्रवाई चल रही है। यहां तक कि इस मिशन से जुड़े वैज्ञानिकों को भी सीधे पोखरण नहीं भेजा गया। पहले वह देश के अन्‍य शहरों में गए और फिर पोखरण पहुंचे। ताकि अमेरिका के जासूसी सेटेलाइट को इस बात का पता न लग सके।

भारतीय सेना की 58वीं इंजिनियर रेजिमेंट को सौंपा गया ये जिम्‍मा

भारतीय सेना की 58वीं इंजिनियर रेजिमेंट को यह महत्‍वपूर्ण जिम्‍मेदारी सौंपी गई। यह रेजिमेंट 1995 से ही इस मिशन में जुटी थी कि कैसे अमेरिकी सेटेलाइट को चकमा दिया जा सके।

बिल क्लिंटन को लिखा पत्र

परीक्षण के तुरंत बाद वाजपेयी ने अमेरिका के तत्‍कालीन राष्‍ट्रपति बिल क्लिंटन को पत्र लिखकर भारत के परमाणु परीक्षण और उसकी अनिवार्यता के बारे में अवगत कराया।