लोहे के डिब्बे साबित हो रहे एटीएम: शिवपाल

लखनऊ: सपा ने कहा है कि नोटबंदी की वजह से प्रदेशभर के एटीएम लोहे के डिब्बे बनकर रह गए हैं। इनसे जनता को कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। सपा के प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने बुधवार को यहां कहा कि नोटबन्दी के 20 दिन बीत जाने के बाद भी हालात सुधरे नहीं हैं। बैंकों में लम्बी-लम्बी लाइनें अब भी लग रही हैं। प्रदेशभर की एटीएम लोहे के डिब्बे बनकर रह गयी हैं। यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जब नोटबंदी का ऐलान किया था, तब कहा था कि दो दिन बाद एटीएम से भी लोगों को बड़े नोट मिलने लगेंगे। लेकिन 20 दिन बीतने के बाद भी अभी तक हालात भयावह बने हुए हैं। लोहे के डिब्बे यानी एटीएम के बाहर लगी लम्बी लाइनें आज भी देखी जा सकती हैं। इससे लोग बेहद परेशान हैं। जल्दबाजी में लिये गये फैसले के कारण नये नोटों की छपाई उस गति से नहीं हो पा रही है, जितनी आवश्यकता है।




यादव ने कहा कि यदि प्रधानमंत्री ने नोटबंदी का यह फैसला सोच- समझकर लिया होता, तो देश के लोगों को इतने बुरे दिन न देखने पड़ते। उन्होंने कहा कि नयी करेंसी की कमी पूरी होने में करीब छह माह से एक वर्ष तक का समय लगेगा। इस दौरान किसानों, गरीबों, मजदूरों और सभी देशवासियों को मुसीबतों का सामना करना पड़ेगा। इसे देश के लोग भूल नहीं पायेंगे और चुनाव में भाजपा को सबक सिखाएंगे। यादव ने कहा कि केन्द्र सरकार के एक तानाशाहीपूर्ण फैसले ने देश के गरीबों, मजदूरों और असंगठित क्षेत्र से जुड़े कामगारों का जीवन नारकीय बना दिया है, जहां एक ओर मजदूर काम न मिलने से परेशान हैं, वहीं कई घरों में चूल्हा तक नहीं जल पा रहा है।उन्होंने कहा कि किसानों के पास नगदी न होने के कारण उन्हें खाद एवं बीज नहीं मिल पा रहा है। आमतौर पर 20 नवम्बर तक ही रबी फसल की बुआई हो जाती है। लेकिन इस साल खाद और बीज न खरीद पाने के कारण रबी की फसल खेतों में लग ही नहीं पाई है, जिससे पैदावार नहीं होगी।




सपा नेता ने कहा कि जब फसल ही नहीं होगी, तो किसानों को उसका उपज मूल्य भी नहीं मिलेगा और उनके सामने भूखों मरने की सी स्थिति होगी। इसके अलावा आम जनता को भी फसल न होने पर महंगाई का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि कृषि कायरें से जुड़े विशेषज्ञों ने इस वर्ष 50 से 60 प्रतिशत तक फसल कम होने का अनुमान लगाया है। श्री यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री को देश की जनता की फिक्र नहीं है। प्रधानमंत्री ने वास्तव में विदेशी बैंकों में जमा कालाधन के मुद्दे से ध्यान भटकाने के लिए और वाह-वाही लूटने के चक्कर में जल्दबाजी में नोटबंदी लागू तो कर दी। लेकिन इसके सभी पहलुओं पर ध्यान नहीं दिया। इसका दूरगामी परिणाम बड़ा भयावह भी हो सकता है।

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