राजनीति के ‘पलटूराम’ है नीतीश कुमार, उनकी कोई हैसियत नहीं: लालू यादव

पटना। बिहार में सियासी उठापटक के बाद अब राजद और जेडीयू के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। गौरतलब है कि सोमवार को सीएम नीतीश कुमार पुनः सीएम बनने के बाद सोमार को मीडिया से मुखातिब हुए, जिसमे उन्होने अपनी बात रखते हुए गठबंधन तोड़ एनडीए के साथ जाने की वजह बताई थी साथ ही राजद पर कई गंभीर आरोप भी लगाए थे। नीतीश के इन आरोपों पर पलटवार करते हुए आज राजद प्रमुख लालू यदाव ने अपनी बात रखी। लालू ने नीतीश कुमार को राजनीति का पलटूराम बताया है, साथ ही खुद से तुलना किए जाने पर लालू ने कहा कि नीतीश की हैसियत क्या है, उनका कोई जनाधार नहीं है।

संवाददाता सम्मेलन में लालू प्रसाद पूरे रौ में दिखे। लालू ने कहा कि वे नीतीश को बचपन से जानते हैं। उनका कोई जनाधार नहीं है। वे सत्ता के लालची नेता हैं। लालू ने कहा कि हम 1970-71 में वे छात्र संघ का सचिव बने। उस वक्त नीतीश कुमार का कहीं अता-पता नहीं था। हमें 1977 में जयप्रकाश नारायण ने छपरा से टिकट दिया था। उस समय तीन लाख वोट से सभी जाति के लोगों ने मुझे जिताया। उस समय नीतीश छात्र नेता थे और मैं छात्र नेता बना रहा था। जिस शरद यादव ने नीतीश कुमार को आगे बढ़ाया, आज उनकी भी कद्र नहीं की जा रही है। साथ ही अपने स्वार्थ के लिए मेरे बेटों को बलि देने की कोशिश की।

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मैं नहीं चाहता था कि महागठबंधन में इसको आगे किया जाये। लेकिन, मुलायम सिंह के कहने के बाद नीतीश को आगे किया गया। मैंने मुलायम सिंह से ही इस बात की घोषणा करने को कहा था। उस समय मैंने कहा कि था कि देश से दंगाई और फासिस्ट ताकतों को दूर रखने के लिए यदि जहर भी पीना पड़ेगा तो पी लेंगे।

उसके बाद जब नीतीश पटना में हमारे आवास आये तो तेजप्रताप और तेजस्वी ने उनका आदर किया। इस समय नीतीश ने कहा कि हमलोग बूढ़े हो चुके हैं। बस एक टर्म दे दीजिए। इन लड़कों को आगे बढ़ायेंगे। लेकिन, जब तेजस्वी और तेजप्रताप आगे बढ़ने लगे तो सत्ता के लालची नीतीश ने मेरे दोनों बेटों की बलि लेने की कोशिश की। नीतीश को आगे बढ़ाने में जितना मेरा हाथ है, वह हर कोई जानता है। लेकिन, सामंतों के बीच में रहने वाले नीतीश ने तमाम पिछड़ों और अतिपिछड़ों की उम्मीदों का गला घोंट दिया। अब तो जदयू समाप्‍त हो चुका है। नीतीश कुमार अब भगवा पहनकर जय श्रीराम-जय श्रीराम करते रहें।

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लालू ने कहा कि नीतीश कहते हैं कि मैंने लालू यादव को वोट ट्रांसफर कराया। सब जानते हैं नीतीश कुमार की हैसियत क्या थी। शुरूआती दौर में नीतीश जब दो बार चुनाव हार गये तो मेरे पास गिड़गिड़ाते हुए आए थे। दुलारचंद यादव को समझाने के लिए कहा।

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