अखिलेश और मुलायम के बीच आयीं शर्तें, इसलिए नहीं बनी बात





नई दिल्ली। समाजवादी पार्टी के भीतर चल रहे अंदरूनी घमासान के बीच मंलगवार को शुरू हुई बीच का रास्ता निकालने की कोशिशों को एकबार फिर धक्का लगा है। पार्टी के कुछ शीर्ष नेताओं ने नेता जी मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव के बीच सुलह करवाने के लिए बैठक करवाई थी। करीब एक घंटे तक चली पिता पुत्र के बीच की बैठक अंत वैसा नहीं रहा जैसी उम्मीद की जा रही थी।




मिली जानकारी के मुताबिक समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहते हुए संरक्षक बनाए गए मुलायम सिंह यादव ने अपने करीबी आजम खां के कहने पर मंलगवार को अखिलेश यादव से मुलाकात की। 5 विक्रमादित्य मार्ग पर चली बैठक में सुलह के लिए जिस तरह की शर्तें दोनों पक्षों की ओर से रखी गईं वे दोनों ही पक्षों को नगवार गुजरीं।




सूत्रों की माने तो अखिलेश यादव का कहना था कि वे अपने चाचा शिवपाल को यूपी की राजनीति में हस्तक्षेप नहीं करने देगें। ​जिसके लिए उन्हें दिल्ली की राजनीति में भेज दिया जाना चाहिए। इस बात शिवपाल यादव का पक्ष जाने बिना मुलायम सिंह यादव ने किसी प्रकार की हामी भरने से इंकार कर दिया। हालांकि अखिलेश यादव से बैठक के बाद शिवपाल यादव ने भी नेता जी के आवास पर जा कर मुलाकात की लेकिन ये स्पष्ट नहीं हो सका कि दोनों के बीच किस बात को लेकर चर्चा हुई।

इसके बाद अखिलेश यादव की दूसरी शर्त थी कि अमर सिंह को पार्टी से निकाला जाए। जिसके लिए मुलामय सिंह यादव ने अपनी शर्त लगाते हुए अखिलेश यादव के सामने एक शर्त रख दी। जिसके तहत वह अमर सिंह को तभी पार्टी से निकालने को तैयार होंगे जब अखिलेश यादव अपने करीबी राम गोपाल यादव को भी पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाएंगे।




मंगलवार को सामने आई सुलह की ​कोशिश को समाजवादी पार्टी के सिंबल को बचाने के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी में एक ओर जहां बड़ा समर्थन अखिलेश यादव के साथ है, वहीं दूसरी ओर कानूनी रूप से समाजवादी पार्टी पर नेता जी का दावा ज्यादा मजबूत दिखाई पड़ रहा है। इन परिस्थितियों पार्टी के चुनाव चि​ह्न पर पिता पुत्र की दावेदारी का मामला निर्वाचन आयोग के सामने पहुंच चुका है। ऐसा माना जा रहा है कि अगर मामला ​निर्वाचन आयोग में हल होता है तो पार्टी को यूपी का आगामी विधानसभा चुनाव बिना सिंबल के ही लड़ना पड़ेगा। जिससे पार्टी को बड़े स्तर पर नुकसान उठाना पड़ सकता है।