मोदी सरकार ने कोर्ट में कहा- बिल्लियों की तरह लड़ रहे थे CBI के दोनों बड़े अधिकारी

मोदी सरकार ने कोर्ट में कहा- बिल्लियों की तरह लड़ रहे थे CBI के दोनों बड़े अधिकारी
मोदी सरकार ने कोर्ट में कहा- बिल्लियों की तरह लड़ रहे थे CBI के दोनों बड़े अधिकारी

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने बुधवार को सर्वोच्च न्यायालय से कहा कि उसने शीर्ष सीबीआई(CBI) अधिकारियों डायरेक्टर ( निदेशक) आलोक वर्मा और स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना के बीच इसलिए दखल दिया कि वे बिल्लियों की तरह लड़ रहे थे। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति के एम जोसफ की पीठ के समक्ष केन्द्र की ओर से अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने अपनी बहस जारी रखते हुए कहा कि इन अधिकारियों के झगड़े से जांच एजेन्सी की छवि और प्रतिष्ठा प्रभावित हो रही थी।

Attorney General Kk Venugopal To Supreme Court Alok Verma And Rakesh Asthana Was Fighting Like Cats :

महाधिवक्ता के. के. वेणुगोपाल ने मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायाधीश संजय किशन कौल और न्यायाधीश के. एम. जोसेफ की पीठ से कहा, “सरकार आश्चर्यचकित थी कि दो शीर्ष अधिकारी क्या कर रहे हैं। वे बिल्लियों की तरह लड़ रहे थे। इनके झगड़े की वजह से देश की प्रतिष्ठित जांच एजेन्सी की स्थिति बेहद हास्यास्पद हो गई थी। सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा से शक्तियां छीनने के फैसले का बचाव करते हुए वेणुगोपाल ने कहा, “सरकार ने अपने अधिकार क्षेत्र में काम किया है और अगर सरकार हस्तक्षेप नहीं करती तो भगवान जाने दो वरिष्ठ अधिकारियों की लड़ाई कैसे खत्म होती।

वेणुगोपाल ने कामकाज वापस लेने से पहले सीबीआइ निदेशक का चयन करने वाली समिति से इजाजत न लेने के आलोक वर्मा की ओर से लगाए गए आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि कानून के मुताबिक सीबीआइ निदेशक को ट्रांसफर करने से पहले समिति से मंजूरी लेनी होती है लेकिन इस मामले में आलोक वर्मा का ट्रांसफर नहीं किया गया है। वर्मा अपने उसी घर में रह रहे हैं वही कार और वेतन भत्ते आदि पा रहे हैं। यहां तक कि अगर पूछा जाए कि सीबीआइ निदेशक कौन है तो जवाब होगा आलोक वर्मा और सीबीआइ विशेष निदेशक कौन है तो जवाब होगा राकेश अस्थाना।

वेणुगोपाल ने कहा कि वर्मा का ट्रांसफर नहीं हुआ है इसलिए समिति से पूर्व मंजूरी लेने की जरूरत नहीं थी। जस्टिस केएम जोसेफ ने सवाल किया कि सीवीसी कानून के तहत सीवीसी को भ्रष्टाचार के मामलों में सीबीआइ की निगरानी अधिकार है लेकिन क्या सरकार को सीबीआइ निदेशक से भ्रष्टाचार के मामलों की जांच वापस लेने का कानूनी अधिकार है। वेणुगोपाल ने कहा कि सीवीसी के अलावा सरकार को भी सीबीआइ पर अधिकार है और सरकार ने पूरे मामले को देखते हुए आदेश जारी किया था उसे किसी मामले की जांच से मतलब नहीं था।

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने बुधवार को सर्वोच्च न्यायालय से कहा कि उसने शीर्ष सीबीआई(CBI) अधिकारियों डायरेक्टर ( निदेशक) आलोक वर्मा और स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना के बीच इसलिए दखल दिया कि वे बिल्लियों की तरह लड़ रहे थे। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति के एम जोसफ की पीठ के समक्ष केन्द्र की ओर से अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने अपनी बहस जारी रखते हुए कहा कि इन अधिकारियों के झगड़े से जांच एजेन्सी की छवि और प्रतिष्ठा प्रभावित हो रही थी।महाधिवक्ता के. के. वेणुगोपाल ने मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायाधीश संजय किशन कौल और न्यायाधीश के. एम. जोसेफ की पीठ से कहा, "सरकार आश्चर्यचकित थी कि दो शीर्ष अधिकारी क्या कर रहे हैं। वे बिल्लियों की तरह लड़ रहे थे। इनके झगड़े की वजह से देश की प्रतिष्ठित जांच एजेन्सी की स्थिति बेहद हास्यास्पद हो गई थी। सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा से शक्तियां छीनने के फैसले का बचाव करते हुए वेणुगोपाल ने कहा, "सरकार ने अपने अधिकार क्षेत्र में काम किया है और अगर सरकार हस्तक्षेप नहीं करती तो भगवान जाने दो वरिष्ठ अधिकारियों की लड़ाई कैसे खत्म होती।वेणुगोपाल ने कामकाज वापस लेने से पहले सीबीआइ निदेशक का चयन करने वाली समिति से इजाजत न लेने के आलोक वर्मा की ओर से लगाए गए आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि कानून के मुताबिक सीबीआइ निदेशक को ट्रांसफर करने से पहले समिति से मंजूरी लेनी होती है लेकिन इस मामले में आलोक वर्मा का ट्रांसफर नहीं किया गया है। वर्मा अपने उसी घर में रह रहे हैं वही कार और वेतन भत्ते आदि पा रहे हैं। यहां तक कि अगर पूछा जाए कि सीबीआइ निदेशक कौन है तो जवाब होगा आलोक वर्मा और सीबीआइ विशेष निदेशक कौन है तो जवाब होगा राकेश अस्थाना।वेणुगोपाल ने कहा कि वर्मा का ट्रांसफर नहीं हुआ है इसलिए समिति से पूर्व मंजूरी लेने की जरूरत नहीं थी। जस्टिस केएम जोसेफ ने सवाल किया कि सीवीसी कानून के तहत सीवीसी को भ्रष्टाचार के मामलों में सीबीआइ की निगरानी अधिकार है लेकिन क्या सरकार को सीबीआइ निदेशक से भ्रष्टाचार के मामलों की जांच वापस लेने का कानूनी अधिकार है। वेणुगोपाल ने कहा कि सीवीसी के अलावा सरकार को भी सीबीआइ पर अधिकार है और सरकार ने पूरे मामले को देखते हुए आदेश जारी किया था उसे किसी मामले की जांच से मतलब नहीं था।