बिलखते मासूम को गोद में बैठा ऑटो चलाते बाप का दर्द सुन भर आएंगी आंखे

मुंबई। आम जीवन में छोटी-छोटी परेशानियां देख हम घबरा जाते है, हमे लगता है कि दुखों का पहाड़ हमारे ऊपर ही टूट पड़ा है लेकिन दुनिया में ऐसे भी लोग है जिसके ऊपर वाकई में दुखों का पहाड़ टूटा पड़ा है पर वे अपनी सहनशक्ति और मेहनत के बल पर इस परिस्थिति से निकलने की जद्दोजहद में लगे हुए है। कुछ ऐसे ही ही हालात हैं अभी के समय में इस ऑटो ड्राईवर की, जो मुंबई जैसे शहर में अपनी पत्नी को नया जीवन देने खातिर अपने कलेजे के टुकड़े के साथ दर-दर की ठोकरें खा रहा है। हालात का मारा मोहम्मद सईद करीब एक पखवारे से अपने ढाई साल के बेटे के साथ दिन-रात मुंबई की सड़कों पर ऑटो चला रहे हैं और उनकी तीन महीने की बेटी की देखभाल उनके पड़ोसी कर रहे हैं। ऑटो चलाने के दौरान सईद की गोद में बैठे उनके रोते हुए बेटे को देख हर किसी का कलेजा पसीज जा रहा है।



बता दें कि सईद की पत्नी यास्मीन को स्ट्रोक के कारण लकवा मार गया है। जिसके बाद से बच्चों की देखभाल के साथ-साथ बीवी को बचाने की ज़िम्मेदारी सईद के कंधों पर आ गयी है। सईद की एक तीन महीने की बेटी है जिसकी देखभाल अभी के समय में पड़ोसी कर रहे है वहीं सईद अपने ढाई साल के बेटे के साथ मुंबई की सड़कों पर दिनों-रात ऑटो चला रहा है। सईद की मजबूरी का आलम यह है कि न तो वह अपने बच्चे को छोड़ सकता है और न ही अपनी ऑटो को। क्योकि सईद जो ऑटो चलता है उसके बदले में हर शाम उसे मालिक को 400 रुपए देने पड़ते है। अब जब पत्नी की हालत नाजुक है ऐसे समय में इलाज़ के लिए पैसों की जरूरत भी आ पड़ी है। अगर सईद ऑटो चलना बंद करता है तो आमदानी का एक मात्र रास्ता भी बंद हो जाएगा।




26 वर्षीय सईद ने बताया कि उनके और यास्मीन के परिवार के लोगों ने भी मुंबई आकर यास्मीन और बच्चों की देखभाल करने में असमर्थता जता दी है। सईद यूपी के गोरखपुर के रहने वाले हैं और यास्मीन के परिजन बेंगलुरु में रहते हैं। उन्होंने कहा, ‘मेरी पत्नी को शरीर के बायें हिस्से में लकवा मार गया है। उसे तीन सप्ताह पहले स्ट्रोक आया और मैं उसे तुरंत कूपर अस्पताल ले गया था। अभी उसका MRI टेस्ट होना है और मैं उसके इलाज के लिए पैसे जुटा रहा हूं।’



काम की तलाश में दस साल पहले मुंबई आए सईद को हर रोज ऑटोरिक्शा का 400 रुपये किराया देना होता है। अब उन्हें अपनी पत्नी को देखने और दवा देने के लिए हर दो घंटे पर घर जाना होता है। साथ ही अपनी छोटी बच्ची का पर भी ध्यान देना होता है। सईद कहते हैं, ‘मैं अपनी पत्नी के इलाज के लिए लगभग 24 घंटे काम करता हूं। इस दौरान मैं केवल कुछ देर के लिए ही सो पाता हूं।’




बेटे मुजम्मिल को अपने साथ रखने के सवाल पर सईद कहते हैं कि यह उसकी सुरक्षा के लिए है। उन्होंने कहा, ‘अगर वह खुद कहीं बाहर गया तो किसी दुर्घटना का शिकार हो सकता है। उसको देखने वाला कोई नहीं है। मेरे साथ रहने पर मैं उसके खाने-पीने का ध्यान रखता हूं।’ सईद ने बताया कि वह रोजाना करीब 400-600 के बीच कमा लेते हैं। हालांकि गोद में एक बच्चे को बैठे देख कुछ यात्री डरते भी हैं और दूसरे ऑटो में चढ़ जाते हैं। कई बार मैं उन्हें स्थिति बताने की कोशिश करता हूं, लेकिन वह नहीं मानते हैं। सईद ने कहा, ‘कोई बात नहीं। इसके लिए मैं उन्हें दोष नहीं दे सकता हूं।’ एक दिन तो उन्हें एक ट्रैफिक हवलदार ने बेटे को अपने पास बैठाने के कारण 450 रुपये का जुर्माना भी लगा दिया था।