आगरा: आवास विकास परिषद के अधिकारियों ने मिलीभगत से सरकार को लगाया करोड़ों के राजस्व का चूना

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आगरा: आवास विकास परिषद के अधिकारियों ने मिलीभगत से सरकार को लगाया करोड़ों के राजस्व का चूना

आगरा। उत्तर प्रदेश के आगरा शहर में आवास विकास परिषद की धांधली का नया मामला सामने आया है। यहां आवास विकास परिषद ने एक जमीन के आवंटन में मनमानी करते हुए सीधे तौर पर सरकार को करोड़ो के राजस्व का चूना लगाया है। हालांकि इससे पहले इस जमीन का विवाद कोर्ट के माध्यम से सुलझाया जाना था लेकिन विभाग ने आउट ऑफ कोर्ट सेटलमेंट कर जमीन का बैनामा तीसरी पार्टी को कर दिया, जिससे साफ तौर पर सरकारी राजस्व की चोरी की गयी। विभागीय अधिकारियों ने नियमों की अनदेखी करते हुए पूरे पैसे का आपस में बंदरबांट कर पूरी रकम खुद हड़प ली।

दरअसल, आगरा शहर में परिषद की सिकंदरा योजना के सेक्टर-9 में ग्राम मौज़ा सिकन्दरा बाहिस्ताबाद की खसरा संख्या- 1148, 1149, 1150, 1151 व 1153 जिसका क्षेत्रफल 1867000 वर्गमीटर भूमि में विवादित 8000 वर्गमीटर भूमि को आउट ऑफ कोर्ट सेटलमेंट के लिए वर्तमान दर पर आवंटित करने हेतु धनपाल सिंह पुत्र चुन्नी लाल ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गयी थी। जिसमें 3000 वर्गमीटर भूमि को आउट ऑफ कोर्ट सेटलमेंट के आधार पर धनपाल सिंह को वर्तमान दर पर आवंटित किए जाने का निर्णय लिया गया था। हालांकि विभाग ने धनपाल को जमीन का बैनामा करने के बजाय पूरे दो साल बाद फोरवाल्स प्रमोटर्स प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर हर्ष शिवहरे के नाम लिख दिया।

Awas Evam Vikas Parishad Agra Ne Kiya Caroron Ka Froud :

पूरे मामले में नियमों को रखा गया दरकिनार 

आरोप है कि आगरा के उपायुक्त डॉ अनिल कुमार उपायुक्त ने अन्य अधिकारियों और धनपाल की मिलीभगत से सरकार नियमों की अनदेखी करते हुए जमीन का बैनामा फोरवाल्स प्रमोटर्स प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर के नाम कर दिया, जिसके सरकार को करोड़ों के राजस्व का चुना लगा। जमीन की रजिस्ट्री 18 मार्च 2019 को की गयी, जबकि इस विवादित जमीन का सेटलमेंट आवास विकास परिषद ने 22-08-2016 कर लिया गया था। पूरे दो साल बाद इस जमीन की रजिस्ट्री विभाग द्वारा की गयी, जिसमें कहीं भी धनपाल सिंह का नाम नजर नहीं आया।

आगरा। उत्तर प्रदेश के आगरा शहर में आवास विकास परिषद की धांधली का नया मामला सामने आया है। यहां आवास विकास परिषद ने एक जमीन के आवंटन में मनमानी करते हुए सीधे तौर पर सरकार को करोड़ो के राजस्व का चूना लगाया है। हालांकि इससे पहले इस जमीन का विवाद कोर्ट के माध्यम से सुलझाया जाना था लेकिन विभाग ने आउट ऑफ कोर्ट सेटलमेंट कर जमीन का बैनामा तीसरी पार्टी को कर दिया, जिससे साफ तौर पर सरकारी राजस्व की चोरी की गयी। विभागीय अधिकारियों ने नियमों की अनदेखी करते हुए पूरे पैसे का आपस में बंदरबांट कर पूरी रकम खुद हड़प ली।  दरअसल, आगरा शहर में परिषद की सिकंदरा योजना के सेक्टर-9 में ग्राम मौज़ा सिकन्दरा बाहिस्ताबाद की खसरा संख्या- 1148, 1149, 1150, 1151 व 1153 जिसका क्षेत्रफल 1867000 वर्गमीटर भूमि में विवादित 8000 वर्गमीटर भूमि को आउट ऑफ कोर्ट सेटलमेंट के लिए वर्तमान दर पर आवंटित करने हेतु धनपाल सिंह पुत्र चुन्नी लाल ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गयी थी। जिसमें 3000 वर्गमीटर भूमि को आउट ऑफ कोर्ट सेटलमेंट के आधार पर धनपाल सिंह को वर्तमान दर पर आवंटित किए जाने का निर्णय लिया गया था। हालांकि विभाग ने धनपाल को जमीन का बैनामा करने के बजाय पूरे दो साल बाद फोरवाल्स प्रमोटर्स प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर हर्ष शिवहरे के नाम लिख दिया।

पूरे मामले में नियमों को रखा गया दरकिनार 

आरोप है कि आगरा के उपायुक्त डॉ अनिल कुमार उपायुक्त ने अन्य अधिकारियों और धनपाल की मिलीभगत से सरकार नियमों की अनदेखी करते हुए जमीन का बैनामा फोरवाल्स प्रमोटर्स प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर के नाम कर दिया, जिसके सरकार को करोड़ों के राजस्व का चुना लगा। जमीन की रजिस्ट्री 18 मार्च 2019 को की गयी, जबकि इस विवादित जमीन का सेटलमेंट आवास विकास परिषद ने 22-08-2016 कर लिया गया था। पूरे दो साल बाद इस जमीन की रजिस्ट्री विभाग द्वारा की गयी, जिसमें कहीं भी धनपाल सिंह का नाम नजर नहीं आया।