फारूक अब्दुल्ला बोले – राम सबके भगवान, मंदिर बना तो ईंट लगाने खुद जाऊंगा

farukha abdulla
फारूक अब्दुल्ला बोले - राम सबके भगवान, मंदिर बना तो ईंट लगाने खुद जाऊंगा

नई दिल्ली। राम मंदिर मामले पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा नई तारीख मिलने पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं। इसमें सबसे ज्यादा चौंकाने वाला बयान नैशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला की तरफ से आया है। उन्होंने कहा कि इस मसले को बातचीत से सुलझा लेना चाहिए था, कोर्ट तक जाना ही नहीं चाहिए था।

Ayodhya Issue Farooq Abdullah Says I Will Also Make A Stone If Ram Temple Is Built :

फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि ‘इस मुद्दे (अयोध्या मु्ददे) पर चर्चा होनी चाहिए, और इसे बातचीत की मेज़ पर बैठकर लोगों द्वारा हल किया जाना चाहिए। इसे कोर्ट में क्यों घसीटा जाना चाहिए? मुझे भरोसा है कि इसे बातचीत से हल किया जा सकता है। भगवान राम सारी दुनिया के हैं, सिर्फ हिन्दुओं के नहीं।” आगे उन्होंने कहा कि “भगवान राम से किसी को बैर नहीं है, न होना चाहिए। कोशिश करनी चाहिए सुलझाने की और बनाने की। जिस दिन यह हो जाएगा, मैं भी एक पत्थर लगाने जाऊंगा। जल्दी समाधान होना चाहिए।”

बाद में अखिल भारत हिन्दू महासभा ने एक अर्जी दायर कर सुनवाई की तारीख पहले करने का अनुरोध किया था परंतु न्यायालय ने ऐसा करने से इंकार कर दिया था। न्यायालय ने कहा था कि 29 अक्टूबर को ही इस मामले की सुनवाई के बारे में आदेश पारित किया जा चुका है। हिन्दू महासभा इस मामले में मूल वादकारियों में से एक एम सिद्दीक के वारिसों द्वारा दायर अपील में एक प्रतिवादी है।

इससे पहले, 27 सितंबर, 2018 को तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने 2:1 के बहुमत से 1994 के एक फैसले में की गई टिप्पणी पांच न्यायाधीशों की पीठ के पास नए सिरे से विचार के लिए भेजने से इंकार कर दिया था। इस फैसले में टिप्पणी की गई थी कि मस्जिद इस्लाम का अभिन्न अंग नहीं है।

नई दिल्ली। राम मंदिर मामले पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा नई तारीख मिलने पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं। इसमें सबसे ज्यादा चौंकाने वाला बयान नैशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला की तरफ से आया है। उन्होंने कहा कि इस मसले को बातचीत से सुलझा लेना चाहिए था, कोर्ट तक जाना ही नहीं चाहिए था। फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि 'इस मुद्दे (अयोध्या मु्ददे) पर चर्चा होनी चाहिए, और इसे बातचीत की मेज़ पर बैठकर लोगों द्वारा हल किया जाना चाहिए। इसे कोर्ट में क्यों घसीटा जाना चाहिए? मुझे भरोसा है कि इसे बातचीत से हल किया जा सकता है। भगवान राम सारी दुनिया के हैं, सिर्फ हिन्दुओं के नहीं।" आगे उन्होंने कहा कि "भगवान राम से किसी को बैर नहीं है, न होना चाहिए। कोशिश करनी चाहिए सुलझाने की और बनाने की। जिस दिन यह हो जाएगा, मैं भी एक पत्थर लगाने जाऊंगा। जल्दी समाधान होना चाहिए।" बाद में अखिल भारत हिन्दू महासभा ने एक अर्जी दायर कर सुनवाई की तारीख पहले करने का अनुरोध किया था परंतु न्यायालय ने ऐसा करने से इंकार कर दिया था। न्यायालय ने कहा था कि 29 अक्टूबर को ही इस मामले की सुनवाई के बारे में आदेश पारित किया जा चुका है। हिन्दू महासभा इस मामले में मूल वादकारियों में से एक एम सिद्दीक के वारिसों द्वारा दायर अपील में एक प्रतिवादी है। इससे पहले, 27 सितंबर, 2018 को तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने 2:1 के बहुमत से 1994 के एक फैसले में की गई टिप्पणी पांच न्यायाधीशों की पीठ के पास नए सिरे से विचार के लिए भेजने से इंकार कर दिया था। इस फैसले में टिप्पणी की गई थी कि मस्जिद इस्लाम का अभिन्न अंग नहीं है।