अयोध्या: करीब पांच सदी बाद चांदी के सिंघासन पर विराजे श्रीरामलला

shri ram lala
अयोध्या: करीब पांच सदी बाद चांदी के सिंघासन पर विराजे श्रीरामलला

अयोध्या। चैत्र नवरात्रि के पहले दिन अयोध्या में श्री रामलला को तीनों भाइयों और भक्त हनुमान के साथ अस्थाई मंदिर में स्थापित किया गया। इससे पहले मुख्य पुजारी सत्येंद्र दास ने भगवान श्री रामलला से नए स्थान पर विराजने की प्रार्थना की और सालों से चली आ रही रस्म को पूरा करते हुए नए मंदिर का वास्तु पूजन किया। रात 2 बजे से तड़के 3 बजे तक टेंट में स्थित गर्भगृह में श्रीरामलला की अंतिम बार आरती, भोग और श्रृंगार किया गया। बता दें कि करीब पांच सदी बादश्रीरामलला चांदी के सिंहासन पर विराजमान हुए। साल 1528 के बाद पहली बार यह मौका आया है। 492 साल बाद श्रीरामलला को अस्थाई ही सही पर अपना मंदिर मिला है।

Ayodhya Sriramalala Seized On Silver Throne After Nearly Five Centuries :

श्रीरामलला को उनके भाइयों श्री भरत जी, श्री लक्ष्मण जी और श्री शत्रुघ्न जी और भक्त शिरोमणि हनुमानजी समेत अलग-अलग पालकियों में बिठाकर ले जाया गया। प्रस्थान से लेकर प्रतिस्थापित होने के दौरान वैदिक मंत्रोचार होता रहा। रामजन्मभूमि परिसर में हुए अनुष्ठान में सीएम योगी के साथ प्रधान पुजारी सत्येंद्र दास व ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपालदास के उत्तराधिकारी कमल नयन दास, श्रीराम जन्मभूमि तीथ क्षेत्रट्रस्ट के महामंत्री चंपतराय भी मौजूद रहे। श्रीरामलला को सीएम योगी आदित्यनाथ ने, श्री भरत को राजा अयोध्या बिमलेंद्र मिश्र ने, श्री लक्ष्मण को डॉ अनिल मिश्र ने, श्री शत्रुघ्न को दिनेन्द्रदास तथा शालिग्राम भगवान को महंत सुरेश दास ने वैकल्पिक गर्भगृह में पहुंचाया।

इस दौरान पहले श्रीराम लला का श्रृंगार हुआ। उसके बाद अभिषेक और आरती हुई। यह कार्यक्रम सुबह 7 बजे तक चला। इसके बाद श्रीरामलला के दर्शन श्रद्धालुओं के लिए खोले गए। इस दौरान प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विशेष आरती की। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की ओर से नए मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच रामलला को “छप्पन भोग प्रसाद” अर्पित किया गया। केशव मौर्य ने इसके साथ ही राष्ट्र समाज पर आए संकट से मुक्ति और कल्याण की प्रार्थना की है। उन्होंने कहा कि भगवान देश पर कोरोना वायरस के रूप में आई महामारी से मुक्ति देकर सभी का कल्याण करें।

पुजारी सत्येंद्र दास ने बताया कि विक्रम संवत 2077 की शुरूआत व चैत्र नवरात्रि के प्रतिपदा से श्रीरामलला के विराजमान होने से देश में सुख-समृद्धि और शांति आएगी। इस बीच, ट्रस्ट के सदस्य विमलेंद्र मोहन मिश्र ने कहा कि राम मंदिर के निर्माण के लिए भूमि-पूजन की तिथि तय करने के लिए 4 अप्रैल को अयोध्या में प्रस्तावित बैठक के आयोजन पर संशय है। भूमि पूजन के लिए ट्रस्ट के पास कई शुभ मूहूर्त की तिथियां हैं, जिनमें एक तिथि 30 अप्रैल भी है। लेकिन, कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकना हमारा पहला कर्तव्य है।

अयोध्या में विराजमान रामलला के अकाउंट में 2.81 करोड़ रुपए नकद और 8.75 करोड़ रुपए की एफडी जमा है। इसके अलावा 230 ग्राम सोना, 5019 ग्राम चांदी व 1531 ग्राम अन्य धातुएं हैं। उनका नया अस्थाई मंदिर कुटी की तरह तैयार किया गया है, जिसे जर्मन पाइन लकड़ी व कांच से बनाया गया है। इसका प्लेटफार्म संगमरमर से तैयार किया गया है।

अयोध्या। चैत्र नवरात्रि के पहले दिन अयोध्या में श्री रामलला को तीनों भाइयों और भक्त हनुमान के साथ अस्थाई मंदिर में स्थापित किया गया। इससे पहले मुख्य पुजारी सत्येंद्र दास ने भगवान श्री रामलला से नए स्थान पर विराजने की प्रार्थना की और सालों से चली आ रही रस्म को पूरा करते हुए नए मंदिर का वास्तु पूजन किया। रात 2 बजे से तड़के 3 बजे तक टेंट में स्थित गर्भगृह में श्रीरामलला की अंतिम बार आरती, भोग और श्रृंगार किया गया। बता दें कि करीब पांच सदी बादश्रीरामलला चांदी के सिंहासन पर विराजमान हुए। साल 1528 के बाद पहली बार यह मौका आया है। 492 साल बाद श्रीरामलला को अस्थाई ही सही पर अपना मंदिर मिला है। श्रीरामलला को उनके भाइयों श्री भरत जी, श्री लक्ष्मण जी और श्री शत्रुघ्न जी और भक्त शिरोमणि हनुमानजी समेत अलग-अलग पालकियों में बिठाकर ले जाया गया। प्रस्थान से लेकर प्रतिस्थापित होने के दौरान वैदिक मंत्रोचार होता रहा। रामजन्मभूमि परिसर में हुए अनुष्ठान में सीएम योगी के साथ प्रधान पुजारी सत्येंद्र दास व ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपालदास के उत्तराधिकारी कमल नयन दास, श्रीराम जन्मभूमि तीथ क्षेत्रट्रस्ट के महामंत्री चंपतराय भी मौजूद रहे। श्रीरामलला को सीएम योगी आदित्यनाथ ने, श्री भरत को राजा अयोध्या बिमलेंद्र मिश्र ने, श्री लक्ष्मण को डॉ अनिल मिश्र ने, श्री शत्रुघ्न को दिनेन्द्रदास तथा शालिग्राम भगवान को महंत सुरेश दास ने वैकल्पिक गर्भगृह में पहुंचाया। इस दौरान पहले श्रीराम लला का श्रृंगार हुआ। उसके बाद अभिषेक और आरती हुई। यह कार्यक्रम सुबह 7 बजे तक चला। इसके बाद श्रीरामलला के दर्शन श्रद्धालुओं के लिए खोले गए। इस दौरान प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विशेष आरती की। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की ओर से नए मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच रामलला को "छप्पन भोग प्रसाद" अर्पित किया गया। केशव मौर्य ने इसके साथ ही राष्ट्र समाज पर आए संकट से मुक्ति और कल्याण की प्रार्थना की है। उन्होंने कहा कि भगवान देश पर कोरोना वायरस के रूप में आई महामारी से मुक्ति देकर सभी का कल्याण करें। पुजारी सत्येंद्र दास ने बताया कि विक्रम संवत 2077 की शुरूआत व चैत्र नवरात्रि के प्रतिपदा से श्रीरामलला के विराजमान होने से देश में सुख-समृद्धि और शांति आएगी। इस बीच, ट्रस्ट के सदस्य विमलेंद्र मोहन मिश्र ने कहा कि राम मंदिर के निर्माण के लिए भूमि-पूजन की तिथि तय करने के लिए 4 अप्रैल को अयोध्या में प्रस्तावित बैठक के आयोजन पर संशय है। भूमि पूजन के लिए ट्रस्ट के पास कई शुभ मूहूर्त की तिथियां हैं, जिनमें एक तिथि 30 अप्रैल भी है। लेकिन, कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकना हमारा पहला कर्तव्य है। अयोध्या में विराजमान रामलला के अकाउंट में 2.81 करोड़ रुपए नकद और 8.75 करोड़ रुपए की एफडी जमा है। इसके अलावा 230 ग्राम सोना, 5019 ग्राम चांदी व 1531 ग्राम अन्य धातुएं हैं। उनका नया अस्थाई मंदिर कुटी की तरह तैयार किया गया है, जिसे जर्मन पाइन लकड़ी व कांच से बनाया गया है। इसका प्लेटफार्म संगमरमर से तैयार किया गया है।