अयोध्या फैसला : सुप्रीम कोर्ट ने रामजन्मभूमि न्यास को दी विवादित जमीन

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अयोध्या फैसला : सुप्रीम कोर्ट ने रामजन्मभूमि न्यास को दी विवादित जमीन

नई दिल्ली। अयोध्या मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट फैसला पढ़ा जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने विवादित जमीन को रामजन्मभूमि न्यास को दे दी है। सबसे पहले चीफ जस्टिस ने शिया वक्फ बोर्ड की याचिका खारिज करने की बात बताई। इसके बाद निर्मोही अखाड़े का भी दावा खारिज कर दिया गया है।

Ayodhya Verdict Supreme Court Gives Disputed Land To Ramjanmabhoomi Trust :

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच जजों की बेंच यह फैसला सुना रही है। सुप्रीम कोर्ट एएसआई की रिपोर्ट के आधार पर यह भी कहा है ​कि मस्जिद खाली जमीन पर नहीं बनाई गई थी। साथ ही कोर्ट ने एएसआई रिपोर्ट के आधार पर अपने फैसले में कहा कि मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाने की भी पुख्ता जानकारी नहीं है।

कोर्ट ने ASI की रिपोर्ट के आधार पर यह भी कहा है कि मस्जिद खाली जमीन पर नहीं बनाई गई थी। साथ ही कोर्ट ने ASI रिपोर्ट के आधार पर अपने फैसले में कहा कि मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाने की भी पुख्ता जानकारी नहीं है। बीते महीने ही सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की पीठ ने इस मामले की सुनवाई पूरी की थी। बरसों से चले आ रहे इस मामले की सुनवाई 40 दिनों में पूरी की गई। तब से ही पूरे देश को कोर्ट के फैसले का इंतजार था।

नई दिल्ली। अयोध्या मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट फैसला पढ़ा जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने विवादित जमीन को रामजन्मभूमि न्यास को दे दी है। सबसे पहले चीफ जस्टिस ने शिया वक्फ बोर्ड की याचिका खारिज करने की बात बताई। इसके बाद निर्मोही अखाड़े का भी दावा खारिज कर दिया गया है। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच जजों की बेंच यह फैसला सुना रही है। सुप्रीम कोर्ट एएसआई की रिपोर्ट के आधार पर यह भी कहा है ​कि मस्जिद खाली जमीन पर नहीं बनाई गई थी। साथ ही कोर्ट ने एएसआई रिपोर्ट के आधार पर अपने फैसले में कहा कि मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाने की भी पुख्ता जानकारी नहीं है। कोर्ट ने ASI की रिपोर्ट के आधार पर यह भी कहा है कि मस्जिद खाली जमीन पर नहीं बनाई गई थी। साथ ही कोर्ट ने ASI रिपोर्ट के आधार पर अपने फैसले में कहा कि मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाने की भी पुख्ता जानकारी नहीं है। बीते महीने ही सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की पीठ ने इस मामले की सुनवाई पूरी की थी। बरसों से चले आ रहे इस मामले की सुनवाई 40 दिनों में पूरी की गई। तब से ही पूरे देश को कोर्ट के फैसले का इंतजार था।