श्रीराम मंदिर निर्माण आंदोलन के इतिहास से जुड़ा है गोरखधाम, सीएम योगी भी थे मुखर वक्ता

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गोरखनाथ मठ की तीन पीढ़ियां श्रीराम मंदिर आंदोलन से जुड़ी रहीं, सीएम योगी भी थे मुखर वक्ता

लखनऊ। सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या विवाद को लेकर अपना फैसला सुना दिया है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उत्तर प्रदेश समेत देश भर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम हैं। उत्तर प्रदेश में अमन चैन बनाए रखने की जिम्मेदारी सीएम योगी आदित्यनाथ के कंधो पर है, जो एक समय श्रीराम मंदिर निर्माण को लेकर मुखर रहते थे। ऐसा नहीं है कि गोरखनाथ मठ से जुड़े केवल योगी आदित्यनाथ ही श्रीराम जन्मभूमि निर्माण को लेकर आगे दिखे हों।

Ayodhya Verdict :

इससे पहले भी गोरखनाथ मठ की तीन पीढ़ियां श्रीराम मंदिर आंदोलन से जुड़ी रही है। यह महंत दिग्विजय नाथ से शुरू होती है। बताया जाता है कि गोरक्ष अवेद्यनाथ से पहले गोरक्षनाथ मठ के महंत दिग्विजय नाथ उन चंद लोगों में थे, जिन्होंने शुरुआती तौर पर बाबरी ढांचा को मंदिर में बदलने की कल्पना की थी। महंत दिग्विजय नाथ की अगुवाई में 22 दिसम्बर 1949 को विवादित ढांचे के भीतर रामलला प्रकट हुए थे।

उस समय हिंदू महासभा के विनायक दामोदर सावरकर के साथ दिग्विजय नाथ ही थे, जिनके हाथ में इस आंदोलन की कमान थी। हिंदू महासभा के सदस्यों ने तब अयोध्या में इस काम को अंजाम दिया था। ये दोनों लोग अखिल भारतीय रामायण महासभा के सदस्य भी थे। सीएम योगी आदित्यनाथ के गुरु महंत अवेद्यनाथ और अवेद्यनाथ के गुरु महंत दिग्विजय नाथ का इस आंदोलन में खास योगदान रहा है।

दिग्विजय नाथ के निधन के बाद उनके शिष्य ने आंदोलन को आगे बढ़ाया। वे श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति के आजीवन अध्यक्ष रहे। आदित्यनाथ भी इस आंदोलन को मुखरता प्रदान करते रहे हैं।

लखनऊ। सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या विवाद को लेकर अपना फैसला सुना दिया है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उत्तर प्रदेश समेत देश भर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम हैं। उत्तर प्रदेश में अमन चैन बनाए रखने की जिम्मेदारी सीएम योगी आदित्यनाथ के कंधो पर है, जो एक समय श्रीराम मंदिर निर्माण को लेकर मुखर रहते थे। ऐसा नहीं है कि गोरखनाथ मठ से जुड़े केवल योगी आदित्यनाथ ही श्रीराम जन्मभूमि निर्माण को लेकर आगे दिखे हों। इससे पहले भी गोरखनाथ मठ की तीन पीढ़ियां श्रीराम मंदिर आंदोलन से जुड़ी रही है। यह महंत दिग्विजय नाथ से शुरू होती है। बताया जाता है कि गोरक्ष अवेद्यनाथ से पहले गोरक्षनाथ मठ के महंत दिग्विजय नाथ उन चंद लोगों में थे, जिन्होंने शुरुआती तौर पर बाबरी ढांचा को मंदिर में बदलने की कल्पना की थी। महंत दिग्विजय नाथ की अगुवाई में 22 दिसम्बर 1949 को विवादित ढांचे के भीतर रामलला प्रकट हुए थे। उस समय हिंदू महासभा के विनायक दामोदर सावरकर के साथ दिग्विजय नाथ ही थे, जिनके हाथ में इस आंदोलन की कमान थी। हिंदू महासभा के सदस्यों ने तब अयोध्या में इस काम को अंजाम दिया था। ये दोनों लोग अखिल भारतीय रामायण महासभा के सदस्य भी थे। सीएम योगी आदित्यनाथ के गुरु महंत अवेद्यनाथ और अवेद्यनाथ के गुरु महंत दिग्विजय नाथ का इस आंदोलन में खास योगदान रहा है। दिग्विजय नाथ के निधन के बाद उनके शिष्य ने आंदोलन को आगे बढ़ाया। वे श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति के आजीवन अध्यक्ष रहे। आदित्यनाथ भी इस आंदोलन को मुखरता प्रदान करते रहे हैं।