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आयुर्वेद विशेषज्ञ बोले- अग्निहोत्र से काबू होगा कोरोना वायरस , 10 देशों को दिया सुझाव

Ayurveda Expert Said Agnihotra Will Control Corona Virus Suggested To 10 Countries

By बलराम सिंह 
Updated Date

नई दिल्ली। कोरोना वायरस के प्रकोप से पूरी दुनिया में त्राहि त्राहि मची है। इस जानलेवा संक्रमण की अभी तक कोई दवा नहीं बनी है। हालांकि इस बीच आयुर्वेद विशेषज्ञों का मानना है कि समाधान नहीं मिलने की स्थिति पर आयुर्वेदीय चिकित्सा पद्धति का इस्तेमाल करना चाहिए। पंजाब अरोग्य भारती के संगठन सचिव वैद्य ईश्वर चंदर ने बताया कि वेद के विधानों के अनुसार सृष्टि के आरम्भ से वायु, जल, वातावरण, पर्यावरण, मन की शुद्धि सहित रोगों के निवारण के लिए अग्निहोत्र (यज्ञ) की भूमिका अहम रही है। इससे वातावरण ही नहीं बल्कि हानिकारक बैक्टीरिया व वायरस का भी खात्मा होता है।

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अग्निहोत्र यज्ञ में कई तरह की देशी सामग्री डाली जाती है, जिनमें प्रमुख रूप से गाय के गोबर से बने कंडे, चावल, शुद्ध देशी घी, गिलोय, कपूर सहित अन्य सामग्री होती है। वैद्य डा. ईश्वर के मुताबिक इन सबके जलने से इससे ऑक्सीजन, इथोलिन ऑक्साइड, प्रोपाइलिन ऑक्साइड फार्मेल्डिहाइड, कार्बन डाई आक्साइड सहित नाइट्रोजन के कई कंपाउंड बनते हैं।

यह केमिकल वातावरण को दूषित करने वाले पर्टिकल को सेटल कर इनके अंदर के जीवाणु व विषाणु को खत्म करते हैं। जब यह केमिकल वायु के जरिये शरीर के अंदर प्रवेश करते हैं तो रोग उत्पन्न करने वाले जीवाणु व कीटाणु से लड़ने वाले प्रतिरोधक सेल को अच्छा वातावरण मिलता है और सेल की संख्या को बढ़ाता है।
इंटरनेशनल जर्नल आफ एग्रीकल्चर साइंसेज एंड रिसर्च जर्नल में पुणे के फर्ग्यूसन कॉलेज के गिरीश पराठे व प्रणय अभंग का एक शोध प्रकाशित हुआ है। पेपर के मुताबिक उन्होंने एक कमरे में साधारण आग का इस्तेमाल किया, जबकि दूसरे कमरे में अग्निहोत्र का।

उसके बाद कमरे में मिले बैक्टीरिया को ग्रो करके देखा गया कि जिस कमरे में साधारण आग थी, वहां बैक्टीरिया की संख्या ज्यादा थी, जबकि यज्ञ वाले कमरे में काफी कम। उसके बाद दोनों कमरे के बैक्टीरिया अलग-अलग चूहे में इंजेक्ट किए गए। इसमें पाया गया कि जिन चूहों में साधारण आग वाले कमरे के विषाणु डाले गए थे, उन चूहों में बीमारी बन गई, जबकि यज्ञ अग्नि वाले कमरे के बैक्टीरिया डालने वाले चूहों में कोई बीमारी नहीं मिली।

अग्निहोत्र में इस्तेमाल होने वाली सामग्री
200 ग्राम गिलोय की सूखी लकड़ी, 100 ग्राम गुगल का गोंद, 200 ग्राम चावल (बिना पालिश), 20 ग्राम लौंग, 80 ग्राम अढूसा, 50 ग्राम तुलसी पचांग, 100 ग्राम सतावरी की जड़, 100 ग्राम कलौंजी के बीज, 100 ग्राम मुनक्का और 20 ग्राम काले या सफेद तिल के बीज। (मिक्स करने के बाद इसमें 50 ग्राम सामग्री एक बार हवन के लिए निकाल लें) जलाने के लिए आधा किलो आम की सूखी लकड़ी, 20 ग्राम घी, गोबर का एक उपला और एक टुकड़ कपूर का। अग्निहोत्र को सूर्योदय के ठीक बाद और सूर्योस्त से पहले।

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दस देशों को भेजा सुझाव
वैद्य ईश्वर चंद ने बताया कि उन्होंने अग्निहोत्र का सुझाव विश्व स्वास्थ्य संगठन सहित करीब दस देश को सौंप चुके हैं। अमेरिका के व्हाइट हाउस में भी इसे जमा कर दिया गया है। भारत सरकार व स्वास्थ्य मंत्रालय को भी वे अपना सुझाव भेज चुके हैं। उन्होंने अपने सुझाव बताया है कि जो व्यक्ति कोरोना वायरस से गंभीर है, उनकी दवाएं चलने के साथ अग्निहोत्र का प्रयोग करें। जो पाजिटिव है उन लोगों पर डबल ब्लाइंड स्टडी कर परिणाम एकत्र किए जाएं। जो व्यक्ति लगातार हॉट स्पॉट में जा रहे हैं उन पर अग्निहोत्र कर डबल ब्लाइंड स्टडी करवाई जाए।

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