इलाज के बजाय शौचालय निर्माण में लगा दिये गए आयुर्वेदिक डॉक्टर, दर-दर भटक रहे मरीज

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इलाज के बजाय शौचालय निर्माण में लगा दिये गए आयुर्वेदिक डॉक्टर, दर-दर भटक रहे मरीज

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में शौचालय निर्माण की निगरानी के लिए अब आयुर्वेद विभाग के डॉक्टरों को भी लगा दिया गया है। लखनऊ समेत कई जिलों के डॉक्टरों को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गयी है। आयुर्वेदिक डॉक्टरों की जिम्मेदारी शौचालय निर्माण में लगाने के बाद अब मरीज इलाज के लिए दर-दर भटक रहे हैं। बता दें कि करीब एक महीने से आयुर्वेद के डॉक्टर शौचालय निर्माण की निगरानी में लगाए गए हैं और आयुर्वेदिक अस्पतालों में इलाज की गाड़ी पटरी से उतर गयी है।

Ayurvedik Doctor Shauchalya Nirman :

बताते चलें कि इस बात की जानकारी आयुर्वेद विभाग के अफसरों को भी नहीं है कि डॉक्टरों की ड्यूटी उनके कार्य के अनुरूप लगा दी गयी है। जब इस मामले पर निदेशक डॉ. एसएन सिंह से बात की गयी तो उन्होने कहा कि शौचालय निर्माण की निगरानी में डॉक्टरों की ड्यूटी लगाने की जानकारी नहीं है। मामले को पता किया जाएगा।

वहीं डॉक्टरों का कहना है कि न तो सरकार की अहम योजना ‘आयुष आपके द्वार’ लग पा रही है न ही ओपीडी का संचालन। हालात यह है कि आयुर्वेद दिवस तक ठीक से नहीं मन पाया। डॉक्टरों का कहना है कि पहले 15 दिन के लिए ड्यूटी लगाई गई थी। दो महीने से ज्यादा का वक्त बीत चुका है। इसके बावजूद अफसर डॉक्टरों की परेशानी समझने को तैयार नहीं हैं। इससे डॉक्टरों के साथ मरीजों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

कई अस्पतालों के ताले बंद-

प्रदेश में आयुर्वेद, यूनानी विभाग में करीब 21 सौ से अधिक डिस्पेंसरी का संचालन हो रहा है। इनमें रोजाना हजारों की संख्या में मरीज आ रहे हैं। बाराबंकी, बहराइच, लखनऊ समेत दूसरे जिलों के डॉक्टरों की ड्यूटी शौचालय निर्माण की निगरानी में लगा दी गई है। हालात यह हैं कि जिले के ज्यादातर आयुर्वेद, यूनानी के डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई गई है। एक डॉक्टर के जिम्मे कई-कई ब्लॉक दिए गए हैं। हर सप्ताह निर्माण की समीक्षा बैठक भी हो रही है। इसमें डॉक्टर हो रहे निर्माण की जानकारी देते हैं।

डॉक्टरों का कहना है कि शौचालय निर्माण की निगरानी का जिम्मा ग्राम्य विकास और पंचायती राज विभाग के पास है। इसके बावजूद डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई गई है। इसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। हालात यह है कि कई दिनों से अस्पतालों के ताले तक नहीं खुले हैं। कई अस्पतालों में फार्मासिस्ट इलाज कर रहे हैं।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में शौचालय निर्माण की निगरानी के लिए अब आयुर्वेद विभाग के डॉक्टरों को भी लगा दिया गया है। लखनऊ समेत कई जिलों के डॉक्टरों को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गयी है। आयुर्वेदिक डॉक्टरों की जिम्मेदारी शौचालय निर्माण में लगाने के बाद अब मरीज इलाज के लिए दर-दर भटक रहे हैं। बता दें कि करीब एक महीने से आयुर्वेद के डॉक्टर शौचालय निर्माण की निगरानी में लगाए गए हैं और आयुर्वेदिक अस्पतालों में इलाज की गाड़ी पटरी से उतर गयी है। बताते चलें कि इस बात की जानकारी आयुर्वेद विभाग के अफसरों को भी नहीं है कि डॉक्टरों की ड्यूटी उनके कार्य के अनुरूप लगा दी गयी है। जब इस मामले पर निदेशक डॉ. एसएन सिंह से बात की गयी तो उन्होने कहा कि शौचालय निर्माण की निगरानी में डॉक्टरों की ड्यूटी लगाने की जानकारी नहीं है। मामले को पता किया जाएगा। वहीं डॉक्टरों का कहना है कि न तो सरकार की अहम योजना 'आयुष आपके द्वार' लग पा रही है न ही ओपीडी का संचालन। हालात यह है कि आयुर्वेद दिवस तक ठीक से नहीं मन पाया। डॉक्टरों का कहना है कि पहले 15 दिन के लिए ड्यूटी लगाई गई थी। दो महीने से ज्यादा का वक्त बीत चुका है। इसके बावजूद अफसर डॉक्टरों की परेशानी समझने को तैयार नहीं हैं। इससे डॉक्टरों के साथ मरीजों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

कई अस्पतालों के ताले बंद-

प्रदेश में आयुर्वेद, यूनानी विभाग में करीब 21 सौ से अधिक डिस्पेंसरी का संचालन हो रहा है। इनमें रोजाना हजारों की संख्या में मरीज आ रहे हैं। बाराबंकी, बहराइच, लखनऊ समेत दूसरे जिलों के डॉक्टरों की ड्यूटी शौचालय निर्माण की निगरानी में लगा दी गई है। हालात यह हैं कि जिले के ज्यादातर आयुर्वेद, यूनानी के डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई गई है। एक डॉक्टर के जिम्मे कई-कई ब्लॉक दिए गए हैं। हर सप्ताह निर्माण की समीक्षा बैठक भी हो रही है। इसमें डॉक्टर हो रहे निर्माण की जानकारी देते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि शौचालय निर्माण की निगरानी का जिम्मा ग्राम्य विकास और पंचायती राज विभाग के पास है। इसके बावजूद डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई गई है। इसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। हालात यह है कि कई दिनों से अस्पतालों के ताले तक नहीं खुले हैं। कई अस्पतालों में फार्मासिस्ट इलाज कर रहे हैं।