आजम के सपने में लग रहा किसानों के हक का सरकारी पानी

रामपुर। पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खां के ड्रीम प्रोजेक्ट मोहम्मद अली जौहर यूनीवर्सिटी के बारे में आप जानते ही होंगे। अरबों की सरकारी जमीन और खरबों की लागत से बनकर तैयार हो चुके इस यूनीवर्सिटी ने रामपुर में कितने गरीबों को उजाड़ दिया इसका हिसाब किसी के पास नहीं है। लेकिन अब यह यूनीवर्सिटी आसपास बचे किसानों के हक पर डाका डाल रहा है।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक हजारों एकड़ में फैले मोहम्मद अली जौहर यूनीवर्सिटी के परिसर में सिंचाई विभाग और जल निगम ने नौ नलकूप और पानी की तीन बड़ी टंकियां बना रखीं हैं। सरकारी खजाने से करोड़ों खर्च होने के बाद तैयार हुए इन नलकूपों और पानी की टंकियों से रामपुरवासियों और किसानों को पानी मिलना चाहिए था, लेकिन मजाल है कि इनके पानी की एक बूंद तक किसी आम नागरिक या किसान तक पहुंची हो।

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सबसे बड़ी बात तो यह है कि सरकारी दस्तावेजों में आज भी इन नलकूपों के रख रखाव का जिम्मा प्रदेश सरकार के हाथों में हैं। इनके प्रयोग से आने वाले बिजली के बिल का भुगतान यूपी सरकार ही कर रही है।

कहने के लिए तो मोहम्मद अली जौहर यूनीवर्सिटी एक निजी संस्था है, जिसे आजम खां ने अपने खून पसीने से खड़ा किया है। लेकिन समय समय पर ऐसे मामले सामने आते रहे हैं जिनसे साबित होता है कि आजम के इस सपने को कई जरूरतमंदों का हक मारकर साकार किया गया है। चाहें वे किसान हों या फिर रामपुर की उन बस्तियों के रिहाइशी जिनके मकानों को रातोंरात जमींदोज कर उनकी जमीनें इस यूनीवर्सिटी के नाम पर कब्जा कर लीं गईं। कई घरौंदे तो सिर्फ इसलिए उजाड़ किए गए ताकि इस यूनीवर्सिटी की भव्यता पर वे धब्बे जैसे न दिखें।

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फिलहाल जौहर यूनीवर्सिटी के भीतर सरकारी खर्चे पर चल रहे नलकूपों के मामले की शिकायत सीएम योगी आदित्यनाथ तक पहुंच गई है। सरकार ने भी मामले की जांच करवाने के हामी भरी है। अब देखना होगा कि जांच का परिणाम क्या आता है?

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