नोटबंदी के बाद 50 लाख लोगों की गई नौकरियां, हालात में नहीं हुआ कोई सुधार : रिपोर्ट

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देश में नोटबंदी के बाद 50 लाख लोगों की गई नौकरियां, हालात में नहीं हुआ कोई सुधार : रिपोर्ट

नई दिल्ली। देश में नोटबंदी के बाद 2016 से 2018 के बीच करीब 50 लाख लोगों की नौकरियां चली गयीं। नरेन्द्र मोदी की नेतृत्व वाली सरकार ने 8 नवंबर 2016 को 1000 और 500 के नोट बंद करने का फैसला लिया था। इस घोषणा के बाद से देश में लगातार नौकरियों में कमी होती गयी और लोग बेरोजगार होते गये। अजमी प्रेमजी यूनिवर्सिटी (बेंगलुरू) ने यह रिपोर्ट जारी की है, जिसमें बताया गया है कि 2016 से 2018 के बीच 50 लाख लोगों ने अपनी नौकरी गंवाई है।

Azim Premji University Report Releases 50 Lakhs Men Lost Jobs In 2016 To 2018 :

खासकर असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले 50 लाख लोगों ने नोटबंदी के बाद अपना रोजगार खो दिया है। वहीं यह रिपोर्ट आने के बाद विपक्षी पार्टियों ने केन्द्र की मोदी सरकार पर हमला बोलना शुरू कर दिया है। वह पहले से ही नोटबंदी और रोजगार के मुद्दे पर सरकार को घेरने में जुटी है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि सितंबर 2016 से दिसंबर 2016 के बीच शहरी और ग्रामीण लोगों की लेबर पार्टिशिपेशन फोर्स में अचानक भागीदारी कम हुई। इससे यही अनुमान लगाया जा सकता है कि इस दौरान नौकरियों में कमी आयी। 2017 की दूसरी तिमाही में इसकी दर में थोड़ी कमी आयी लेकिन बाद में नौकरियों की संख्या में कमी होती गयी। हालांकि इसके बाद कोई विशेष सुधार नहीं हुआ।

अगर तीन वर्षों की बात करें तो जनवरी और अप्रैल 2016 से सितंबर—दिसंबर 2018 तक, शहरी पुरूष एलएफपीआर की दर 5.8 फीसदी जबकि उसी आयु समूह में डब्ल्यूपीआर की दर 2.8 तक गिर गई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि भविष्य में नौकरियों में कमी हो सकती है। इसके साथ ही इस रिपोर्ट में कहा गया है कि 20—24 आयु वर्ग में सबसे ज्यादा बेरोजगारी है और नोटबंदी में पुरूषों के मुकाबले महिलाएं ज्यादा प्रभावित हुईं।

इसमें बताया गया है कि वर्ष 2016 और 2018 के बीच देश में काम करने वाले पुरूषों की अबादी में 16.1 मिलियन वृद्धि हुई। हालांकि इसके उलट डब्ल्यूपीआर की मात्रा में पांच मिलियन नौकरियों का नुकसान हुआ है। बता दें कि श्रम बल भागीदारी दर को एलएफपीआर कहा जाता है। वहीं लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण से पहले यह आंकड़ा सामने आने के बाद के​न्द्र की मोदी सरकार विपक्षियों के निशाने पर है।

पहले भी विपक्ष नोटबंदी और रोजगार के मुद्दे पर सरकार को लगातार घेरने की कोशिश करती है। विपक्ष पहले से ही दावा कर रही थी कि नोटबंदी से लाखों लोग बेरोजगार हुए हैंं। हालांकि सरकार इस दावे को झूठा बताती थी।

नई दिल्ली। देश में नोटबंदी के बाद 2016 से 2018 के बीच करीब 50 लाख लोगों की नौकरियां चली गयीं। नरेन्द्र मोदी की नेतृत्व वाली सरकार ने 8 नवंबर 2016 को 1000 और 500 के नोट बंद करने का फैसला लिया था। इस घोषणा के बाद से देश में लगातार नौकरियों में कमी होती गयी और लोग बेरोजगार होते गये। अजमी प्रेमजी यूनिवर्सिटी (बेंगलुरू) ने यह रिपोर्ट जारी की है, जिसमें बताया गया है कि 2016 से 2018 के बीच 50 लाख लोगों ने अपनी नौकरी गंवाई है। खासकर असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले 50 लाख लोगों ने नोटबंदी के बाद अपना रोजगार खो दिया है। वहीं यह रिपोर्ट आने के बाद विपक्षी पार्टियों ने केन्द्र की मोदी सरकार पर हमला बोलना शुरू कर दिया है। वह पहले से ही नोटबंदी और रोजगार के मुद्दे पर सरकार को घेरने में जुटी है। रिपोर्ट में बताया गया है कि सितंबर 2016 से दिसंबर 2016 के बीच शहरी और ग्रामीण लोगों की लेबर पार्टिशिपेशन फोर्स में अचानक भागीदारी कम हुई। इससे यही अनुमान लगाया जा सकता है कि इस दौरान नौकरियों में कमी आयी। 2017 की दूसरी तिमाही में इसकी दर में थोड़ी कमी आयी लेकिन बाद में नौकरियों की संख्या में कमी होती गयी। हालांकि इसके बाद कोई विशेष सुधार नहीं हुआ। अगर तीन वर्षों की बात करें तो जनवरी और अप्रैल 2016 से सितंबर—दिसंबर 2018 तक, शहरी पुरूष एलएफपीआर की दर 5.8 फीसदी जबकि उसी आयु समूह में डब्ल्यूपीआर की दर 2.8 तक गिर गई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि भविष्य में नौकरियों में कमी हो सकती है। इसके साथ ही इस रिपोर्ट में कहा गया है कि 20—24 आयु वर्ग में सबसे ज्यादा बेरोजगारी है और नोटबंदी में पुरूषों के मुकाबले महिलाएं ज्यादा प्रभावित हुईं। इसमें बताया गया है कि वर्ष 2016 और 2018 के बीच देश में काम करने वाले पुरूषों की अबादी में 16.1 मिलियन वृद्धि हुई। हालांकि इसके उलट डब्ल्यूपीआर की मात्रा में पांच मिलियन नौकरियों का नुकसान हुआ है। बता दें कि श्रम बल भागीदारी दर को एलएफपीआर कहा जाता है। वहीं लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण से पहले यह आंकड़ा सामने आने के बाद के​न्द्र की मोदी सरकार विपक्षियों के निशाने पर है। पहले भी विपक्ष नोटबंदी और रोजगार के मुद्दे पर सरकार को लगातार घेरने की कोशिश करती है। विपक्ष पहले से ही दावा कर रही थी कि नोटबंदी से लाखों लोग बेरोजगार हुए हैंं। हालांकि सरकार इस दावे को झूठा बताती थी।