आर्थिक संकट में बाबा महाकाल मंदिर, हर महीने चढ़ते थे 2.5 करोड़, अब खर्च निकालना हुआ मुश्किल

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उज्जैन: वैश्विक महामारी कोरोना की मार महाकाल मंदिर के चढ़ावे पर भी पड़ी है. जिस मंदिर में हर महीने करोड़ों रुपए का चढ़ावा चढ़ता है, वहां अब महीने का खर्च निकालना भी मुश्किल हो रहा है. हर महीने सवा दो करोड़ चढ़ावे वाले विश्व प्रसिद्ध मंदिर में लॉकडाउन के डेढ़ महीने के दौरान सिर्फ 3.33 हजार रुपए का चढ़ावा चढ़ा. इससे ज़्यादा तो इस मंदिर की देखरेख पर हर महीने खर्च होते हैं. महाकाल मंदिर की व्यवस्था पर हर महीने एक करोड़ रुपए से अधिक का खर्च आता है.

Baba Mahakal Temple In Financial Crisis Used To Climb 2 5 Crores Every Month Now It Is Difficult To Extract Expenses :

12 ज्योतिर्लिंगों में से एक विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर कोरोना वायरस के कारण 21 मार्च से बंद है. इसलिए श्रद्धालुओं का आना बंद है. ऐसे में दान-दक्षिणा और चढ़ावा भी नहीं हो रहा है, लेकिन ऑनलाइन दान जारी है. पिछले 56 दिनों में महाकाल मंदिर में ऑनलाइन दान के जरिए अब तक कुल 3 लाख 33 हजार रुपए दान में आए. जबकि आम दिनों में एक महीने में करीब सवा दो करोड़ रुपए मंदिर में चढ़ते थे.

महाकालेश्वर मंदिर की व्यवस्था संभालने के लिए बड़ा स्टाफ तैनात है. यहां इस वक्त करीब 650 कर्मचारी अलग-अलग सेवाओं में नियुक्त हैं. इनकी सेलरी और मंदिर की व्यवस्था पर ही हर महीने करीब 1 से सवा करोड़ रुपए का खर्च आता है. महाकालेश्वर मंदिर समिति इसकी व्यवस्था देखती है. लॉकडाउन के कारण करीब 2 महीने से मंदिर श्रद्धालुओं के लिए बंद है. मंदिर की आवक बंद हो चुकी है इसलिए मंदिर का खर्चा निकालना भी मुश्किल हो रहा है.

मार्च में जो थोड़ा बहुच चढ़ावा आया वो ऑनलाइन दान के जरिए ही मिला. मार्च में कुल 1,22,569 रुपए मंदिर में दान हुए. अप्रैल में ये दोगुना हुआ और कुल 2 लाख 11,561 रुपए का दान मंदिर में पहुंचा, लेकिन ये आम दिनों के मुकाबले कुछ भी नहीं है. महाकाल मंदिर में कुल 650 कर्मचारी तैनात हैं. इनकी सेलरी, बिजली का बिल, अन्न क्षेत्र का खर्च, साफ़ सफाई, मंदिर में पूजा और उसमें लगने वाली सामग्री, सुरक्षा सहित अन्य खर्चो पर हर महीने करीब सवा करोड़ रुपए का खर्च आता है. ये खर्च मंदिर में होने वाले दान और चढ़ावे से निकलता है. अब क्योंकि दान ही नहीं पहुंच रहा इसलिए मंदिर में कई व्यवस्थाएं चरमराई हुई हैं.

महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति अपने कर्मचारियों को वेतन तो दे रही है, लेकिन ये मंदिर की जमा पूंजी में से दिया जा रहा है. महाकाल मंदिर में हर महीने लाखों की तादाद में श्रद्धालु दर्शन के लिए श्रद्धालु आते हैं. उनके चढ़ावे से मंदिर की व्यवस्था बनी हुई है. लॉकडाउन लंबा खिंचने से मंदिर की व्यवस्था भी डगमगा गयी है.

उज्जैन: वैश्विक महामारी कोरोना की मार महाकाल मंदिर के चढ़ावे पर भी पड़ी है. जिस मंदिर में हर महीने करोड़ों रुपए का चढ़ावा चढ़ता है, वहां अब महीने का खर्च निकालना भी मुश्किल हो रहा है. हर महीने सवा दो करोड़ चढ़ावे वाले विश्व प्रसिद्ध मंदिर में लॉकडाउन के डेढ़ महीने के दौरान सिर्फ 3.33 हजार रुपए का चढ़ावा चढ़ा. इससे ज़्यादा तो इस मंदिर की देखरेख पर हर महीने खर्च होते हैं. महाकाल मंदिर की व्यवस्था पर हर महीने एक करोड़ रुपए से अधिक का खर्च आता है. 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर कोरोना वायरस के कारण 21 मार्च से बंद है. इसलिए श्रद्धालुओं का आना बंद है. ऐसे में दान-दक्षिणा और चढ़ावा भी नहीं हो रहा है, लेकिन ऑनलाइन दान जारी है. पिछले 56 दिनों में महाकाल मंदिर में ऑनलाइन दान के जरिए अब तक कुल 3 लाख 33 हजार रुपए दान में आए. जबकि आम दिनों में एक महीने में करीब सवा दो करोड़ रुपए मंदिर में चढ़ते थे. महाकालेश्वर मंदिर की व्यवस्था संभालने के लिए बड़ा स्टाफ तैनात है. यहां इस वक्त करीब 650 कर्मचारी अलग-अलग सेवाओं में नियुक्त हैं. इनकी सेलरी और मंदिर की व्यवस्था पर ही हर महीने करीब 1 से सवा करोड़ रुपए का खर्च आता है. महाकालेश्वर मंदिर समिति इसकी व्यवस्था देखती है. लॉकडाउन के कारण करीब 2 महीने से मंदिर श्रद्धालुओं के लिए बंद है. मंदिर की आवक बंद हो चुकी है इसलिए मंदिर का खर्चा निकालना भी मुश्किल हो रहा है. मार्च में जो थोड़ा बहुच चढ़ावा आया वो ऑनलाइन दान के जरिए ही मिला. मार्च में कुल 1,22,569 रुपए मंदिर में दान हुए. अप्रैल में ये दोगुना हुआ और कुल 2 लाख 11,561 रुपए का दान मंदिर में पहुंचा, लेकिन ये आम दिनों के मुकाबले कुछ भी नहीं है. महाकाल मंदिर में कुल 650 कर्मचारी तैनात हैं. इनकी सेलरी, बिजली का बिल, अन्न क्षेत्र का खर्च, साफ़ सफाई, मंदिर में पूजा और उसमें लगने वाली सामग्री, सुरक्षा सहित अन्य खर्चो पर हर महीने करीब सवा करोड़ रुपए का खर्च आता है. ये खर्च मंदिर में होने वाले दान और चढ़ावे से निकलता है. अब क्योंकि दान ही नहीं पहुंच रहा इसलिए मंदिर में कई व्यवस्थाएं चरमराई हुई हैं. महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति अपने कर्मचारियों को वेतन तो दे रही है, लेकिन ये मंदिर की जमा पूंजी में से दिया जा रहा है. महाकाल मंदिर में हर महीने लाखों की तादाद में श्रद्धालु दर्शन के लिए श्रद्धालु आते हैं. उनके चढ़ावे से मंदिर की व्यवस्था बनी हुई है. लॉकडाउन लंबा खिंचने से मंदिर की व्यवस्था भी डगमगा गयी है.