श्रीश्री रविशंकर की मध्यस्थता से बाबरी एक्शन कमिटी का इंकार

Shree Shree Ravishanka

नई दिल्ली। ऐसी खबरें आ रहीं थी कि आध्यात्म गुरू श्रीश्री रविशंकर को राम मन्दिर और बाबरी मस्जि​द विवाद में मध्यस्थता के लिए चुना गया है। रविशंकर की ओर से भी कहा गया था कि दोनों पक्षों के कुछ लोगों ने उनसे मुलाकात कर इस विवाद में मध्यस्थता करने के लिए कहा था। जब इस मामले में बाबरी मस्जिद की पैरोकारी कर रही बाबरी एक्शन कमिटी के अध्यक्ष हाजी महबूब ने इस दिशा में किसी भी तरह की बात न होने की बात कही है।

Babri Action Committee Denied Any Talk With Shree Shree Ravishankar Ram Mandir Nirman :

एक रिपोर्ट में बाबरी एक्शन कमिटी के अध्यक्ष हाजी महबूब का पक्ष रखते हुए लिखा है कि श्रीश्री रविशंकर के किसी मध्यस्थ का फोन कुछ समय पहले उनके पास आया था। हालांकि फोन पर कोई विस्तृत बातचीत संभव नहीं हो सकी थी। इस विवाद को सुलझाने के लिए हुई पहल का उन्होंने स्वागत किया था लेकिन इसके आगेे कोई बात नहीं बढ़ी। संभव है कि राम मन्दिर पक्ष के पैरोकारों ने इस सिलसिले में श्रीश्री से कोई बातचीत की हो। भविष्य में इस दिशा में कोई प्रयास होता है तो वह समझौते के विषय में विचार अवश्य करेंगे।

ऐसी खबरें उस समय आना शुरू हुईं हैं जब सुप्रीम कोर्ट राम मन्दिर और बाबरी मस्जिद विवाद के स्थायी हल के लिए तत्पर नजर आ रहा है। सुप्रीम कोर्ट 5 दिसंबर से प्रतिदिन इस मामले की सुनवाई करेगा। ऐसे में कई संगठन इस मामले को कोर्ट के बाहर आपसी सहमति से ​खत्म करने के लिए सक्रियता दिखा रहे हैं।

आपको बता दें कि केन्द्र की सत्तारूढ़ भाजपा ने 2014 के अपने चुनावी घोषणा पत्र में राम मन्दिर निर्माण की बात कही थी। जिसके लिए भाजपा 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले केन्द्र सरकार राम मन्दिर विवाद का निपटारा कर राम मन्दिर निर्माण को शुरू करवाना चाहती है। इसके लिए भाजपा ने कई मुस्लिम धर्मगुरुओं को अपने पाले में लाने में सफलता तो हासिल कर ली है लेकिन देश की सांप्रदायिक राजनीति का आधार रह चुके इस विवाद के अदालत में होने के चलते, इसमें समझौते का होना अहम माना जा रहा है।

अब देखना यह होगा कि ​क्या भारत में बहुसंख्यकों की आस्था का केन्द्र अयोध्या स्थित राम जन्मभूमि पर म​न्दिर के निर्माण का रास्ता अदालत से निकल कर आएगा या फिर सांप्रदायिक सौ​हार्दय से।

नई दिल्ली। ऐसी खबरें आ रहीं थी कि आध्यात्म गुरू श्रीश्री रविशंकर को राम मन्दिर और बाबरी मस्जि​द विवाद में मध्यस्थता के लिए चुना गया है। रविशंकर की ओर से भी कहा गया था कि दोनों पक्षों के कुछ लोगों ने उनसे मुलाकात कर इस विवाद में मध्यस्थता करने के लिए कहा था। जब इस मामले में बाबरी मस्जिद की पैरोकारी कर रही बाबरी एक्शन कमिटी के अध्यक्ष हाजी महबूब ने इस दिशा में किसी भी तरह की बात न होने की बात कही है।एक रिपोर्ट में बाबरी एक्शन कमिटी के अध्यक्ष हाजी महबूब का पक्ष रखते हुए लिखा है कि श्रीश्री रविशंकर के किसी मध्यस्थ का फोन कुछ समय पहले उनके पास आया था। हालांकि फोन पर कोई विस्तृत बातचीत संभव नहीं हो सकी थी। इस विवाद को सुलझाने के लिए हुई पहल का उन्होंने स्वागत किया था लेकिन इसके आगेे कोई बात नहीं बढ़ी। संभव है कि राम मन्दिर पक्ष के पैरोकारों ने इस सिलसिले में श्रीश्री से कोई बातचीत की हो। भविष्य में इस दिशा में कोई प्रयास होता है तो वह समझौते के विषय में विचार अवश्य करेंगे।ऐसी खबरें उस समय आना शुरू हुईं हैं जब सुप्रीम कोर्ट राम मन्दिर और बाबरी मस्जिद विवाद के स्थायी हल के लिए तत्पर नजर आ रहा है। सुप्रीम कोर्ट 5 दिसंबर से प्रतिदिन इस मामले की सुनवाई करेगा। ऐसे में कई संगठन इस मामले को कोर्ट के बाहर आपसी सहमति से ​खत्म करने के लिए सक्रियता दिखा रहे हैं।आपको बता दें कि केन्द्र की सत्तारूढ़ भाजपा ने 2014 के अपने चुनावी घोषणा पत्र में राम मन्दिर निर्माण की बात कही थी। जिसके लिए भाजपा 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले केन्द्र सरकार राम मन्दिर विवाद का निपटारा कर राम मन्दिर निर्माण को शुरू करवाना चाहती है। इसके लिए भाजपा ने कई मुस्लिम धर्मगुरुओं को अपने पाले में लाने में सफलता तो हासिल कर ली है लेकिन देश की सांप्रदायिक राजनीति का आधार रह चुके इस विवाद के अदालत में होने के चलते, इसमें समझौते का होना अहम माना जा रहा है।अब देखना यह होगा कि ​क्या भारत में बहुसंख्यकों की आस्था का केन्द्र अयोध्या स्थित राम जन्मभूमि पर म​न्दिर के निर्माण का रास्ता अदालत से निकल कर आएगा या फिर सांप्रदायिक सौ​हार्दय से।