बाबू सिंह कुशवाहा का खुलासा पूर्व एमएलसी इकबाल को दिया 1000 करोड़ Blackmoney

लखनऊ। यूपी एनआरएचएम घोटाले के आरोपी बाबू सिंह कुशवाहा ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारियों द्वारा की गई पूछताछ में खुलासा किया है कि एनआरएचएम घोटाले से अर्जित 1000 करोड़ का कालाधन (Blackmoney) उन्होंने बसपा के पूर्व एमएलसी मोहम्मद इकबाल को सफेद करने के लिए दिया था। कभी अपने के करीबी रहे इकबाल को कुशवाहा ने ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश में खनन के काले कारोबार में उतारा था और बसपा से एमएलसी भी बनवाया था। कुशवाहा के बयानों के बाद ईडी के निशाने पर आए मोहम्मद इकबाल की हैसियत इस बात से आंकी जा रही है कि उसने सहारनपुर में एक प्राइवेट यूनीर्वसिटी, 11 सुगर मिल और नोएडा में एक फाइवस्टार होटल बना रखा है। इसके अलावा वह अपने नौकरों के नाम पर करीब 150 फर्जी कंपनियां भी चला रहा है।




मिली जानकारी के मुताबिक ईडी के पास मोहम्मद इकबाल और बाबू सिंह कुशवाहा के बीच हुए लेन देन के पक्के सुबूत मौजूद हैं। इकबाल की कुंडली खंगालने में जुटी ईडी के हाथ लगे सुबूतों की बात करें तो आज 15000 करोड़ की हैसियत रखने वाला इकबाल कुशवाहा के संपर्क में आने से पहले तक एक मामूली आदमी था। सहारनपुर में लकड़ी की एक टाल और फलों की दुकान चलाने वाले इकबाल ने खनन मंत्री रहे कुशवाहा का विश्वास ​जीतने के बाद यमुना में अवैध खनन के कारोबार में हाथ आजमाया, ​यहां से उसकी किस्मत ने रातों रात करवट बदली और देखते देखते उसने पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के खनन कारोबार को अपनी मुट्ठी में ले​ लिया। कुशवाहा ने इकबाल पर अपने विश्वास के चलते ही उसे बसपा सरकार में एमएलसी बनाकर उसकी राजनैतिक ताकत भी दे दी।




एक समाचार पत्र में छपी रिपोर्ट के मुताबिक ईडी को कुशवाहा से जानकारी मिली है कि मोहम्मद इकबाल ने एनआरएचएम घोटाले में कुशवाहा के हिस्से आए कालेधन में से 1000 करोड़ रूपए को सफेद करने के लिए लिया था। इकबाल ने इस रकम को अपनी पुरानी और कुछ नई मिलाकर करीब 150 फर्जी कंपनियों में इधर से उधर किया और फिर इस रकम को सहारनपुर की ग्लोकल प्राइवेट यूनीवर्सिटी में निवेश कर दिया गया। इन तमाम कंपनियों की जांच के बाद सामने आया कि अधिकांश कंपनियां मोहम्मद इकबाल के नौकरों, ड्राइवरों और अन्य काम करने वालों के नाम पर खोली गईं हैं। जिनमें से करीब 100 कंपनियों के पते फर्जी हैं।




ईडी ने इस पूरे खेल को मनी लांड्रिंग के रूप में देखते हुए कार्रवाई करने का फैसला लिया है। इस मामले में ईडी के अलावा केन्द्र सरकार की 12 अन्य जांच एजेन्सियां भी शामिल होंगी। जिनमें आयकर विभाग, सीबीआई, इन्फोर्समेंट डायरेक्टरेट, फायनेंसियल इंटेलीजेन्स यूनिट, कंपनी अफेयर्स, सीबीडीटी आदि शामिल हैं।

मोहम्मद इकबाल ने ही हिलाई थी कुशवाहा सत्ता—
2007—12 की मायावती सरकार के शुरुआती दिनों में बाबू सिंह कुशवाहा की हैसियत नंबर दो की थी यह बात किसी से छुपी नहीं थी। लेकिन 2011 के अंत में कुशवाहा बसपा सरकार में हासिए पर धकेल दिए गए। उनका नाम एनआरएचएम घोटाले में आया और उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला भी दर्ज हुआ। यह सब कैसे हुआ और क्यों हुआ इस बात का खुलासा भी कुशवाहा की चुप्पी टूटने के बाद हुआ है।

कुशवाहा को बतौर मंत्री जानने वाले लोग बताते हैं कि मायावती भले ही यूपी की सत्ता चलातीं हो लेकिन उस दौर में उनके सामानान्तर कुशवाहा ने भी अपने विश्वास पात्रों के जरिए अपनी एक अलग सरकार बना रखी थी। जिसके अंदर क्या हो रहा इस बात की खबर कभी न तो बाहर आई और न ही मायावती के कानों तक पहुंची।

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चंद सालों में ही कुशवाहा ने हजारों करोड़ की हैसियत बना ली थी। चूंकि कुशवाहा अपने काले धन को सफेद करने की फिराक में थे इसलिए उन्होंने अपने कुछ विश्वास पात्रों को इस काम के लिए अपना जरिया बनाया। जिनमें एक नाम मोहम्मद इकबाल का भी था। इकबाल के पास पहले से ही अवैध खनन से आने वाले कुशवाहा के हिस्से की मोटी रकम मौजूद थी। जिस वजह से कुशवाहा ने उस पर विश्वास करते हुए एनआरएचएम घोटाले से आए 1000 करोड़ भी उसे सफेद करने के लिए थमा दिए।

बताते हैं कि एक मुश्त आई इस बड़ी रकम ने ही मोहम्मद इकबाल को कुशवाहा से दगा करने के लिए मजबूर कर दिया। मोहम्मद इकबाल ने पार्टी के सबसे कद्दावर मुस्लिम नेता नसीमुद्दीन से मिलकर मायावती को कुशवाहा की असलियत बता दी। जिससे बसपा में नसीमुद्दीन मायावती के सबसे विश्वासपात्र हो गए और कुशवाहा को पार्टी ने हासिए पर धकेल दिया। और अंत में उन्हें पार्टी से बाहर कर उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति और एनआरएचएम घोटाले में सीबीआई जांच की सिफारिश भी कर दी।

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