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मनी लॉन्ड्रिंग केस में पूर्व मंत्री कुशवाहा, सौरभ जैन समेत 21 अभियुक्त तलब

By टीम पर्दाफाश 
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लखनऊ। मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में तत्कालीन कैबिनेट मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा समेत 22 अभियुक्तों को पांच फरवरी को सत्र न्यायालय में तलब किया गया है। प्रवर्तन निदेशालय के विशेष वकील कुलदीप श्रीवास्तव ने बताया, मनी लॉन्ड्रिंग का यह मामला प्रदेश के 174 सरकारी अस्पतालों के अपग्रेडेशन के लिए पैकफेड से जारी धनराशि में करोड़ों के घोटाले से जुड़ा है।

बताते चलें कि साल 2010-11 के इस मामले में पैकफेड को हर सरकारी अस्पताल के अपग्रेडेशन के लिए एक-एक करोड़ रुपये की धनराशि एनआरएचएम फंड से आवंटित की गई थी। उस दौरान बाबू सिंह कुशवाहा परिवार कल्याण विभाग के मंत्री थे। निदेशालय ने अभियुक्त कुशवाहा के अलावा नाथूराम कुशवाहा व गया प्रसाद कुशवाहा के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था।

इसके साथ ही लखनऊ की कंपनी मेसर्स ब्लूम्स रियलटर्स एंड हास्पीटैलिटी प्रा.लि., मेसर्स विन्ध्य शक्ति सीमेंट प्रा.लि., भगवत प्रसाद एजुकेंशनल एंड वेलफेयर्स ट्रस्ट व तथागत शिक्षा समिति जबकि नोएडा की कम्पनी मेसर्स डिगी इंटरटेनमेंट प्रा.लि. व इस कम्पनी के निदेशक सौरभ जैन तथा इसकी पत्नी रजनी जैन, कानपुर की कम्पनी मेसर्स एक्सिस इंस्टीट्यूट ऑफ लर्निंग प्राइवेट लिमिटेड, समेत अन्य के खिलाफ भी आरोप पत्र दाखिल किया था।

निदेशालय ने इस मामले में बाबू सिंह कुशवाहा की करीब 60 करोड़ की चल-अचल संपति जब्त की है। जबकि मेसर्स सर्जिकान मेडिक्यूप की 22 करोड़ व सौरभ जैन व उसकी असोसिएट कंपनी की करीब सात करोड़ 12 लाख की संपति जब्त की है। दो जनवरी, 2012 को हाई कोर्ट के आदेश से सीबीआई ने एनआरएचएम घोटाले के इस मामले में एफआईआर दर्ज कर अपनी जांच शुरू की थी। 14 अप्रैल, 2012 को ईडी ने भी करोड़ों के इस घोटाला मामले में मनी लॉन्ड्रिंग ऐक्ट के तहत सूचना दर्ज कर जांच शुरू की।

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