दिल्ली : ​डिप्टी सीएम के तबादला आदेश को अधिकारियों ने नकारा

दिल्ली। दिल्ली में मुख्यमंत्री और एलजी के बीच चल रहा विवाद थमने का नाम नही ले रहा है। इसी के तहत बुधवार को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद डिप्टी सीएम मनीष सिसौदिया द्वारा जारी किए गए तबादला आदेश को अधिकारियों ने मामने से इंकार कर दिया। डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया द्वारा जारी किए गए आदेश को बुधवार शाम नौकरशाहों ने इस आधार पर वापस कर दिया था कि यह “कानूनी रूप से गलत” है।

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बुधवार को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मनीष सिसोदिया ने पत्रकार वार्ता कर कहा कि दो साल पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने ​दिल्ली सरकार से ट्रांसफर—पोस्टिंग का अधिकार छीनकर इसे उपराज्यपाल को दिया था। लेकिन बुधवार को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने नौकरशाहों के तबादलों और तैनातियों के लिए भी एक नई प्रणाली शुरू की, जिसके लिए मंजूरी देने का अधिकार मुख्यमंत्री केजरीवाल को दिया गया है।

कोर्ट के आदेश के अनुसार अभी तक अभी तक आईएएस और दानिक्स (दिल्ली, अंडमान निकोबार द्वीपसमूह सिविल सेवा) अधिकारियों के तबादलों और तैनातियों का अधिकार एलजी के पास था। हालांकि दिल्ली सरकार में कार्यरत वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि दिल्ली केंद्रशासित प्रदेश है इसलिए ऐसे मामले अब भी उपराज्यपाल के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। एक अन्य अधिकारी ने दावा किया कि मई 2015 में गृह मंत्रालय द्वारा जारी उस अधिसूचना को रद्द नहीं किया है जिसके मुताबिक सेवा संबंधी मामले उपराज्यपाल के अधीन आते हैं।

 

दिल्ली। दिल्ली में मुख्यमंत्री और एलजी के बीच चल रहा विवाद थमने का नाम नही ले रहा है। इसी के तहत बुधवार को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद डिप्टी सीएम मनीष सिसौदिया द्वारा जारी किए गए तबादला आदेश को अधिकारियों ने मामने से इंकार कर दिया। डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया द्वारा जारी किए गए आदेश को बुधवार शाम नौकरशाहों ने इस आधार पर वापस कर दिया था कि यह "कानूनी रूप से गलत" है। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मनीष सिसोदिया ने पत्रकार वार्ता कर कहा कि दो साल पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने ​दिल्ली सरकार से ट्रांसफर—पोस्टिंग का अधिकार छीनकर इसे उपराज्यपाल को दिया था। लेकिन बुधवार को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने नौकरशाहों के तबादलों और तैनातियों के लिए भी एक नई प्रणाली शुरू की, जिसके लिए मंजूरी देने का अधिकार मुख्यमंत्री केजरीवाल को दिया गया है। कोर्ट के आदेश के अनुसार अभी तक अभी तक आईएएस और दानिक्स (दिल्ली, अंडमान निकोबार द्वीपसमूह सिविल सेवा) अधिकारियों के तबादलों और तैनातियों का अधिकार एलजी के पास था। हालांकि दिल्ली सरकार में कार्यरत वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि दिल्ली केंद्रशासित प्रदेश है इसलिए ऐसे मामले अब भी उपराज्यपाल के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। एक अन्य अधिकारी ने दावा किया कि मई 2015 में गृह मंत्रालय द्वारा जारी उस अधिसूचना को रद्द नहीं किया है जिसके मुताबिक सेवा संबंधी मामले उपराज्यपाल के अधीन आते हैं।