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विश्व साईकिल दिवस पर आई बुरी खबर, देश की मशहूर साइकिल कंपनी एटलस ने बंद किया कारखाना

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गाजियाबाद। जहां एक तरफ आज पूरी ​दुनिया विश्व साईकिल दिवस मना रहा है वहीं भारत में एक बुरी खबर आ रही है। दरअसल कोराना वायरस के कारण देश में लॉकडाउन का असर अब धीरे-धीरे सामने आने लगा है. सरकार ने अनलॉक-1 का ऐलान कर दिया है और तमाम क्षेत्रों में छूट दी जा रही हैं. इस बीच गाजियाबाद से खबर है कि यहां देश की मशहूर साइकिल कंपनी एटलस ने आर्थिक तंगी के चलते कारखाना चलाने से हाथ खड़े कर दिए हैं. कंपनी का कहना है कि उनके पास अब कोई पैसा नहीं बचा है.

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कंपनी ने कारखाना प्रबंधक के माध्यम से अपने कर्मचारियों के लिए बैठकी (ले-ऑफ) की सूचना दे दी है और इसे गाजियाबाद के उपश्रमायुक्त, संराधन अधिकारी, गाजियाबाद के साथ फैक्ट्री के मुख्य द्वार, नोटिस बोर्ड और कर्मचारी संगठनों के दफ्तर में प्रेषित कर दिया है. इसमें कहा गया है कि कंपनी पिछले कई सालों से भारी आर्थिक संकट से गुजर रही है. कंपनी ने सभी उपलब्ध फंड खर्च कर दिए हैं और स्थिति ये है कि कोई अन्य आय के स्रोत नहीं बचे हैं. यहां तक कि दैनिक खर्चों के लिए भी धन उपलब्ध नहीं हो पा रहा है. सेवायोजक जब तक धन का प्रबंध नहीं कर लेते, तब तक वे कच्चा माल खरीदने के लिए भी असमर्थ हैं. ऐसी स्थिति में सेवायोजक फैक्ट्री चलाने की स्थिति में नहीं हैं. यह स्थिति तब तक बने रहने की आशंका है, जब तक सेवायोजक धन का प्रबंध न कर लें.

सभी कर्मचारी 3 जून से बैठकी (ले-ऑफ) पर घोषित किए जाते हैं. इस दौरान कर्मचारी साप्ताहिक अवकाश छोड़कर रोज फैक्ट्री के गेट पर अपनी हाजिरी लगाएं नहीं तो वे प्रतिकर पाने के अधिकारी नहीं होंगे.

वहीं कंपनी के कर्मचारियों का दूसरा ही कहना है. उन्होंने कहा कि दो दिन से कारखाना खुला है. उन्होंने 1 और 2 जून को कारखाने में काम किया, सफाई व्यवस्था के साथ काम हुआ. आज इन्होने गेट पर अचानक नोटिस लगा दिया और हमसे कहा कि आप हाजिरी लगाओ, अपने-अपने घर जाओ. सैलरी के बारे में भी कहा है कि आधा देंगे या नहीं देंगे, वो बाद की बात है. उन्होंने कहा कि इस कारखाने में करीब 1000 लोग काम करते हैं, ये सभी बेरोजगार हो गए हैं. मान लीजिए उन्होंने 5000 रुपये दिए भी तो उसमें तो हमारा किराया भी नहीं निकलेगा.

वहीं कारखाने से प्रोडक्शन की बात पर कर्मचारी ने बताया कि लॉकडाउन से पहले डेढ़ लाख से 2 लाख तक साइकिल हमने बेचीं. लॉकडाउन में थोड़ा असर जरूर पड़ा है. प्रोडक्शन में कोई कमी नहीं थी. कर्मचारी ने कहा कि आर्थिक तंगी संभव नहीं है. उन्होंने बताया कि एक साल पहले इनकी मालमपुर में यूनिट थी, उसे करीब एक साल पहले इन्होंने ऐसे ही बंद कर दिया था. दूसरा सोनीपत में सबसे बड़ा प्लांट था, वो भी इन्होंने अभी बंद कर दिया है.

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