विशेष पूजा-अर्चना के बाद शीतकाल के लिए बंद हुए बद्रीनाथ धाम के कपाट

विशेष पूजा-अर्चना के बाद शीतकाल के लिए बंद हुए बद्रीनाथ धाम के कपाट
विशेष पूजा-अर्चना के बाद शीतकाल के लिए बंद हुए बद्रीनाथ धाम के कपाट

नई दिल्ली। उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्र स्थित बद्रीनाथ धाम के कपाट मंगलवार को विशेष पूजा के बाद शीतकाल के लिए बंद कर दिया गया। इसी के साथ इस वर्ष की चारधाम यात्रा का समापन भी हो गया। बद्रीपुरी को बैकुंठ धाम, मोक्ष धाम भी कहते हैं। नर नारायण पर्वत के मध्य भैरवी चक्र पर भगवान बद्री नारायण का यह मंदिर है।

Badrinath Dham Door Close On 20 November For Winters :

बता दे कि बद्रीनाथ जी के मंदिर के कपाट वैदिक मंत्रों के साथ बंद कर दिए गया। कल सुबह से वहां विशेष पूजा हुई इसके बाद ठीक 3 बजकर 21 मिनट पर बद्रीनाथ के कपाट इस वर्ष शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए।

कपाट बंद होने के मौके पर जहां देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु भगवान बद्री विशाल के दर्शनों के लिए पहुंचे तो वहीं विदेशी सैलानी भी दर्शनार्थियों के रूप में बद्री धाम पहुंचें। श्रद्धालुओं में भगवान नारायण के दर्शन का उत्साह देखने लायक था। बता दें कि सर्दियों में भीषण ठंड और भारी बर्फबारी की चपेट में रहने के कारण चारों धामों के कपाट अक्टूबर—नवंबर में श्रद्धालुओं के लिये बंद कर दिये जाते हैं जो अगले साल अप्रैल—मई में दोबारा खोले जाते हैं।

नई दिल्ली। उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्र स्थित बद्रीनाथ धाम के कपाट मंगलवार को विशेष पूजा के बाद शीतकाल के लिए बंद कर दिया गया। इसी के साथ इस वर्ष की चारधाम यात्रा का समापन भी हो गया। बद्रीपुरी को बैकुंठ धाम, मोक्ष धाम भी कहते हैं। नर नारायण पर्वत के मध्य भैरवी चक्र पर भगवान बद्री नारायण का यह मंदिर है। बता दे कि बद्रीनाथ जी के मंदिर के कपाट वैदिक मंत्रों के साथ बंद कर दिए गया। कल सुबह से वहां विशेष पूजा हुई इसके बाद ठीक 3 बजकर 21 मिनट पर बद्रीनाथ के कपाट इस वर्ष शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। कपाट बंद होने के मौके पर जहां देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु भगवान बद्री विशाल के दर्शनों के लिए पहुंचे तो वहीं विदेशी सैलानी भी दर्शनार्थियों के रूप में बद्री धाम पहुंचें। श्रद्धालुओं में भगवान नारायण के दर्शन का उत्साह देखने लायक था। बता दें कि सर्दियों में भीषण ठंड और भारी बर्फबारी की चपेट में रहने के कारण चारों धामों के कपाट अक्टूबर—नवंबर में श्रद्धालुओं के लिये बंद कर दिये जाते हैं जो अगले साल अप्रैल—मई में दोबारा खोले जाते हैं।