पुलिस व प्रशासन की लापरवाही से भूमाफिया बनी ‘दबंग महिला’!

बांदा। उत्तर प्रदेश की अखिलेश यादव सरकार में सिर्फ समाजवादी पार्टी से जुड़े लोग ही ग्राम समाज की वेश कीमती जमीन को हथियाने में नहीं लगे हैं, बल्कि कुछ महिलाएं भी दबंगई के बलबूते ‘भूमाफिया’ बन गई हैं। अगर इसकी जीमीनी हकीकत देखना हो तो नरैनी तहसील के रक्सी गांव जाना मत भूलना। जहां एक महिला के आगे मुकामी पुलिस और तहसील प्रशासन भी बेबस है।




बीते तीन माह से रक्सी गांव में एक दबंग महिला जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक के कई आदेशों को धता कर ग्राम समाज की जमीन पर पक्का मकान बनाने में जुटी है। गांव के ग्रामीण लगातार विरोध कर रहे है, अधिकारियों की ड्योढ़ी में चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन मजाल किस अधिकारी की है कि वह उसे अवैध कब्जा करने से रोक सके। चूंकि उसे उपजिलाधिकारी नरैनी के कार्यालय में तैनात एक ‘बाबू’ का वर्दहस्त प्राप्त है।

यहां बता दें कि ‘ग्राम समाज की भूमि गाटा संख्या-306, रकबा-0.1500 हेक्टेअर खाता खतौनी संख्या-00183 में बंजर खाते में दर्ज है। इस भूखंड़ के कुछ हिस्से में करीब 20 साल पहले विजइयां प्रजापति का घर बना था। जिसे उसी गांव के रामअवतार प्रजापति ने खरीद लिया था, जब वह घर बना लिया तो तत्कालीन ग्राम प्रधान ने लेखपाल से जाब्ता फौजदारी अधिनियम की धारा-133 की कार्रवाई कर उपजिलाधिकारी नरैनी की अदालत से बेखली व जुर्माने का आदेश करा दिया। अतिक्रमण मुक्त इसी भूखंड़ को ग्राम प्रधान ने गांव के बउरा मेहतर के नाम आवासीय पट्टा कर दिया।




बाद में अपने आवासीय भूखंड़ को बउरा मेहतर ने जरिए बैनामा फिर रामअवतार को बेंच दिया। लेकिन यहां सफाई कर्मी के पद पर तैनात फुुलिया नामक महिला की दबंगई तो देंखे। उसने उपजिलाधिकारी कार्यालय में तैनात एक बाबू का दामन थामा और जो जमीन कल ग्राम समाज थी, उस पर बल पूर्वक पक्का भवन निर्माण का काम शुरू कर दिया। क्रेता सारे सबूतों के साथ एसपी, डीएम, के अलावा तहसील स्तरीय अधिकारियों को तीन दर्जन शिकायती पत्र दे चुका है। हल्का लेखपाल की रिपोर्ट का संज्ञान लें तो वह जमीन ग्राम समाज है, निबंधन कार्यालय के दस्तावेज से जमीन क्रेता रामअवतार की साबित होती है, लेकिन सढ़ा पुलिस चैकी प्रभारी की आख्या देखें तो जमीन फुलिया की है। जिसका इस जमीन से दूर-दराज का कोई रिश्ता कभी नहीं था।

गांव के एक ग्रामीण दगुन्ना के अनुसार विवादित जमीन राजस्व अभिलेखों में अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित आवादी में दर्ज है। उसने हाल ही में उपजिलाधिकारी नरैनी की अदालत में फुलिया आदि के खिलाफ जा.फौ. अधिनियम के तहत 133 की अर्जी दाखिल की है। दगुन्ना के अधिवक्ता धनीराम कोटार्य ने बताया कि ‘उपजिलाधिकारी नरैनी ने 16 नवंबर को अपने पारित आदेश में मुकामी पुलिस से आख्या मांगी है, लेकिन अब तक पुलिसकर्मी गांव जाने की जरूरत नहीं समझे।’ अधिवक्ता ने बताया कि ‘मुकामी पुलिस पर दबंग महिला से मिले होने के पहले भी आरोप लगते रहे हैं। हो सकता है कि पुलिस अपनी आख्या अदालत में तभी पेश करे, जब उसका पूरा मकान बन जाए।’




इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि ‘जब राम अवतार ने विजइयां से खरीद कर घर बनाया तो यह जमीन ग्राम समाज की थी और प्रशासन ने उसे गिराने में बड़ी मुश्तैदी दिखाई और अब फुलिया बिना अधिकार अपना घर बना रही है, तब प्रशासन को सांप सूंघ गया। आखिर प्रशासन को दोहरे मापदंड़ अपनाने का अधिकार किसने दे दिया?

बाँदा से आर जयन की रिपोर्ट