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PNB स्कैम से भी बड़ा है संदेसरा ब्रदर्स घोटाला, बैंकों को लगाया 14500 करोड़ का चूना

Bank Fraud Sandesara Brothers Scam Much Bigger Than Pnb Scam Enforcement Directorate

By रवि तिवारी 
Updated Date

नई दिल्ली। फर्जी कंपनियां बनाकर बैंकों को हजारों करोड़ रुपये का चूना लगाने वाले स्टर्लिंग बॉयोटेक कंपनी के मालिक संदेसरा ब्रदर्स को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। ईडी के मुताबिक, संदेसरा स्कैम नीरव मोदी के पंजाब नेशनल बैंक ( PNB ) स्कैम से भी बड़ा है।

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स्टर्लिंग बॉयोटेक कंपनी लिमिटेड और संदेसरा ग्रुप के मेन प्रमोटर नितिन संदेसरा, चेतन संदेसरा और दिप्ती संदेसरा ने फर्जी कंपनियां बनाकर कई बैंकों को करीब 14,500 करोड़ का चूना लगाया। जबकि हीरा कारोबारी नीरव मोदी और उसके मामा मेहुल चोकसी ने पीएनबी बैंक में 11,400 करोड़ रुपये का घोटाला किया था।

ईडी ने जब्त की 9000 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति

ईडी ने संदेसरा ग्रुप की 9 हजार 778 करोड़ रुपए की संपत्तियां अटैच की थीं। इनमें नाइजीरिया में ऑयल रिग्स, लंदन में एक जेट और आलीशान फ्लैट शामिल हैं। एसबीएल के प्रमोटर नितिन संदेसरा, चेतन संदेसरा और दीप्ति संदेसरा पहले ही विदेश भाग चुके हैं।

भारतीय बैंकों की विदेशी ब्रांचों से ले रखा था लोन

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सूत्रों के मुताबिक, इस कार्रवाई के दौरान ईडी को कई दस्तावेज भी मिले, जिससे पता चलता है कि संदेसरा ग्रुप ने शेल कंपनियों के जरिए भारतीय बैंकों के विदेशी ब्रांच से 9000 करोड़ का लोन लिया था। ईडी के एक अधिकारी के मुताबिक, स्टर्लिंग बायोटेक लिमिटेड (SBL) ने भारतीय बैंकों से इंडियन और फॉरिन दोनों तरह की करेंसी में लोन हासिल किया था। संदेसरा ब्रदर्स ने ये लोन आंध्रा बैंक, यूको बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया. इलाहाबाद बैंक और बैंक ऑफ इंडिया से ले रखा है।

कारोबार के लिए कर्ज लिया, निजी इस्तेमाल किया: रिपोर्ट

एसबीएल और प्रमोटरों के खिलाफ सीबीआई ने अक्टूबर 2017 में धोखाधड़ी और 5 हजार 383 करोड़ रुपए के बैंक फ्रॉड का केस दर्ज किया था। इसके आधार पर ईडी ने भी मामला दर्ज किया था। ईडी की जांच में पता चला कि संदेसरा ग्रुप की विदेशों में स्थित कंपनियों ने भी भारतीय बैंकों की विदेशी शाखाओं से 9 हजार करोड़ रुपए का कर्ज लिया था।

जांच में यह भी पता चला कि कर्ज की रकम तय उद्देश्य की बजाय दूसरे कामों में लगाई गई। कई भारतीय और विदेशी फर्मों में राशि का हेर-फेर किया गया। प्रमोटर्स ने भारतीय बैंकों के कर्ज की रकम नाईजीरिया के तेल कारोबार में लगाई और निजी इस्तेमाल भी किया।

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